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    रात में खौफनाक सफर : भागलपुर से जमालपुर तक डेमू अनुभव, समय पर नहीं ट्रेनें, रोशनी तो है लेकिन सुरक्षा नहीं

    Updated: Mon, 18 May 2026 02:17 PM (IST)

    भागलपुर से जमालपुर तक की डेमू यात्रा में ट्रेनें देरी से चलीं और छोटे स्टेशनों पर सुरक्षा का अभाव दिखा। यात्रियों ने रात के सफर में असुरक्षा महसूस की, ...और पढ़ें

    रात में डेमू का अनुभव: ट्रेनें लेट, स्टेशन रोशन, यात्रियों की सुरक्षा सवालों में

    रात में डेमू का अनुभव: ट्रेनें लेट, स्टेशन रोशन, यात्रियों की सुरक्षा सवालों में

    HighLights

    1. भागलपुर-जमालपुर डेमू ट्रेन 42 मिनट देरी से चली।

    2. छोटे स्टेशनों पर रोशनी, पर सुरक्षाकर्मी नदारद।

    3. यात्रियों ने रात के सफर में असुरक्षा महसूस की।

    संवाद सूत्र, मुंगेर। शनिवार की रात, घड़ी की सुई 11 बजने को थी। भागलपुर-जमालपुर डेमू अपनी निर्धारित समय 10.40 बजे से काफी पीछे चल रही थी। सुल्तानगंज स्टेशन पर यात्रियों की बेचैनी साफ दिखाई दे रही थी। ट्रेन आखिरकार 11.22 बजे प्लेटफॉर्म पर पहुंची, यानी लगभग 42 मिनट की देरी। यात्रियों के चेहरे पर थकान और इंतजार दोनों झलक रहे थे। तीन मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन ने जमालपुर की ओर रफ्तार पकड़ ली। रात गहराने लगी और जागरण की टीम ने स्टेशन-दर-स्टेशन पड़ताल शुरू की। सवाल सिर्फ ट्रेन के लेट होने का नहीं था, बल्कि रात के सफर में यात्रियों की सुरक्षा का भी था।

    कमरगंज और गनगनिया: सन्नाटे में डेमू

    सुल्तानगंज से खुलने के बाद पहला हाल्ट कमरगंज और फिर गनगनिया था। रात का समय था और ट्रेन में बैठे यात्री नींदी आंखों से बाहर झांक रहे थे। भागलपुर जिला पार करते हुए डेमू धीरे-धीरे मुंगेर की सीमा में दाखिल हुई। खड़िया पीपरा स्टेशन पर ट्रेन कुछ क्षण के लिए रुकी। प्लेटफार्म लगभग खाली था। बिजली के पोल पर लाइटें जल रही थीं, जो सुरक्षा का एहसास कराती थीं, लेकिन कोई सुरक्षा गार्ड नहीं दिखा।

    घोरघट और कल्याणपुर: रोशनी है, सुरक्षा नहीं

    रात 11.36 बजे डेमू घोरघट स्टेशन पहुंची। प्लेटफार्म पर सन्नाटा पसरा हुआ था। कुछ पल बाद ट्रेन आगे बढ़ गई। 11.39 बजे कल्याणपुर स्टेशन आया। यहां थोड़ी चहल-पहल दिखी, कुछ यात्री उतरे और चढ़े। प्लेटफार्म पर रोशनी पर्याप्त थी, लेकिन सुरक्षा बल का कोई जवान नजर नहीं आया। यात्रियों को खुद अपनी सुरक्षा का भरोसा ढोना पड़ रहा था।

    बरियारपुर और ऋषिकुंड: हलचल और सूना हाल्ट

    11.48 बजे डेमू बरियारपुर स्टेशन पहुंची। यहां लगभग दस यात्री ट्रेन में सवार हुए। एक मिनट के ठहराव के बाद ट्रेन ने रफ्तार पकड़ी। रात 11.58 बजे ऋषिकुंड स्टेशन आया। यह स्टेशन पूरी तरह सूना था। न कोई यात्री चढ़ा, न उतरा। प्लेटफार्म की लाइटें जल रही थीं, लेकिन रेल पुलिस या सुरक्षा कर्मियों का कहीं अता-पता नहीं था। रात के सन्नाटे में यह स्टेशन वीरान लग रहा था।

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    रतनपुर और पाटम: रोशनी, फिर भी सुरक्षा की कमी

    रात 12.02 बजे ट्रेन रतनपुर स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या दो पर रुकी। यहां करीब बारह यात्री उतरे। रोशनी की व्यवस्था बेहतर थी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था नदारद रही। 12.05 बजे पाटम स्टेशन आया। ट्रेन लगातार रफ्तार में थी, लेकिन रेलवे सुरक्षा की रफ्तार कहीं पीछे छूटती दिखी। हर स्टेशन पर लाइट थी, पर सुरक्षा जवान नहीं।

    जमालपुर जंक्शन: आखिरकार सुरक्षा दिखी

    लगातार सफर और सूने प्लेटफार्म के बाद रात 12.18 बजे डेमू जमालपुर जंक्शन पहुंची। यहां प्लेटफॉर्म पर जवान तैनात थे और यात्रियों की हलचल भी बढ़ गई। हालांकि, सवाल यह है कि छोटे स्टेशनों और हाल्टों पर रात के समय सुरक्षा बल क्यों नहीं रहते। जब ट्रेनें देर रात चल रही हैं, यात्रियों का सफर हो रहा है, तब सुरक्षा केवल बड़े स्टेशनों तक क्यों सीमित रहती है।

    यात्रियों का अनुभव और असुरक्षा की भावना

    जागरण टीम से बातचीत में यात्रियों ने बताया कि रात में छोटे स्टेशनों पर उतरना खतरनाक लगता है। रोशनी होने के बावजूद यात्रियों को अपने आप को सुरक्षित रखने के लिए सतर्क रहना पड़ता है। किसी भी अनहोनी की स्थिति में मदद तुरंत नहीं मिल पाती। इसने रात के सफर की असली चुनौती को उजागर किया।

    रेलवे प्रशासन की जिम्मेदारी

    रेलवे प्रशासन को रात में चलने वाली ट्रेनों की सुरक्षा व्यवस्था पर ध्यान देने की जरूरत है। छोटे स्टेशन और हाल्ट पर कम से कम एक सुरक्षा गार्ड तैनात किया जाना चाहिए। प्लेटफार्म रोशन करना जरूरी है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा प्राथमिकता होनी चाहिए।

    सुरक्षा और सुविधा में संतुलन

    यात्रियों की सुविधा और सुरक्षा में संतुलन जरूरी है। देर रात सफर करने वालों को यह भरोसा होना चाहिए कि रेलवे प्रशासन हर हाल में उनकी सुरक्षा का ध्यान रखेगा। यात्रियों ने सुझाव दिया कि रेलवे प्रशासन को रात में विशेष सुरक्षा टीम तैनात करनी चाहिए।

    सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत 

    भागलपुर से जमालपुर तक का यह रात का सफर केवल एक ट्रेन यात्रा नहीं था, बल्कि रेलवे की रात की सुरक्षा व्यवस्था की हकीकत भी बयां करता है। छोटे स्टेशनों पर सुरक्षा का अभाव, यात्रियों में असुरक्षा की भावना और लेट होने वाली ट्रेनें रेलवे की बड़ी चुनौती बनती जा रही हैं। यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रेलवे की प्राथमिक जिम्मेदारी है। रोशनी और प्लेटफार्म की सुविधा पर्याप्त नहीं है। छोटे स्टेशनों और हाल्टों पर तैनात सुरक्षा कर्मी ही यात्रियों को भरोसा दिला सकते हैं।