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मधुबनी गोलीकांड: SIT की 12 टीमें, STF और तकनीकी सेल भी नाकाम, आखिर कहां छिपा है चंद्रमोहन

Published: Fri, 06 Nov 2026 11:43 PM (IST)

एसआईटी की 12 टीमें, एसटीएफ और विशेष तकनीकी टीमें बिहार से नेपाल तक उसकी तलाश में जुटी हैं, जबकि घटना ...और पढ़ें

ग्रामीणों ने उसे घेरा तो उसने कथित तौर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

ग्रामीणों ने उसे घेरा तो उसने कथित तौर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

ब्रज मोहन मिश्र, मधुबनी। Madhubani Firing Case: मिथिला के इतिहास को अपने गर्भ में समेटे बलिराजगढ़ इन दिनों देशभर में चर्चा में है।

वजह कोई पुरातात्विक उपलब्धि नहीं, बल्कि पुलिसिया कार्रवाई और गोलीकांड है। गढ़ की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मी पर ही गंभीर आरोप लगे हैं और घटना के मुख्य आरोपित एएसआई चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी अब तक नहीं हो सकी है।

सोमवार रात गलत नीयत से पिकेट प्रभारी एएसआई चंद्रमोहन सिंह के एक युवती के घर में घुसने का आरोप है। ग्रामीणों ने उसे घेरा तो उसने कथित तौर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी।

बेटी की शादी के लिए तीन साल बाद घर आए अशोक यादव की सरकारी गोली से मौत हो गई, जबकि फूलो देवी, बिजेंद्र यादव और धनिक लाल घायल हो गए।

90 घंटे बाद भी गिरफ्तारी नहीं

घटना के बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने धरना-प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर पुलिस प्रशासन के खिलाफ नाराजगी जताई। डीएम के साथ दुर्व्यवहार की घटना भी हुई।

एसएसपी ने चंद्रमोहन सिंह पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया और निलंबन से लेकर बर्खास्तगी तक की कार्रवाई की गई। हालांकि, छोटे ओहदे के पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई के बावजूद मुख्य आरोपित अब तक गिरफ्त से बाहर है।

नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पीड़ित परिवार से मुलाकात कर न्याय की लड़ाई लड़ने की बात कही। घटना को लेकर नेताओं के बयान और पक्ष-विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप भी सामने आए।

इस बीच एसआईटी की 12 टीमें, एसटीएफ और विशेष तकनीकी टीमें मधुबनी से मुंबई तथा भारत से नेपाल तक चंद्रमोहन की तलाश में जुटी हैं।

शुक्रवार शाम तक घटना के करीब 90 घंटे बीत चुके थे, लेकिन पुलिस को सफलता नहीं मिली थी। संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी और तकनीकी निगरानी के बावजूद चंद्रमोहन सिंह पुलिस की पकड़ से दूर है। सीमावर्ती क्षेत्र में एसएसबी भी नजर रख रही है।

घटना की रात क्या हुआ

सोमवार रात करीब 11 बजे एएसआई चंद्रमोहन सिंह के युवती के घर में घुसने की बात सामने आई। रात 11:20 बजे घर बंद कर ग्रामीणों ने उसे घेर लिया।

प्राथमिकी के अनुसार, रात 11:53 बजे डायल 112 को सूचना मिली। इसके बाद रात करीब 12 बजे गोलियां चलीं और अफरातफरी मच गई। फायरिंग में चार लोगों को गोली लगने की बात सामने आई।

रात करीब 12:40 बजे डायल 112 की पुलिस गांव पहुंची, लेकिन तब तक एएसआई फरार हो चुका था। रात एक बजे घायलों को सदर अस्पताल लाया गया।

एसएसपी भी अस्पताल पहुंचे। इसके बाद पूरी रात पुलिस और प्रशासनिक स्तर पर हलचल रही, लेकिन चंद्रमोहन की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

मंगलवार को सड़क पर उतरे लोग

मंगलवार सुबह आठ बजे मृतक अशोक यादव का शव सड़क पर रखकर आक्रोशित लोगों ने जाम लगा दिया। सुबह नौ बजे राजद, जसुराज और विभिन्न सामाजिक संगठनों के कार्यकर्ता ग्रामीणों के साथ सड़क पर उतर आए। सुबह 10 बजे लोगों ने पुलिस टीम को खदेड़ दिया।

इसके बाद कई थानों और अनुमंडलों की पुलिस के साथ दरभंगा की पुलिस भी मौके पर पहुंची। सुबह 11:30 बजे दरभंगा रेंज के डीआइजी मनोज तिवारी बाबूबरही थाना पहुंचे और अधिकारियों के साथ बैठक की।

इसी दौरान एसएसपी ने चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी पर 25 हजार रुपये का इनाम घोषित करने के साथ उसके निलंबन और बर्खास्तगी की कार्रवाई शुरू कर दी तथा एसआईटी की पांच टीमें गठित की गईं।

दोपहर एक बजे तक लोग प्रशासन की बात सुनने को तैयार नहीं थे। दोपहर दो बजे डीएम स्वयं लोगों को समझाने पहुंचे, लेकिन इस दौरान आक्रोशित महिलाओं ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया।

पुलिस अभिरक्षा में डीएम को वहां से निकाला गया और इसके बाद मामला इंटरनेट मीडिया के साथ देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

करीब छह घंटे तक चला सड़क जाम उचित कार्रवाई के आश्वासन के बाद समाप्त हुआ। दोपहर 3:30 बजे नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने घटना की निंदा करते हुए इंटरनेट मीडिया पर पोस्ट किया।

रात में शव के अंतिम संस्कार, दोनों लड़कियों के मेडिकल परीक्षण और बयान को लेकर गहमागहमी बनी रही, लेकिन ग्रामीण चंद्रमोहन की गिरफ्तारी की मांग पर अड़े रहे।

बुधवार को बढ़ाई गई टीमें

बुधवार सुबह आठ से नौ बजे के बीच अशोक यादव का पुलिस सुरक्षा में अंतिम संस्कार कराया गया। दोपहर में घर बंद कर एक बालिग और एक नाबालिग लड़की का भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 183 के तहत बयान दर्ज कराया गया और मेडिकल परीक्षण कराया गया।

शाम छह बजे एसएसपी ने प्रेसवार्ता कर चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी के लिए चलाए जा रहे अभियान की जानकारी दी।

एसएसपी ने बताया कि एसआईटी की 12 टीमें बनाई गई हैं। इनमें चार टीमें मधुबनी से बाहर, चार नेपाल और चार मधुबनी के विभिन्न ठिकानों पर तलाश कर रही हैं।

पुलिस टीमें चंद्रमोहन सिंह के बक्सर स्थित मूल घर और उसके ससुराल तक पहुंचीं तथा पत्नी और भाइयों से भी पूछताछ की, लेकिन उसकी गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

तेजस्वी ने दी आंदोलन की चेतावनी

गुरुवार शाम पांच बजे तेजस्वी यादव अशोक यादव के परिवार से मिलने बलिराजगढ़ पहुंचे। उन्होंने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए लड़ाई लड़ने का एलान किया। उन्होंने पुलिस को चेतावनी दी थी कि उनके पहुंचने से पहले गिरफ्तारी नहीं हुई तो बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

तेजस्वी के पहुंचने पर बलिराजगढ़ में बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जुटी। पुलिस की भी भारी तैनाती रही, लेकिन इस दिन भी चंद्रमोहन सिंह की गिरफ्तारी नहीं हो सकी।

शुक्रवार को गांव की स्थिति सामान्य हो गई और पुलिस की तैनाती भी कम कर दी गई। युवती के घर से पुलिस की सुरक्षा हटा ली गई, लेकिन मुख्य आरोपित अब भी फरार है।

खुदाई पर घटना का असर

बलिराजगढ़ में हुई इस घटना का असर यहां चल रहे पुरातात्विक उत्खनन पर भी पड़ सकता है। यहां कई बार खुदाई शुरू हुई, लेकिन पूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले काम बंद हो गया। मार्च 2026 में पूरी तैयारी और समारोह के साथ पांचवीं बार खुदाई शुरू की गई थी।

करीब साढ़े तीन महीने तक खुदाई चली। इस दौरान चोरी और कुछ असामाजिक तत्वों की गतिविधियों के कारण परेशानी भी हुई थी, जिसके बाद वहां पुलिस पिकेट बनाया गया था।

जुलाई में बारिश के कारण खुदाई का काम बंद हो गया, जो अब तक शुरू नहीं हो सका है। अब गोलीकांड और स्थानीय लोगों के आक्रोश का इस काम पर क्या असर पड़ेगा, यह आने वाला समय तय करेगा।

पांचवीं बार शुरू हुई खुदाई

गौरतलब है कि बलिराजगढ़ में वर्ष 1962-62 और 1972-73 के बाद नीतीश कुमार के कार्यकाल में 2012-13, 2013-14 और 2026 में खुदाई शुरू हुई।

इस तरह अब तक यहां पांच बार उत्खनन का काम शुरू किया जा चुका है। मिथिला की सभ्यता और संस्कृति के संपूर्ण इतिहास का पता लगाने के लिए यहां लगातार 10 वर्षों तक खुदाई कराने का प्रस्ताव है।

दिसंबर के बाद फिर उत्खनन

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआइ) के अपर महानिदेशक डॉ. संजय कुमार मंजुल ने जागरण को फोन पर बताया कि घटना की समीक्षा की जाएगी, लेकिन इससे उत्खनन का काम प्रभावित नहीं होगा।

दिसंबर के बाद बलिराजगढ़ में फिर से खुदाई शुरू होगी। उन्होंने बताया कि त्योहारों के बाद खुदाई शुरू करने की योजना पहले से निर्धारित थी और जरूरत के अनुसार उत्खनन की समय सीमा बढ़ाई जाती है।

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