नेपाल के बाद भारत की भी सख्ती, मधवापुर बॉर्डर पर केवल दो सड़कों से होगी वाहनों की आवाजाही
SSB Barricading:भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा बढ़ाने के लिए मधवापुर में एसएसबी ने दो मुख्य सड़कों को छोड़कर अन्य सभी रास्तों को वाहनों के ल ...और पढ़ें

मधवापुर में सीमा पर जाने वाली सड़क की बेरिकेडिंग स्थल पर तैनात एसएसबी जवान।
HighLights
मधवापुर सीमा पर वाहनों के लिए रास्ते सील।
एसएसबी ने सुरक्षा बढ़ाने के लिए उठाया कदम।
ग्रामीणों की असहमति के बाद लिया गया फैसला।
संवाद सहयोगी, मधवापुर (मधुबनी)। India Nepal Border: भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर सुरक्षा को अभेद्य बनाने के लिए नेपाल के बाद अब भारत सरकार की ओर से भी बड़ी सख्ती बरती गई है।
केंद्र सरकार के कड़े निर्देश पर मधवापुर सीमा पर तैनात सशस्त्र सीमा बल (SSB) ने रविवार की देर शाम एक बड़ा कदम उठाया है। एसएसबी ने सीमा पर जाने वाली सिर्फ दो मुख्य सड़कों को छोड़कर अन्य सभी संपर्क रास्तों पर बैरिकेडिंग कर उन्हें वाहनों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है।
इस फैसले के साथ ही अंतरराष्ट्रीय सीमा पर चौकसी बढ़ा दी गई है और आने-जाने वाले हर संदिग्ध व्यक्ति की गहन जांच की जा रही है।
केवल पेठिया गाछी और गांधी चौक मार्ग
एसएसबी की ओर से की गई इस सख्त बैरिकेडिंग के तहत सभी छोटे-बड़े रास्तों पर बांस-बल्ला और अवरोधक लगाकर पहिया वाहनों की आवाजाही को पूरी तरह रोक दिया गया है।
हालांकि, सीमावर्ती ग्रामीणों की व्यावहारिक दिक्कतों को देखते हुए इन बंद रास्तों से केवल पैदल आने-जाने की छूट दी गई है। एसएसबी के डिप्टी कमांडेंट हरिनारायण जाट ने बताया कि अंतरराष्ट्रीय सीमा सुरक्षा के मद्देनजर भारत सरकार के दिशा-निर्देशों के तहत यह कार्रवाई की गई है।
वर्तमान में मधवापुर क्षेत्र से लगती सीमा पर केवल दो मुख्य रास्ते— पेठिया गाछी मार्ग और गांधी चौक मार्ग ही पूरी तरह खुले रखे गए हैं, जहां से वाहनों का वैध परिचालन जारी रहेगा।
ग्रामीणों में नहीं बनी आपसी सहमति
इस बैरिकेडिंग की इनसाइड स्टोरी भी काफी दिलचस्प है। करीब दस दिन पहले जब एसएसबी ने सीमा से जुड़े रास्तों को सील करना शुरू किया था, तब स्थानीय ग्रामीणों ने इसका कड़ा विरोध करते हुए हंगामा किया था।
मामले की गंभीरता को देखते हुए बेनीपट्टी के एसडीएम और डीएसपी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया था। इसके बाद एसएसबी कैंप मधवापुर में 48वीं बटालियन के एसएसबी कमांडेंट राजेंद्र कुमार की अध्यक्षता में ग्रामीणों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक हुई थी।
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बैठक में कमांडेंट ने ग्रामीणों की सहूलियत के लिए एक अतिरिक्त (तीसरी) सड़क खुली रखने का आश्वासन दिया था। उन्होंने ग्रामीणों से कहा था, "आप सभी आपस में बैठक कर आम सहमति से किसी एक रास्ते का नाम तय कर लें, जिसे खुला रखना है।"
बैठक के बाद भी बेनतीजा रहा मामला
एसएसबी के आश्वासन के बाद जिला प्रशासन भी एक्टिव हुआ। स्वयं जिलाधिकारी (डीएम) और पुलिस अधीक्षक (एसपी) ने मधवापुर थाने पर ग्रामीणों के साथ पंचायत की।
डीएम ने ग्रामीणों को स्पष्ट रूप से दो दिनों का समय देते हुए किसी एक रास्ते पर सर्वसम्मति बनाने को कहा था। स्थानीय स्तर पर ग्रामीणों के बीच कई दौर की बैठकें हुईं, लेकिन सीमावर्ती गांवों के लोग किसी एक रास्ते को लेकर आपस में एकमत नहीं हो सके।
बीते शनिवार को ग्रामीणों ने खुद एसएसबी कैंप पहुंचकर डिप्टी कमांडेंट को यह जानकारी दी कि उनके बीच आपसी सहमति नहीं बन पाई है।
ग्रामीणों की इसी गुटबाजी और विफलता के बाद, एसएसबी ने रविवार की शाम निर्धारित दो मुख्य मार्गों को छोड़कर बाकी सभी बॉर्डर रूटों को कंक्रीट और बांस-बल्लों से सील कर दिया।
खुल सकता है एक और रास्ता
सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि यह पाबंदी पूरी तरह से राष्ट्रीय सुरक्षा और तस्करी पर लगाम लगाने के उद्देश्य से की गई है, लेकिन प्रशासन जनता को परेशान नहीं करना चाहता।
सीमा सुरक्षा हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता है और भारत सरकार के आदेश पर ही यह बैरिकेडिंग की गई है। हालांकि, स्थानीय ग्रामीणों के हितों का भी ख्याल रखा जा रहा है। यदि भविष्य में ग्रामीणों के बीच आपसी मनमुटाव खत्म हो जाता है और वे किसी एक अन्य रास्ते को खोलने पर सर्वसम्मति बना लेते हैं, तो नियमों के तहत एक और रास्ता वाहनों के लिए खोला जा सकता है। फिलहाल सीमा पर सुरक्षा घेरा बेहद सख्त रहेगा।
हरिनारायण जाट, डिप्टी कमांडेंट, 48वीं बटालियन, एसएसबी