मुंगेर की असरगंज नगर पंचायत में GIS मैपिंग से बनेगा डिजिटल डेटाबेस, हर संपत्ति को मिलेगा यूनिक कोड
असरगंज नगर पंचायत में जीआईएस आधारित मैपिंग और संपत्ति सर्वेक्षण शुरू हो गया है। इसका उद्देश्य प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना, कर निर्धा ...और पढ़ें

असरगंज नगर पंचायत में GIS मैपिंग से बनेगा डिजिटल डेटाबेस
HighLights
असरगंज नगर पंचायत में जीआईएस आधारित संपत्ति सर्वेक्षण शुरू।
प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर पारदर्शिता बढ़ेगी।
शहरी नियोजन और बुनियादी सुविधाओं की बेहतर योजना बनेगी।
संवाद सहयोगी, असरगंज (मुंगेर)। असरगंज नगर पंचायत क्षेत्र को आधुनिक, सुव्यवस्थित और पारदर्शी प्रशासन की दिशा में ले जाने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है। नगर पंचायत में जीआईएस (जियोग्राफिकल इंफॉर्मेशन सिस्टम) आधारित मैपिंग और प्रापर्टी सर्वे का कार्य आरंभ हो गया है।
इस सर्वे के तहत नगर क्षेत्र की प्रत्येक संपत्ति का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा, जिससे एक सटीक और अद्यतन डेटाबेस उपलब्ध हो सकेगा।
फिलहाल, इस महत्वाकांक्षी योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में वार्ड संख्या एक से शुरू किया गया है। सर्वे की सफलता के बाद इसे चरणबद्ध तरीके से पूरे नगर पंचायत क्षेत्र में लागू किया जाएगा।
जीआईएस मैपिंग के माध्यम से भवनों, खाली भूखंडों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों और सरकारी संपत्तियों की सही जानकारी एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध होगी।
कर निर्धारण और राजस्व संग्रह में होगी पारदर्शिता
नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी सूर्यानंद सिंह ने बताया कि जीआईएस आधारित मैपिंग से नगर क्षेत्र की सभी संपत्तियों का एकीकृत और सटीक डिजिटल डेटाबेस तैयार होगा। इससे कर निर्धारण की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनेगी और राजस्व संग्रह में भी आसानी होगी। करदाताओं को भी अपनी संपत्ति से जुड़ी जानकारी स्पष्ट रूप से उपलब्ध हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि इस तकनीक की मदद से सड़क, नाला, जलापूर्ति, सीवरेज और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सुविधाओं की बेहतर और विज्ञानी ढंग से योजना बनाई जा सकेगी। नगर नियोजन को ठोस आधार मिलेगा और विकास कार्यों की प्राथमिकता तय करने में भी सुविधा होगी। भविष्य में मास्टर प्लान और स्मार्ट सिटी जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन में भी यह सर्वे अहम भूमिका निभाएगा।
हर संपत्ति को मिलेगा यूनिक कोड
कार्यपालक पदाधिकारी ने बताया कि सर्वे पूरा होने के बाद नगर पंचायत क्षेत्र की प्रत्येक संपत्ति पर यूनिक कोड वाला नंबर प्लेट लगाया जाएगा। इसके लिए नागरिकों से किसी प्रकार का शुल्क नहीं लिया जाएगा। यह यूनिक नंबर संपत्ति की पहचान को सरल बनाएगा और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता व तेजी आएगी।