266 की बोरी खजुरिया में 320 तो बंगालवा में 360 रुपये! मुंगेर में खाद पर मनमानी वसूली; DAO बोलीं- होगी कड़ी कार्रवाई
Munger Fertilizer Black Marketing: मुंगेर के धरहरा प्रखंड में किसानों को 266 रुपये की खाद 320-360 रुपये में बेची जा ...और पढ़ें

Munger Fertilizer Black Marketing: धरहरा में 266 रुपये की खाद बोरी 360 में बेचने का आरोप, खजुरिया-बंगालवा कृषि केंद्रों पर उठे सवाल
HighLights
मुंगेर में 266 रुपये की खाद 320-360 रुपये में बिक रही।
किसान विरोध करने पर खाद न मिलने से डरते।
डीएओ ने कालाबाजारी पर सख्त कार्रवाई का आश्वासन दिया।
संवाद सहयोगी, धरहरा (मुंगेर)। Munger Fertilizer Black Marketing: खेतों में लहलहाती फसल की उम्मीद संजोए किसान इन दिनों खाद पाने के लिए बाजार और कृषि केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन अन्नदाताओं की इस लाचारी के बीच धरहरा प्रखंड में निर्धारित सरकारी दर से अधिक कीमत वसूली के गंभीर आरोपों ने कृषि विभाग के निगरानी तंत्र पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। धरहरा प्रखंड में सरकारी स्तर पर 266 रुपये निर्धारित कीमत वाली खाद की बोरी कहीं 320 रुपये तो कहीं 360 रुपये में बेची जा रही है।
किसानों के अनुसार, राजकीय कृषि केंद्र खजुरिया में तय दर से 54 रुपये अधिक और बंगालवा में सीधे 94 रुपये तक की अतिरिक्त वसूली की जा रही है। यह मामला सिर्फ अतिरिक्त 54 या 94 रुपये का नहीं, बल्कि उस पूरी व्यवस्था की विफलता का है जिसकी जिम्मेदारी किसानों को उचित और नियंत्रित मूल्य पर समय से खाद उपलब्ध कराने की है।
विरोध करने पर खाद न मिलने का डर, मजबूरी में अतिरिक्त भुगतान
खेती-किसानी के इस सबसे नाजुक दौर में खाद अन्नदाताओं की बुनियादी आवश्यकता बन चुकी है। पीड़ित किसानों का कहना है कि यदि वे अधिक कीमत का विरोध करते हैं, तो उन्हें खाद नहीं मिलने की धमकी दी जाती है। फसल सूखने के डर से वे मुंहमांगी रकम चुकाने को विवश हैं।
मुंगेर जिले के धरहरा प्रखंड में निर्धारित 266 रुपये की यूरिया/खाद बोरी पर 54 से 94 रुपये तक अतिरिक्त वसूली का गंभीर आरोप
राजकीय कृषि केंद्र खजुरिया में 320 और बंगालवा में 360 रुपये प्रति बोरी वसूलने पर फूटा किसानों का गुस्सा
विरोध करने पर खाद न मिलने का डर, फसल बचाने के लिए मजबूरी में अधिक दाम चुका रहे अन्नदाता
जिला कृषि पदाधिकारी (डीएओ) सुष्मिता ने लिया संज्ञान; कहा- शिकायत सही मिलने पर विक्रेता पर होगी सख्त कार्रवाई
डीजल, उन्नत बीज, महंगी मजदूरी और पटवन की बढ़ती लागत से पहले ही खेती का बजट चरमरा चुका है। ऐसे में खाद के नाम पर हो रही यह खुली लूट किसानों की आर्थिक कमर तोड़ रही है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि सरकार ने दर 266 रुपये तय कर रखी है, तो केंद्रों पर 320 से 360 रुपये के रेट कैसे चल रहे हैं? क्या बिक्री केंद्रों की नियमित औचक जांच नहीं होती या फिर विभागीय अधिकारी आंखें मूंदे बैठे हैं?
पीड़ित किसानों का फूटा दर्द
केस 1: जातकुटिया निवासी किसान मंगल यादव ने बताया कि जब वे केंद्र पर खाद की बोरी खरीदने पहुंचे, तो उनसे 266 के बजाय सीधे 320 रुपये मांगे गए। खेती के लिए खाद जरूरी थी, इसलिए मजबूरी में अधिक रुपये देने पड़े। उनका कहना है कि जब सरकार ने दाम तय कर रखे हैं, तो खुलेआम अतिरिक्त राशि वसूलने वालों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
केस 2: भिखाकिता निवासी पवन मेहता का कहना है कि निर्धारित दर वाली खाद अधिक दामों में बेचे जाने से किसानों की मुश्किलें दिन-ब-दिन बढ़ रही हैं। खेती की लागत पहले से ही आसमान छू रही है, ऊपर से यह कालाबाजारी किसानों पर दोहरी मार है। कृषि विभाग को अविलंब दुकानों पर छापेमारी कर सरकारी दर पर बिक्री सुनिश्चित करानी चाहिए।
स्थानीय किसानों ने खजुरिया और बंगालवा सहित प्रखंड के सभी निजी व सरकारी खाद बिक्री केंद्रों की सघन जांच कराने और कालाबाजारी में संलिप्त दुकानदारों के लाइसेंस रद्द करने की मांग की है।
"266 रुपये निर्धारित दर वाली खाद को 320 या 360 रुपये में बेचना पूरी तरह अवैध और अनुचित है। यदि किसी भी केंद्र पर किसानों से निर्धारित दर से अधिक राशि वसूली जा रही है, तो उसकी तुरंत जांच कराई जाएगी। जांच में शिकायत सही पाए जाने पर संबंधित विक्रेता या संचालक के विरुद्ध सख्त विधिक कार्रवाई होगी।"
