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लॉन बॉल्स में 25 साल बाद बिहार को दिलाया गोल्ड मेडल, इनाम में खुशबू को मिली दारोगा की वर्दी

Published: Wed, 26 Aug 2026 08:35 PM (IST)

मधुबनी की खुशबू कुमारी ने 38वें राष्ट्रीय खेल में बिहार को 25 साल बाद लॉन बॉल्स में स्वर्ण पदक दिलाया ...और पढ़ें

अपनी मां ललिता कुमारी के साथ लॉन बॉल्स खिलाड़ी खुशबू कुमारी: जागरण

अपनी मां ललिता कुमारी के साथ लॉन बॉल्स खिलाड़ी खुशबू कुमारी: जागरण

प्रदीप मंडल, मधुबनी। पंडौल प्रखंड के भवानीपुर पंचायत के लक्ष्मीपुर गांव की बेटी खुशबू कुमारी ने अभावों को अपनी कमजोरी नहीं, बल्कि ताकत बनाया है। कभी कच्चे घर में रहकर पढ़ाई और खेत-खलिहान के काम में परिवार का हाथ बंटाने वाली खुशबू ने लॉन बॉल्स में राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई है। अब यह बेटी बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर बनकर नई पारी शुरू करने जा रही है।

खुशबू ने अपने सहयोगियों पायल प्रीति और निखत के साथ उत्तराखंड के देहरादून में आयोजित 38वें राष्ट्रीय खेल की विमेन ट्रिपल्स लॉन बॉल्स स्पर्धा में पश्चिम बंगाल को 16-14 से हराकर बिहार को स्वर्ण पदक दिलाया।

इस जीत के साथ बिहार ने करीब 25 वर्ष बाद लॉन बॉल्स में स्वर्ण पदक हासिल किया है। खुशबू की इस उपलब्धि ने न केवल मधुबनी, बल्कि पूरे बिहार को गौरवान्वित किया है।

खुशबू मध्यमवर्गीय परिवार से आती हैं। उनके पिता रामजतन यादव खेती के साथ लुधियाना में निजी नौकरी करते हैं, जबकि मां ललिता देवी पंडौल स्वास्थ्य केंद्र से जुड़कर आशा कार्यकर्ता के रूप में सेवा देती हैं। आर्थिक चुनौतियों के बावजूद खुशबू ने पढ़ाई के साथ खेल के प्रति अपनी लगन बनाए रखी।

कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, पंडौल से प्रारंभिक शिक्षा लेने वाली खुशबू ने जेएमडीपीएल महिला कॉलेज से विज्ञान संकाय में इंटर और स्नातक की पढ़ाई पूरी की है। करीब 10 वर्ष पहले लॉन बॉल्स से जुड़ीं खुशबू ने धीरे-धीरे इस खेल में अपनी अलग पहचान बनाई।

खुशबू ने वर्ष 2020 के खेलो इंडिया यूथ गेम्स में विमेन पेयर्स स्पर्धा में बिहार के लिए स्वर्ण पदक जीता था। इसके बाद वर्ष 2023-24 में दिल्ली में आयोजित राष्ट्रीय लॉन बॉल्स चैंपियनशिप की विमेन फोर्स स्पर्धा में कांस्य पदक हासिल किया। लगातार बेहतर प्रदर्शन का सिलसिला 38वें राष्ट्रीय खेल में स्वर्ण पदक तक पहुंचा।

हालांकि, राष्ट्रीय खेल के बाद से खुशबू को नियमित रूप से खेलने का मौका नहीं मिला है। उन्होंने बताया कि लॉन बॉल्स के लिए पर्याप्त ग्राउंड और संसाधन उपलब्ध नहीं हैं। 38वें राष्ट्रीय खेल के बाद अब तक कोई प्रतियोगिता आयोजित नहीं हुई है। प्रतियोगिता से करीब 10-15 दिन पहले ही राज्य से बाहर या गुलजारबाग स्टेडियम में मैट बिछाकर अभ्यास करना पड़ता है।

खुशबू के मुताबिक लॉन बॉल्स की एक गेंद का सेट करीब 50-60 हजार रुपये का आता है। आर्थिक रूप से यह उनके लिए आसान नहीं है, इसलिए असम और दूसरे राज्यों से पुराने गेंदों के सेट करीब 15-20 हजार रुपये में मंगाकर अभ्यास करना पड़ता है। इसके बावजूद उनका लक्ष्य देश और बिहार के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है।

राष्ट्रीय खेल में स्वर्ण पदक जीतने के बाद खुशबू की जिंदगी में बड़ा बदलाव आया है। बिहार सरकार के "मेडल लाओ, नौकरी पाओ" अभियान के तहत उन्हें बिहार पुलिस में सब इंस्पेक्टर का पद मिला है। 31 अगस्त को वह पटना जाकर अपना नियुक्ति पत्र प्राप्त करेंगी।

बेटी के दरोगा बनने की खबर से परिवार और गांव में खुशी का माहौल है। स्वर्ण पदक से मिली पुरस्कार व सहयोग राशि और परिजनों के सहयोग से खुशबू अब अपने घर को पक्का कराने की तैयारी में जुटी हैं।

खुशबू की मां ललिता देवी बताती हैं कि बेटी बचपन से ही पढ़ाई के साथ खेल के प्रति भी गंभीर रही। उसकी मेहनत का परिणाम है कि उसने राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाई। खुशबू की सफलता से उसके भाई-बहनों में भी खेल के प्रति रुचि बढ़ी है। खुशबू आगे की पढ़ाई जारी रखना चाहती हैं और उनका सपना बिहार और देश के लिए लगातार पदक जीतना है।

उनकी कहानी अब केवल एक खिलाड़ी की सफलता नहीं, बल्कि सीमित संसाधनों के बीच सपनों को हकीकत में बदलने वाली उस बेटी की कहानी है, जिसने गांव की बेटियों को भी मैदान तक पहुंचने का रास्ता दिखाया है।