विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

Well done सच‍िन! 10 साल साइकिल की दुकान पर बनाता रहा पंक्चर, अब Indian Railway में ट्रेन दौड़ाएगा मुंगेर का लाल

Published: Tue, 27 Oct 2026 05:59 AM (IST)Updated: Tue, 27 Oct 2026 02:10 PM (IST)

Munger Sachin Kumar ALP Success Story: मुंगेर के सचिन कुमार ने पिता की बीमारी के बाद 10 साल तक साइकिल ...और पढ़ें

Munger Sachin Kumar ALP Success Story: साइकिल की मरम्मत करते सचिन का रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर चयन।

Munger Sachin Kumar ALP Success Story: साइकिल की मरम्मत करते सचिन का रेलवे में असिस्टेंट लोको पायलट के पद पर चयन।

HighLights

  1. पिता की बीमारी के बाद संभाली परिवार की जिम्मेदारी।

  2. 10 साल तक साइकिल मरम्मत की दुकान चलाई।

  3. कड़ी मेहनत से रेलवे में सहायक लोको पायलट बने।

शशिकांत, धरहरा (मुंगेर)। Munger Sachin Kumar ALP Success Story: जिस कच्ची उम्र में नौजवान अपनी आकांक्षाओं को पंख देने के लिए पारिवारिक संबल तलाशते हैं, उसी दौर में मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड स्थित कुमारपुर के सचिन कुमार के कंधों पर पूरे कुनबे की जिम्मेदारी आ गई थी। पिता का स्वास्थ्य बिगड़ने से उपजे आर्थिक संकट के बीच उन्होंने हालातों से हार नहीं मानी, बल्कि साइकिल मरम्मत की छोटी सी दुकान चलाकर परिवार की नैया पार लगाई।

लगभग एक दशक तक टायर-ट्यूब में हवा भरते और पंचर बनाते हुए भी उनके भीतर भारतीय रेल में नौकरी का ख्वाब लगातार पलता रहा। दुकानदारी के बीच बचे वक्त में की गई अथक साधना रंग लाई और 25 वर्षीय सचिन का चयन रेलवे में सहायक लोको पायलट (एएलपी) पद पर हो गया। भुवनेश्वर रेल मंडल में पदस्थापित होकर वे अब ट्रेनों का परिचालन करेंगे।

sachin kumar 1

सफलता का सफर: एक नजर में

  • नाम: सचिन कुमार (उम्र: 25 वर्ष)।

  • निवासी: ग्राम कुमारपुर, प्रखंड धरहरा (मुंगेर जिला, बिहार)।

  • पद: असिस्टेंट लोको पायलट (ALP), भारतीय रेलवे।

  • पदस्थापन: भुवनेश्वर रेलवे जोन।

  • प्रारंभिक शिक्षा: डीपी यादव उच्च विद्यालय, घटवारी (मुंगेर)।

  • संघर्ष: 10 वर्षों तक साइकिल मरम्मत व पंचर की दुकान संभालते हुए पढ़ाई की।

Munger Sachin Kumar From Bicycle Shop to Railway ALP Success

पिता की अस्वस्थता बनी प्रेरणा

सचिन के पिता पहले दैनिक मजदूरी कर घर का खर्च उठाते थे, लेकिन गंभीर बीमारी के चलते उनका काम करना बंद हो गया। ऐसे में सचिन ने पढ़ाई और आजीविका दोनों का मोर्चा खुद संभाला। घटवारी स्थित डीपी यादव उच्च विद्यालय से प्रारंभिक शिक्षा पूरी करने के बाद मुफलिसी के कारण बड़े शहरों में जाकर प्रतियोगी कोचिंग लेना मुमकिन नहीं था। 

संघर्ष से बदली तकदीर

उन्होंने अपनी इस विवशता को कमजोरी नहीं बनने दिया और गांव में रहकर ही ऑनलाइन कक्षाओं व किताबों के सहारे भर्ती परीक्षा की तैयारी जारी रखी। दुकान पर ग्राहकों के इंतजार और काम के बीच समय चुराकर पढ़ना उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गया था। सीमित साधनों के बावजूद पक्के इरादों से हासिल सचिन की यह सफलता उन तमाम युवाओं के लिए नजीर है, जो परेशानियों के आगे घुटने टेक देते हैं

यह भी पढ़ें- मुंगेर की उर्मी ने 21 साल में रचा इतिहास, पहले ही प्रयास में UPSC क्रैक कर बनीं IPS अधिकारी

देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।