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    मुंगेर नगर निगम का एक और कारनामा, 1.10 करोड़ बकाया वाले का बदल दिया होल्डिंग नाम

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 09:43 PM (IST)

    मुंगेर नगर निगम में 1.10 करोड़ रुपये के बकाया होल्डिंग टैक्स मामले में नाम बदलने और ऑफलाइन रसीद जारी करने का बड़ा घोटाला सामने आया है। नगर आयुक्त ने ह ...और पढ़ें

    1.10 करोड़ बकाया वाले का बदल दिया होल्डिंग नाम (AI Generated Image)

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    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

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    संवाद सूत्र, मुंगेर। मुंगेर नगर निगम में अभी कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। निगम में टैक्स वसूली और होल्डिंग रिकॉर्ड को लेकर सामने आ रहे मामलों की कड़ी अब एजेंसी से आगे बढ़कर निगम की पुरानी कार्यप्रणाली तक पहुंच गई है। ताजा मामला वार्ड संख्या-23 स्थित शाह जुबेर रोड की होल्डिंग संख्या 814 का है।

    जहां नगर निगम के रजिस्टर में नाम परिवर्तन और ऑफलाइन रसीद जारी होने को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस खुलासे के बाद निगम कार्यालय में दिनभर ऊहापोह की स्थिति बनी रही। पुराने अभिलेखों को खंगालने का सिलसिला शुरू हो गया।

    निगम की ओर से आठ जुलाई 2026 को आरटीआई आवेदक नफीसुर रहमान को दिए गए जवाब में स्पष्ट किया गया है कि उक्त होल्डिंग पूर्व से वसी अहमद के नाम दर्ज रही है और उसी नाम से नगर निगम में कर निर्धारण होता रहा है।

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    निगम के रिकॉर्ड के अनुसार, इस भवन पर वर्ष 1990 से टैक्स बकाया है और वर्तमान में इसकी बकाया राशि करीब 1.10 करोड़ रुपये पहुंच चुकी है, लेकिन जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि निगम के पंजी रजिस्टर में वसी अहमद का नाम काटकर उसी होल्डिंग पर चंद्र मोहन प्रसाद सिंह मुंगेर कोल्ड स्टोरेज के नाम से प्रविष्टि कर दी गई थी।

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    बताया जाता है कि इसकी जानकारी मिलने पर नगर आयुक्त पार्थ गुप्ता ने तत्काल हस्तक्षेप करते हुए रजिस्टर में दोबारा वसी अहमद का नाम दर्ज कराने का निर्देश दिया।

    आठ वर्ष पहले कटी रसीद में नाम में हेरफेर

    मामला यहीं नहीं रुका, जांच के दौरान वर्ष 2014 से 2017 तक की एक ऑफलाइन टैक्स रसीद भी सामने आई जो चंद्र मोहन प्रसाद सिंह के नाम से काटी गई थी। हैरानी की बात यह है कि करोड़ों रुपये बकाया वाली होल्डिंग के लिए जारी इस रसीद की राशि मात्र 1152 रुपये है।

    इसके बाद निगम कर्मियों ने संबंधित रसीद संख्या 38183 की पड़ताल शुरू की। जांच में पता चला कि यह रसीद उस समय के एक तहसीलदार के नाम निर्गत रसीद पुस्तिका से काटी गई थी जिनका वर्ष 2021 में ही निधन हो चुका है।

    अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब उस समय टैक्स वसूली का काम किसी निजी एजेंसी के पास नहीं था तब आखिर रजिस्टर में नाम किसके निर्देश पर बदला गया और ऑफलाइन रसीद किस आधार पर जारी की गई।

    निगम सूत्रों का कहना है कि होल्डिंग पंजी रजिस्टर न तो निजी एजेंसी के पास रहता है और न ही तहसीलदार के पास यह रिकॉर्ड टैक्स दारोगा के पास सुरक्षित रहता है। उस वक्त जो टैक्स दरोगा के पास रसीद होगा।

    ऐसे में रजिस्टर में बदलाव और ऑफलाइन रसीद जारी होने की घटना ने निगम की पुरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। संभावना आशंका जताई जा रही है कि पुराने रिकॉर्ड की जांच में आगे भी कई नए तथ्य सामने आ सकते हैं।

    यह मामला वर्ष 2017-18 के दौरान मैनुअल काटी गई रसीद और रजिस्टर में हुई प्रविष्टि से जुड़ा है। नगर आयुक्त ने गलत तरीके से चढ़ाए गए नाम को हटवाकर रिकॉर्ड दुरुस्त करा दिया है। पूरे मामले की जांच के लिए पहले ही समिति गठित की जा चुकी है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसे किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। - कुमकुम देवी, महापौर