CM सम्राट चौधरी का गृह जिला उड़ान योजना से बाहर, टूटा आम लोगों के हवाई सफर का सपना
मुंगेर का हवाई सफर का सपना टूट गया है क्योंकि सफियाबाद हवाई अड्डा रनवे विस्तार के लिए पर्याप्त जमीन न ...और पढ़ें

सम्राट चौधरी के जिले में नहीं उड़ेगा यात्री विमान। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
रजनीश, मुंगेर। मुंगेरवासियों का वर्षों पुराना हवाई सफर का सपना अब टूटता नजर आ रहा है। सफियाबाद हवाई अड्डे से विमान सेवा शुरू होने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है। रनवे विस्तार के लिए पर्याप्त जमीन नहीं मिलने के कारण मुंगेर अब केंद्र सरकार की उड़ान योजना से बाहर हो गया है।
ऐसे में यहां नियमित विमान सेवा शुरू होने की संभावना लगभग समाप्त मानी जा रही है। सफियाबाद स्थित हवाई अड्डे को लेकर लंबे समय से लोगों में उम्मीद थी कि जल्द ही यहां छोटे विमानों की आवाजाही शुरू होगी और मुंगेर सीधे पटना, कोलकाता या दिल्ली जैसे शहरों से जुड़ सकेगा, लेकिन ताजा तकनीकी रिपोर्ट ने इन उम्मीदों पर विराम लगा दिया है।
दरअसल, वर्तमान रनवे करीब 758 मीटर लंबा और 25 मीटर चौड़ा है। जबकि 19 सीट वाले छोटे विमान के सुरक्षित टेकऑफ और लैंडिंग के लिए कम से कम 1250 से 1400 मीटर लंबा तथा लगभग 70 मीटर चौड़ा रनवे जरूरी माना जाता है।
एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की जांच टीम ने निरीक्षण के बाद अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। रिपोर्ट में स्पष्ट कहा गया है कि मौजूदा स्थिति में यहां विमान संचालन संभव नहीं है। हवाई सेवा शुरू करने में सबसे बड़ी बाधा रनवे विस्तार के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर सामने आई है।
एयरपोर्ट के आसपास अब घनी रिहायशी आबादी है। जमीन की कीमत भी काफी अधिक हो चुकी है। ऐसे में बड़े पैमाने पर भूमि अधिग्रहण प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।रिहायशी इलाका तेजी से विकसित हो चुका है।
ऐसे में विस्थापन, मुआवजा और अधिग्रहण की प्रक्रिया काफी जटिल मानी जा रही है। यही कारण है कि अब सरकार भी इस परियोजना को लेकर पीछे हटती नजर आ रही है। फिलहाल यहां सिर्फ हेलीकाप्टर उतरेगा।
दो वर्षों तक बजट में होता रहा प्राविधान
राज्य सरकार ने लगातार दो वर्षों तक मुंगेर एयरपोर्ट को लेकर बजट में प्राविधान किया था। वर्ष 2025-26 के राज्य बजट में मुंगेर सहित कई शहरों में एयरपोर्ट विकास की घोषणा की गई थी।
योजना के तहत भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रनवे विस्तार, टर्मिनल सुविधा, सुरक्षा मानकों और अन्य आधारभूत संरचनाओं के विकास की बात कही गई थी।
यहां से 19 सीट वाले विमान संचालन की तैयारी भी शुरू कर दी गई थी। इतना ही नहीं, मुंगेर हवाई अड्डे के व्यावहार्यता अध्ययन के लिए 2.43 करोड़ रुपये का प्राविधान भी किया गया था। लेकिन अब ताजा रिपोर्ट आने के बाद इस योजना पर लगभग ब्रेक लग गया है।
2025 में AAI टीम ने किया था सर्वे
सितंबर 2025 में एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) की तीन सदस्यीय टीम ओएलएस यानी बाधा परिसीमन सतह सर्वे के लिए सफियाबाद हवाई अड्डे पहुंची थी। एएआइ के जीआइएस सीनियर एनालिस्ट योगेंद्र कुमार के नेतृत्व में एनालिस्ट प्रवीण कुमार और निजकूल ने एयरपोर्ट का तकनीकी सर्वेक्षण किया था।
टीम ने रनवे की लंबाई, चौड़ाई, आसपास की बाधाओं और विस्तार की संभावनाओं का आकलन किया था। तब टीम ने स्पष्ट कहा था कि मौजूदा रनवे के साथ यहां विमान संचालन संभव नहीं है। रनवे का विस्तार अनिवार्य होगा।
सिर्फ उतरेगा उड़न खटोला
पिछले दिनों मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में राज्य के सभी एयरपोर्ट की स्थिति को लेकर समीक्षा की गई थी। इसमें पाया गया कि मधुबनी और मुंगेर में एयरपोर्ट के लिए अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की कीमत बहुत अधिक है।
साथ ही, यह रिहायशी इलाके में है। इन जिलों रिपोर्ट के बाद मुख्यमंत्री ने दोनों एयरपोर्ट को उड़ान योजना से हटाने के लिए भारत सरकार से पत्राचार का निर्देश दिया था। हालांकि, इसे हेलीकाप्टर संचालन के अनुरूप विकसित कर रखरखाव व उपयोग को सुनिश्चित करने को कहा गया है।
सफियासराय स्थित हवाई अड्डा के रनवे विस्तार के लिए भूमि अधिग्रहण को लेकर प्रस्ताव भेजा गया है। सरकार स्तर से स्वीकृति प्राप्त होने तथा राशि आवंटित होने के बाद इस पर काम किया जाएगा। वर्तमान में रनवे की मरम्मत और लाउंज आदि का विकास किया जाना है। -निखिल धनराज निप्पाणीकर, डीएम
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