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मिथिला से पहली बार अयोध्या में बालक राम को भेजी गई राखी, पीएम मोदी और सीएम योगी को भी उपहार

Published: Thu, 27 Aug 2026 09:48 PM (IST)

Ayodhya Ram Mandir Rakhi: मधुबनी की विनीता झा और निशा झा ने मिथिला पेंटिंग से बनी अनूठी राखियां अयोध्या में ...और पढ़ें

पेंटिंगयुक्त राखी तैयार करतीं कलाकार विनीता झा! फोटो सौ. स्वयं

पेंटिंगयुक्त राखी तैयार करतीं कलाकार विनीता झा! फोटो सौ. स्वयं

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राजेश रंजन शशि, मधुबनी। Mithila Painting Rakhi Madhubani: जिले के रामनगर की विख्यात मिथिला पेंटिंग कलाकार विनीता झा और उनकी पुत्री निशा झा ने रक्षाबंधन के पावन पर्व पर अनूठी हस्तनिर्मित राखियां तैयार की हैं।

मिथिला से पहली बार भगवान श्रीराम की बड़ी बहन माता शांता की ओर से अयोध्या के भव्य राम मंदिर में विराजमान बालक राम के लिए प्रतीकात्मक राखी भेजी गई है।

इन खास राखियों के साथ मधुबनी के प्रसिद्ध मखाने को आकर्षक पैकेजिंग में इंडिया पोस्ट के माध्यम से उपहार स्वरूप भेजा गया है।

खास हस्तियों को भेंट

मां और बेटी की जोड़ी द्वारा तैयार विशेष राखियां राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को भी डाक से भेजी गई हैं।

इन अनूठी राखियों को बनाने में मधुबनी पेंटिंग, प्राकृतिक रंग, रेशम के धागे और मिथिला के प्रसिद्ध मखाने का खूबसूरती से इस्तेमाल किया गया है।

प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल के संदेश से प्रेरित होकर स्थानीय कला, संस्कृति और परंपरा को इस रक्षा-सूत्र में पिरोया गया है।

संस्कृति और कला का संगम

कलाकारों का कहना है कि यह केवल रक्षा-सूत्र नहीं बल्कि मिथिला की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान और स्थानीय कारीगरों के अथक परिश्रम का साकार रूप है।

मखाने की पवित्रता और रेशम की कोमलता के साथ जब मिथिला चित्रकला के पारंपरिक रंग मिलते हैं तो यह प्रेम के साथ राष्ट्रप्रेम का भी संदेश देता है।

विनीता झा को राज्य पुरस्कार समेत दो दर्जन से अधिक सम्मान मिल चुके हैं, जबकि उनकी पुत्री निशा झा भी रेलवे मंत्रालय के राष्ट्रीय पुरस्कार व राज्य पुरस्कार से सम्मानित हैं।

माता शांता का प्रसंग

श्रीमद्भागवत महापुराण के नवम स्कंध के अनुसार मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की एक बड़ी बहन थीं जिनका नाम शांता था।

राजा दशरथ और महारानी कौशल्या की पुत्री शांता को बचपन में ही अंगदेश के निःसंतान राजा रोमपद ने अपनी पुत्री के रूप में गोद ले लिया था।

बाद में देवी शांता का विवाह महर्षि ऋष्यश्रृंग के साथ संपन्न हुआ, जिनके द्वारा कराए गए पुत्रेष्टि यज्ञ के पुण्य फल से प्रभु राम समेत चारों भाइयों का प्राकट्य हुआ।