मधुबनी में रामचरितमानस थीम पर बन रही 108 मीटर लंबी मिथिला पेंटिंग, विश्व रिकॉर्ड बनाने की तैयारी
Longest Canvas Painting: बिहार के मधुबनी में मिथिला चित्रकला संस्थान के 160 छात्र-छात्राएं रामचरितमानस पर आधारित 108 मीटर लंबी विश्व ...और पढ़ें
जागरण संवाददाता, मधुबनी। Madhubani Mithila Painting: बिहार के मधुबनी स्थित मिथिला चित्रकला संस्थान में विश्व की सबसे लंबी कैनवास पेंटिंग तैयार की जा रही है। संस्थान के 160 छात्र-छात्राएं मिलकर 108 मीटर लंबी और एक मीटर चौड़ी इस भव्य मिथिला पेंटिंग को अंतिम रूप देने में जुटे हैं।
रामचरितमानस की थीम पर आधारित इस कलाकृति में भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े 51 प्रसंगों को बेहद खूबसूरती से उकेरा जा रहा है।

विश्व रिकॉर्ड की तैयारी
सोमवार से शुरू हुआ यह कलात्मक कार्य 14 अगस्त को पूरी तरह तैयार हो जाएगा। 15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर इस पेंटिंग को 'वर्ल्ड रिकॉर्ड्स यूनियन' में दर्ज कराने की आधिकारिक पहल की जाएगी।
संस्थान के सभी कलाकार प्रतिदिन सुबह 10 बजे से लेकर देर शाम तक पूरी लगन के साथ इस ऐतिहासिक पेंटिंग को पूरा करने में लगे हैं।
कचनी और भरनी शैली
कैनवास के बॉर्डर के भीतर रामचरितमानस के 51 प्रसंगों को चित्रित करने के बाद कचनी और भरनी शैली का उपयोग कर इसे जीवंत बनाया गया है।
इस पेंटिंग की खासियत यह होगी कि प्रत्येक प्रसंग के नीचे रामचरितमानस के संबंधित दोहे भी लिखे जाएंगे। हर थीम को संवारने में तीन-तीन कलाकार जुटे हैं, जिनके नाम भी उनकी बनाई गई पेंटिंग के नीचे अंकित रहेंगे।
पद्मश्री कलाकारों का मार्गदर्शन
इस अनोखी पेंटिंग का निर्माण तीन पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित कलाकारों और तीन कनीय आचार्यों के मार्गदर्शन में हो रहा है। पद्मश्री दुलारी देवी, बउआ देवी और शिवन पासवान के साथ कनीय आचार्य डॉ. रानी झा, सुरेन्द्र प्रसाद यादव, अभिषेक कुमार, प्रतीक प्रभाकर और डॉ. संजय जायसवाल इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
संस्थान के निदेशक चंद्रशेखर प्रसाद सिंह के अनुसार, इस ऐतिहासिक काम में शामिल सभी कलाकारों को बाद में प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।

रामचरितमानस के प्रमुख प्रसंग
इस 108 मीटर के कैनवास पर राम जन्म, अवध में जन्मोत्सव, चारों भाइयों की शिक्षा-दीक्षा और विश्वामित्र संग गमन जैसे शुरुआती प्रसंग दर्शाए गए हैं। इसके साथ ही ताड़का-सुबाहु वध, अहिल्या उद्धार, जनकपुर आगमन, सीता जन्म, धनुष यज्ञ और भव्य सीता-राम विवाह को पारंपरिक मिथिला शैली में सजाया गया है।
पेंटिंग में अशोक वाटिका, लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना, रावण वध, सीता जी की अग्नि परीक्षा और अंत में भव्य राम दरबार के दृश्य को भी भव्यता से उकेरा गया है।
