मोकामा-मुंगेर फोरलेन: जमीन अधिग्रहण के बाद अब मुआवजे पर 'ब्रेक', सैकड़ों आवेदन फांक रहे धूल
मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना से प्रभावित किसान मुआवजा और भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र (एलपीसी) के लिए परेशान हैं।

जमीन अधिग्रहण के बाद अब मुआवजे पर 'ब्रेक', सैकड़ों आवेदन फांक रहे धूल
HighLights
किसानों को मुआवजा और एलपीसी प्राप्त करने में परेशानी।
राजस्व कर्मियों की कमी से हजारों एलपीसी आवेदन लंबित।
भूमि अधिग्रहण, निबंधन और बैंक ऋण कार्य प्रभावित।
जागरण संवाददाता, मुंगेर। मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना से प्रभावित किसानों की परेशानी लगातार बढ़ती जा रही है। जमालपुर और धरहरा अंचल के कई मौजा से होकर गुजर रहे फोरलेन एलाइनमेंट के कारण बड़ी संख्या में किसानों को मुआवजा प्राप्त करने और अन्य राजस्व प्रक्रियाओं के लिए भूमि स्वामित्व प्रमाण पत्र (एलपीसी) की जरूरत है, लेकिन राजस्व कर्मचारियों की कमी के कारण दोनों अंचलों में काफी संख्या में एलपीसी आवेदन लंबित हैं, जिससे किसान कार्यालयों का चक्कर लगाने को मजबूर हैं।
10 राजस्व ग्राम की जमीन का होना है अधिग्रहण
जिला भू-अर्जन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार मोकामा-मुंगेर ग्रीनफील्ड फोरलेन परियोजना के लिए 316.28 एकड़ भूमि अधिग्रहण के दायरे में है, जो 10 राजस्व ग्रामों में फैली हुई है। बताया जाता है कि रैयतवार नामांकन का कार्य प्रगति पर है तथा मुआवजा भुगतान के लिए लगभग 600 रैयतों को नोटिस जारी किया जा चुका है।
अब तक करीब 70 लाख रुपये की भूमि राशि पोर्टल पर अपलोड की गई है। इसके साथ ही संपूर्ण भूमि के लिए 478.597 करोड़ रुपये के थ्री-जी प्राक्कलन को स्वीकृति मिल चुकी है। भवन-संरचना, कुआं-बोरिंग, समरसेबल और पेड़ों के मुआवजे का प्राक्कलन भी संबंधित एजेंसी को भेजा जा चुका है।
भूमापी, निबंधन आदि कार्य भी प्रभावित
जमालपुर अंचल में 10 पंचायत, 13 हल्का और 124 राजस्व ग्राम हैं। यहां एक हजार से अधिक एलपीसी आवेदन तथा 300 से अधिक दाखिल-खारिज के मामले लंबित हैं। वहीं, धरहरा अंचल में भी करीब चार सौ एलपीसी आवेदन लंबित बताए जा रहे हैं।
भूमि मापी, निबंधन और बैंक ऋण से जुड़े कार्य भी प्रभावित हैं। हालिया स्थानांतरण के बाद कई नए राजस्व कर्मियों ने योगदान नहीं दिया है, जबकि कुछ पुराने कर्मियों को कार्यमुक्त नहीं किया गया है।
इससे हल्का का पुनर्वितरण नहीं हो सका और राजस्व व्यवस्था प्रभावित हो गई है। अमीनों की कमी के कारण भूमि मापी भी समय पर नहीं हो पा रही है, जिससे किसानों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
राज्य स्तर पर हुए स्थानांतरण के बाद अन्य जिलों से कर्मचारी योगदान दे रहे हैं। जिन कर्मियों ने योगदान दे दिया है, उनका पदस्थापन कर दिया गया है। उन्होंने उम्मीद जताई कि तीन-चार दिनों में राजस्व व्यवस्था सामान्य हो जाएगी। - मनोज कुमार, एडीएम
देश और दुनिया की ताजा खबरों के लिए Hindi News देखें। Live Cricket Score , IPO Listings, Shiv Chalisa, राशिफल और दुर्गा चालीसा पर अन्य जानकारी पाएं।