Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पेंशन बढ़ोतरी के बाद बढ़ा उत्साह, मधुबनी में दिव्यांग प्रमाण पत्र के लिए उमड़ी भीड़ 

    By Rajesh Ranjan Edited By: Dharmendra Singh
    Updated: Fri, 03 Apr 2026 06:47 PM (IST)

    मधुबनी के सदर अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र (यूडीआईडी) बनवाने वालों की भीड़ बढ़ गई है। पेंशन राशि 400 से 1100 रुपये होने के बाद ग्रामीण इलाकों से भ ...और पढ़ें

    जन्म मृत्यु कार्यालय में प्रमाण पत्र लेने के लिए पहुंचे दिव्यांग। जागरण

    जन्म मृत्यु कार्यालय में प्रमाण पत्र लेने के लिए पहुंचे दिव्यांग। जागरण

    HighLights

    1. पेंशन बढ़ने से दिव्यांग प्रमाण पत्र की मांग बढ़ी।

    2. मधुबनी सदर अस्पताल में 3000 से अधिक प्रमाण पत्र जारी।

    3. कम दिव्यांगता वाले लोग लाभ से वंचित रह रहे।

    जागरण संवाददाता, मधुबनी । सदर अस्पताल में दिव्यांग प्रमाण पत्र (यूडीआईडी) बनवाने वाले लोगों की होड़ मची हुई है। जबसे दिव्यांगों के पेंशन की राशि में बढ़ोतरी हुई है, तबसे लगातार सुदूर ग्रामीण इलाकों से भी लाभुक पहुंच रहे हैं।

    ऐसे में हर कैंप में 70 से 100 की संख्या में दिव्यांग एवं उनके परिजन पहुंचते हैं। मिली जानकारी के मुताबिक बीते मार्च महीने तक 3000 से अधिक दिव्यांगता प्रमाण पत्र सदर अस्पताल से जारी किया गया है। पहले यह आंकड़ा काफी कम था।

    सदर अस्पताल में प्रत्येक सप्ताह करीब 60 से 70 लोग मेडिकल जांच में पहुंचते हैं। जिले के सभी 21 प्रखंडों से दिव्यांग अपने प्रमाण पत्र बनवाने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। हर माह करीब 250 से 300 तक आवेदक अपना मेडिकल सत्यापन के लिए पहुंचते हैं।

    पहले दिव्यांग जनों को सिर्फ 400 रुपए मासिक पेंशन मिलती थी। मगर सरकार ने इसे बढ़ाकर 1100 रुपए कर दिया। इसके बाद से लोगों ने सजगता दिखाते हुए अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र के लिए आवेदन कर जांच के लिए अस्पताल पहुंच रहे हैं।

    खबरें और भी

    दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करने वाले लिपिक राम विनय सिंह ने बताया कि सदर अस्पताल में हर तरह के लोग प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंच रहे हैं।

    आंख, कान, गला और शारीरिक रूप से अक्षम तमाम दिव्यांग अपना दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवाने के लिए अधिक संख्या में लाभुक आ रहे हैं।  मिली जानकारी के मुताबिक कुछ ऐसे भी लाभुक पहुंच रहे हैं जिनकी दिव्यांगता प्रतिशत 40 प्रतिशत से काम रहता है।

    विभागीय नियम के मुताबिक 40 प्रतिशत से नीचे की दिव्यांगता पर किसी तरह का कोई लाभ नहीं मिलता है। ऐसे लाभुकों की संख्या करीब हर मेडिकल कैंप में 25 से 30 रहती है। खासकर शारीरिक रूप से अक्षम अधिक पहुंच रहे हैं।

    मेडिकल कैंप के दौरान इस वजह से भारी भीड़ जुट जाती है। हालांकि कई ऐसे भी दिव्यांग अपना प्रमाण पत्र बनवाने के लिए पहुंचते हैं जिनको एक या दो लोगों को सहारा देकर सुदूर ग्रामीण क्षेत्र से अस्पताल पहुंचाने की मजबूरी है।

    इस दौरान उन्हें भारी कठिनाई का सामना भी करना पड़ता है।गुरुवार को प्रमाण पत्र लेने पहुंचे दिव्यांग छोटू मुखिया, जमीला खातून, श्रवण दास आदि ने बताया कि मेडिकल कैंप में जांच कराने के लिए भी 9 बजे अस्पताल पहुंचे थे, करीब दो बजे तक चेक अप हुआ था। आज सर्टिफिकेट के लिए बुलाया गया है।

    अगर आज भी अधिक देर हुई तो घर लौटते-लौटते शाम हो जाएगी। सदर अस्पताल अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन ने बताया कि शारीरिक विकलांगता से संबंधित अधिक दिव्यांग मेडिकल बोर्ड में भाग ले रहे हैं।

    इधर नेत्र सर्जन डॉ. आकांक्षा ने बताया कि आंख से संबंधित दिव्यांग भी 10 से अधिक की संख्या में हर कैंप में आ रहे हैं। वही मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. श्रवण कुमार ने बताया कि हर कैंप में तीन से पांच दिव्यांग मेडिकल बोर्ड में जांच कराने आ रहे हैं।