सऊदी में फंसे बिहार के मजदूर की हुई सकुशल वतन वापसी, परदेस जाने से पहले रखें इन बातों का ध्यान
Saudi Arabia Bihar Worker Rescue: मधुबनी के प्रवासी श्रमिक मो. नईम नदाफ को सऊदी अरब के अस्पताल से सुरक्षित वापस ...और पढ़ें

मो. नईम नदाफ को हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
संवाद सहयोगी, जयनगर (मधुबनी)। Migrant Workers Legal Rules: बिहार के मधुबनी जिले के बासोपट्टी प्रखंड अंतर्गत महथौर निवासी प्रवासी श्रमिक मो. नईम नदाफ को सऊदी अरब के अस्पताल से सुरक्षित स्वदेश वापस ला लिया गया है।
आग से झुलसने के कारण वह दम्मान सेंट्रल अस्पताल में भर्ती थे, जहां बिल बकाया रहने की वजह से उन्हें छुट्टी नहीं मिल पा रही थी। स्वजनों की गुहार पर बिहार के श्रम संसाधन एवं प्रवासी कल्याण मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने विदेश मंत्रालय और सऊदी अरब स्थित भारतीय राजदूत से संपर्क कर त्वरित पहल कराई।
हैदराबाद में उपचार जारी
विदेश मंत्रालय और दूतावास के साझा सहयोग से श्रमिक को अस्पताल से मुक्त कराकर भारत भेजा गया, जिसके बाद उन्हें हैदराबाद के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मंत्री अरुण शंकर प्रसाद ने कहा कि सरकार श्रमिक हितों और सुरक्षा के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
विदेशों में ऐसी अप्रत्याशित विपदाओं या युद्ध जैसी परिस्थितियों से बचाव के लिए जरूरी है कि कामगार पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनाकर ही विदेश जाएं।
अनिवार्य सरकारी प्रक्रियाएं
विदेश जाने से पहले ईसीआर पासपोर्ट श्रेणी वाले कामगारों के लिए उत्प्रवासन मंजूरी के साथ प्रवासी भारतीय बीमा योजना की पॉलिसी लेना अनिवार्य होता है। इस बीमा में 10 लाख रुपये तक का दुर्घटना या मृत्यु कवर, अस्पताल खर्च, कानूनी सहायता और आपातकालीन वतन वापसी का सुरक्षा कवच मिलता है।
विदेश प्रस्थान से पूर्व विदेश मंत्रालय के ई-माइग्रेट पोर्टल पर कामगार का पूरा विवरण, नियोक्ता का नाम, वीजा प्रति और बीमा विवरण दर्ज होना चाहिए।
विभागों में जरूरी निबंधन
ईसीआर कामगारों की आधिकारिक मंजूरी प्रोटेक्टर ऑफ एमिग्रेंट्स कार्यालय द्वारा ई-माइग्रेट प्रणाली के जरिए निर्गत की जाती है। इसके साथ ही राज्य श्रम संसाधन विभाग के पोर्टल अथवा जिला निबंधन सह परामर्श केंद्र पर भी कामगारों को अपना विवरण पंजीकृत कराना चाहिए।
गंतव्य देश में पहुंचते ही संबंधित भारतीय दूतावास या कॉन्सुलेट की आधिकारिक वेबसाइट पर कामगार के रूप में पंजीकरण कराना बेहद जरूरी होता है।
विपत्ति में सुरक्षा तंत्र
पोर्टल पर पंजीकृत होने के कारण सरकार के पास नियोक्ता, कंपनी और स्थान का सटीक ब्योरा रहता है, जिससे आपातकाल में कामगार को तुरंत ट्रैक किया जा सकता है। इससे कार्यस्थल पर दुर्घटना अथवा विवाद की स्थिति में बीमा राशि, स्वदेश वापसी खर्च और कानूनी सुरक्षा का लाभ बिना रुकावट प्राप्त होता है।
वैध प्रवासन प्रक्रिया पूरी करने से कामगार स्थानीय श्रम कानूनों के तहत सुरक्षित रहते हैं और फर्जीवाड़े के जोखिम से पूरी तरह बच जाते हैं।
संकट में सरकारी मदद
विदेश में वेतन विवाद, पासपोर्ट जब्ती या उत्पीड़न जैसी समस्या होने पर विदेश मंत्रालय के 'मदद' पोर्टल पर ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। भारतीय दूतावास स्थानीय नियोक्ता एवं श्रम न्यायालय के माध्यम से हस्तक्षेप कर विवाद सुलझाने और विधिक सहायता दिलाने में सीधी भूमिका निभाता है।
अत्यधिक संकट या असहाय होने की स्थिति में दूतावास इंडियन कम्युनिटी वेलफेयर फंड से इमरजेंसी सर्टिफिकेट जारी कर सरकारी खर्च पर कामगार को वतन वापस भेजता है।
