बलिराजगढ़ खोदाई में बाधा, मधुबनी में शरारती तत्वों ने रोकी ऐतिहासिक स्थल की खुदाई, अवशेष चोरी
मधुबनी के ऐतिहासिक बलिराजगढ़ स्थल पर चल रही खोदाई में शरारती तत्वों द्वारा बाधा डाली जा रही है, जिससे काम ...और पढ़ें

खोदाई स्थल पर तोड़ी गई सुरक्षा रस्सी। जागरण
HighLights
बलिराजगढ़ खोदाई में शरारती तत्वों द्वारा बाधा डाली जा रही।
खोदाई स्थल से अवशेष और उपकरण चोरी होने की आशंका।
पुलिस ने जांच शुरू की, सुरक्षा गश्त बढ़ाई गई।
संवाद सहयोगी, बाबूबरही (मधुबनी)। ऐतिहासिक और संरक्षित स्थल बलिराजगढ़ की खोदाई में बाधा डाली जा रही। आर्केलाजिकल सर्वे आफ इंडिया (एएसआई) द्वारा की जा रही खोदाई के बीच कुछ शरारती युवक अवांछित गतिविधियां करते देखे गए। खोदाई बाधित हो रही है।
स्थल की घेराबंदी को लगाए गए खूंटे और रस्सी को तोड़ दिया गया है। अवशेष को सहेजकर रखे यार्डों की घेराबंदी को भी तोड़ दिया गया है। कुछ अवशेष गायब भी हैं। आशंका जाहिर की जा रही कि इनकी चोरी कर ली गई है।
खोदाई के लिए उपयोग में आनेवाले कुछ उपस्करों की भी चोरी हो गई है। इससे खोदाई में लगी टीम निराश और डरी-सहमी है। विगत तीन दिनों से कार्य बंद है। विदित हो कि 29 मार्च से इस स्थल पर खोदाई चल रही है।
शरारती तत्वों को चिह्नित कर रही पुलिस
बलिराजगढ़ किले के पूर्वी-उत्तरी कोण पर वाच टावर होने के साक्ष्य विद्यमान हैं। इसकी सुरक्षा और देखभाल पर किसी का ध्यान नहीं है। दिनभर बकरियां घूमती-मंडराती हैं। अन्य बड़े जानवरों का भी आना-जाना रहता है। यह खोदाई कार्य को प्रभावित कर रहा है।
गुरुवार की रात खोदाई स्थल पर दो तह ईंटें गिरा दी गईं। ग्रामीणों ने इसकी सूचना पुलिस को दी तो शुक्रवार को सदर एसडीपीओ-2 मनोज राम, एसएचओ संतोष कुमार पहुंचे और जायजा लिया।
एसडीपीओ ने कहा कि ऐतिहासिक धरोहर की सुरक्षा के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे। शरारती तत्वों को चिह्नित किया जा रहा है, ऐसे लोगों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। सुरक्षा को लेकर पुलिस गश्ती बढ़ा दी गई है।
पांच सत्रों में हो चुकी है खोदाई
बलिराजगढ़ की अबतक चार बार पांच सत्रों में खोदाई हो चुकी है। इसमें शुंग-कुषाण काल से लेकर पाल काल तक के अवशेष मिल चुके हैं। इसमें टेराकोटा, मनके, मूर्तियां, हाथी दांत की वस्तुएं, पक्की नालियां, लोहे की वस्तुएं, पंचमार्क सिक्के आदि मिले हैं।
सुदृढ़ नगर बस्ती के संकेत भी मिले हैं। अभी किले के उत्तरी भाग में मध्य चहारदीवारी तथा इससे दक्षिण मध्य क्षेत्र में खोदाई चल रही। दक्षिणी भाग में ट्रेंच बनाया गया है। पूर्वी-दक्षिणी ट्रेंच में तकरीबन 20 फीट खोदाई हुई है, जिसमें पानी देखा गया। यह बारिश या रिसाव का हो सकता है।
पूरब-उत्तर ट्रेंच में टेढ़ी-मेढ़ी किंतु मोटी दीवारें मिल रही हैं। एएसआइ का लक्ष्य इसकी तह तक जाना है। किले की उत्तरी मध्य भाग के मध्य चहारदीवारी की खोदाई पांच ट्रेंच में की जा रही है। अलग-अलग ट्रेंच में डेढ़ से पांच फीट तक खोदाई हुई है। इसमें भी मोटी दीवार मिल रही हैं।
जिला प्रशासन एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियों द्वारा उत्खनन कार्य में सहयोग करने की आवश्यकता है। मुखिया, सरपंच एवं वार्ड प्रतिनिधियों द्वारा सहयोग आवश्यक है। मैंने जिलाधिकारी मधुबनी एवं राज्यसभा सदस्य संजय झा से आग्रह किया है कि उत्खनन कार्य में आ रही बाधाओं को दूर करने के लिए समुचित व्यवस्था की जाए।
डा. शिव कुमार मिश्र, सहसंयोजक, इंटैक बिहार चैप्टर।
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