कतला, रोहू व नैनी से बदलेगी किस्मत, मछली पालन का हुनर सीखने मधुबनी से पटना रवाना हुए मत्स्य पालक
मधुबनी से चयनित मत्स्य पालकों का एक दल उन्नत मछली पालन प्रशिक्षण के लिए पटना रवाना हुआ है। यह पहल ...और पढ़ें

प्रशिक्षण के लिए रवाना होता मत्स्य पालकों का दल। फोटो सौ. मत्स्य विभाग

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जागरण संवाददाता, मधुबनी। Bihar Aquaculture Improvement Program: जिले में मछली पालन को आधुनिक और अधिक लाभकारी बनाने की दिशा में मत्स्य विभाग ने ठोस पहल शुरू की है।
जिला मत्स्य पदाधिकारी अंजनी कुमार के निर्देश पर जिले के चयनित मत्स्य पालकों के एक दल को उन्नत प्रशिक्षण के लिए डीएनएस पटना रवाना किया गया।
बिहार एक्वाकल्चर इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के जिला समन्वयक विवेक प्रियदर्शी और विभागीय अधिकारियों ने हरी झंडी दिखाकर दल को रवाना किया।
वैज्ञानिक तकनीक का प्रशिक्षण
पटना में आयोजित इस विशेष प्रशिक्षण के दौरान पालकों को वैज्ञानिक विधि से मछली पालन और उन्नत तालाब प्रबंधन की बारीकियां सिखाई जाएंगी।
इसमें तालाब निर्माण, जल गुणवत्ता नियंत्रण, उत्तम मत्स्य बीज का संचयन, संतुलित आहार प्रबंधन और संक्रामक रोगों से बचाव के उपाय शामिल हैं। कम लागत में उच्च गुणवत्तायुक्त मत्स्य उत्पादन प्राप्त करने के व्यावहारिक गुर भी विशेषज्ञों द्वारा सिखाए जाएंगे।
तालाब प्रबंधन से मुनाफा
मत्स्य पालकों को पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा संतुलित रखने और विकास के अनुरूप आहार की सटीक मात्रा तय करने की तकनीकी जानकारी दी जाएगी।
इसके साथ ही बीमारियों की समय रहते पहचान और जैविक उपचार के तरीकों से भी अवगत कराया जाएगा। बेहतर प्रबंधन से मछलियों की मृत्यु दर में भारी कमी आएगी और पालकों की कुल उत्पादन लागत घटेगी।
प्रमुख देसी कार्प प्रजातियां
बिहार के पारंपरिक और व्यावसायिक तालाबों में भारतीय प्रमुख कार्प (आईएमसी) की मांग सर्वाधिक रहती है। इनमें ऊपरी सतह पर तेजी से बढ़ने वाली कतला (भाकुर), मध्य स्तर पर रहने वाली लोकप्रिय रोहू और तलहटी में भोजन तलाशने वाली मृगल (नैनी) शामिल हैं।
ये तीनों प्रजातियां तालाब के अलग-अलग जल स्तरों का उपयोग कर पारिस्थितिकी तंत्र को संतुलित और उत्पादक बनाए रखती हैं।
विदेशी कार्प का संयोजन
मिश्रित मत्स्य पालन के तहत भारतीय कार्प के साथ विदेशी प्रजातियों जैसे ग्रास कार्प, सिल्वर कार्प और कॉमन कार्प का पालन किया जाता है।
ग्रास कार्प जलीय वनस्पति खाकर खरपतवार नियंत्रित करती है, जबकि सिल्वर कार्प सूक्ष्म प्लवक खाकर तेजी से वजन बढ़ाती है। सर्वभक्षी स्वभाव वाली कॉमन कार्प हर तरह के जलीय वातावरण में आसानी से ढलकर पालकों को अतिरिक्त मुनाफा देती है।
जिले में बढ़ेगा उत्पादन
प्रशिक्षण प्राप्त कर लौटने वाले मत्स्य पालक जिले के अन्य किसानों को भी आधुनिक तकनीकों और वैज्ञानिक पद्धतियों के प्रति प्रेरित करेंगे।
पारंपरिक तौर-तरीकों की जगह वैज्ञानिक प्रबंधन अपनाने से जिले में मत्स्य उत्पादन में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। अधिकारियों के अनुसार मत्स्य पालन को टिकाऊ स्वरोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूती का सशक्त माध्यम बनाने के लिए यह अभियान निरंतर जारी रहेगा।
