Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    मधुबनी में 1.46 लाख किसानों का सम्मान निधि से नाम कटने का खतरा! कागज की कमी से नहीं बन पाई फार्मर ID

    Updated: Wed, 29 Apr 2026 04:22 PM (IST)

    मधुबनी में किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराने में जमीन संबंधी दस्तावेजों की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है, जिससे वे कृषि योजनाओं के लाभ से वंचित हो ...और पढ़ें

    किसान सम्मान निधि से कट सकता है नाम। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

    किसान सम्मान निधि से कट सकता है नाम। ग्राफिक्स एआई जनरेटेड

    HighLights

    1. मधुबनी में 45% किसान फार्मर रजिस्ट्री नहीं करा पाए।

    2. जमीन के कागजात और संयुक्त जमाबंदी मुख्य बाधा।

    3. पीएम किसान सहित कृषि योजनाओं के लाभ से वंचित।

    प्रदीप मंडल, मधुबनी। कृषि विभाग की योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसानों को फार्मर रजिस्ट्री कराना अनिवार्य कर दिया गया है। लेकिन फार्मर रजिस्ट्री के नए नियम किसानों के लिए परेशानी का कारण बने हुए हैं।

    जिला में मिशन मोड में अभियान चलाकर सभी पंचायत में विशेष कैंप लगा फार्मर रजिस्ट्री एवं ई-केवाईसी की प्रक्रिया फरवरी तक की गई।

    बावजूद इसके जिले में पीएम किसान सम्मान निधि योजना के 3 लाख 21 हजार 514 पंजीकृत किसानों में से अब तक केवल 1 लाख 74 हजार 742 किसानों का फार्मर रजिस्ट्री हुआ है। 

    इस तरह जिले में अब तक प्रधानमंत्री किसान सम्मन निधि योजना के लिए पंजीकृत किसानों में से महज 55 प्रतिशत किसानों का फार्मर रजिस्ट्री हुआ है, जिन्हें यूनिक आईडी जारी किया जा चुका है।

    परेशानियों से जूझ रहे किसान

    विभागीय कर्मियों के अनुसार, पीएम किसान योजना के लिए पूर्व में कई किसानों ने अपने पूर्वजों या परिवार के अन्य सदस्यों के नाम पर दर्ज जमीन के आधार पर आवेदन कर दिया था, लेकिन अब फार्मर रजिस्ट्री केवल उन्हीं किसानों की हुआ है, जिनके नाम पर जमीन की जमाबंदी दर्ज है।

    ऐसे में पूर्वजों के नाम से जमीन रखने वाले बड़ी संख्या में किसान रजिस्ट्री से वंचित रह गए हैं। फार्मर रजिस्ट्री के दौरान जमीन की जमाबंदी में दर्ज नाम और आधार कार्ड में नाम में अंतर होने पर भी रजिस्ट्रेशन नहीं हो सका है। इससे किसानों की परेशानी और बढ़ गई है।

    संयुक्त जमाबंदी रही समस्या

    जिले में संयुक्त जमाबंदी के कारण बड़ी संख्या में किसान निबंधन नहीं करा सके हैं। किसानों का कहना है कि निबंधन के लिए अंचल कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।

    दरअसल, अब एलपीसी, किसान सम्मान निधि, केसीसी और विभिन्न कृषि योजनाओं का लाभ लेने के लिए किसान निबंधन अनिवार्य कर दिया गया है। ऐसे में निबंधन नहीं होने से किसान सरकारी योजनाओं से वंचित होने का खतरा महसूस कर रहे हैं।

    किसानों का आरोप है कि संयुक्त जमाबंदी को अलग कराने की प्रक्रिया काफी जटिल है। जिले में अधिकांश किसानों की जमीन की जमाबंदी आज भी उनके मृत पिता या दादा के नाम से दर्ज है, जबकि कई मामलों में नाम की त्रुटियां भी हैं। इन कारणों से किसान निबंधन नहीं हो पा रहा है।

    खबरें और भी

    94 प्रतिशत किसानों का ई-केवाईसी पूरा

    जिले के 3 लाख से अधिक पंजीकृत किसानों का ई-केवाईसी पूरा कर लिया गया है। जबकि फॉर्मर रजिस्ट्री महज 1,74742 किसानों का ही किया जा सका है। विभागीय कर्मियों का कहना है कि एफआर प्रक्रिया में सबसे अधिक परेशानी रही है। संबंधित किसान के नाम से जमीन का अद्यतन और स्पष्ट कागजात होना अनिवार्य है। कई किसानों के पास संयुक्त या पारिवारिक नाम से दर्ज भूमि है, जबकि कई मामलों में जमीन के दस्तावेज अपडेट नहीं हैं।

    प्रखंड: कुल पंजीकृत किसान - फार्मर रजिस्ट्री की संख्या

    • अंधराठाढ़ी: 12,137 - 7,129
    • बाबूबरही: 27,156 - 9,253
    • बासोपट्टी: 11,479 - 6,737
    • बेनीपट्टी: 26,101 - 12,325
    • बिस्फी: 17,917 - 9,347
    • घोघरडीहा: 25,598 - 7,551
    • हरलाखी: 21,855 - 7,040
    • जयनगर: 10,813 - 5,137
    • झंझारपुर: 9,928 - 8,075
    • कलुआही: 6,739 - 5,873
    • खजौली: 8,877 - 6,285
    • लदनियां: 19,426 - 8,528
    • लखनौर: 11,496 - 6,835
    • खुटौना: 22,286 - 8,321
    • लौकही: 12,515 - 11,421
    • मधेपुर: 20,997 - 8,097
    • मधवापुर: 6,949 - 5,491
    • पंडौल: 15,811 - 13,835
    • फुलपरास: 15,674 - 8,777
    • रहिका: 8,120 - 9,073
    • राजनगर : 11,953 - 9,612

    क्या कहते हैं पदाधिकारी

    प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना के लाभुक 174742 किसानों का फॉर्मर रजिस्ट्री करते हुए यूनिक आईडी कोड तैयार किया जा चुका है। पंजीकृत सभी किसानों को ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री करवाना होगा। जिनका ई-केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री नहीं होगा उन्हें सरकार के द्वारा दी जाने वाली विभिन्न कृषि योजनाओं से वंचित रहना पड़ सकता है। -ललन कुमार चौधरी, जिला कृषि पदाधिकारी मधुबनी