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    भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाएं केतकी के फूल?, शिव महापुराण कथा के दौरान कृष्णा किशोरी ने उठाया इस रहस्य से पर्दा

    Updated: Wed, 14 Jan 2026 05:59 AM (IST)

    मुंगेर के जमालपुर में महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिन कृष्णा किशोरी ने बताया कि भगवान शिव को केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता। उन्होंने ब्रह्मा और विष ...और पढ़ें

    मुंगेर के जमालपुर रामपुर रेलवे मैदान में आयोजित महाशिवपुराण कथा सुनातीं कृष्णा किशोरी।

    मुंगेर के जमालपुर रामपुर रेलवे मैदान में आयोजित महाशिवपुराण कथा सुनातीं कृष्णा किशोरी।

    HighLights

    1. केतकी फूल शिव पूजा में वर्जित होने का कारण बताया गया।

    2. ब्रह्मा-विष्णु विवाद में केतकी के झूठ का खुलासा हुआ।

    3. ईश्वर को केवल सत्य और निश्छल प्रेम ही स्वीकार्य है।

    संवाद सूत्र, जमालपुर (मुंगेर)। मुंगेर के जमालपुर रामपुर रेलवे मैदान में आयोजित महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिन कथा वाचिका कृष्णा किशोरी ने भगवान शिव को केतकी का फूल चढ़ाने पर क्यों प्रतिबंध है इस संबंध में श्रद्धालुओं की विस्तार से बताया। कहा केतकी पुष्प छल का प्रतीक है पर भगवान के लिए उपयोगी नहीं है। कथा का विस्तार करते हुए बताया कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु भगवान में श्रेष्ठ कौन है इसको लेकर विवाद हो गया। ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने संसार की रचना की इसलिए वह सबसे श्रेष्ठ है, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वह संसार के पालनहार हैं इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ है।

    रामपुर मैदान में शिव महापुराण का तीसरा दिन

    इसी दौरान वहां एक शिवलिंग उपस्थित हुआ। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान से कहा कि जो शिवलिंग का छोर सबसे पहले ढूंढ लेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। जिसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान शिवलिंग का छोर ढूंढ़ने में लग गए। विष्णु भगवान ने कुछ समय प्रयास किया जब उन्हें शिवलिंग का छोर नहीं मिला तो वह रुक गए। ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से कहा कि वह उनका साक्षी बन जाए और कह दे कि उन्होंने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया है। इसके बदले वह उसमें सुगंध भर देंगे। इस पर केतकी पुष्प राजी हो गई।

    केतकी पुष्प छल का प्रतीक, नहीं है शिव के प्रिय

    भगवान शिव प्रकट हुए और ब्रह्मा जी से पूछा तो ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया है। केतकी का फूल साक्षी है। केतकी के फूल ने झूठ बोला कि ब्रह्मा जी ने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया। जिसके बाद क्रोधित होकर शिव ने केतकी को पूजा से वर्जित का श्राप दिया कि केतकी फूल असत्य का पक्षधर हैं। कथा वाचिका ने कहा, यह कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति में छल कपट और झूठ का कोई स्थान नहीं है । ईश्वर को केवल सत्य और निश्छल प्रेम ही पसंद है।

    शिव की कृपा बिना नहीं बढ़ सकते एक कदम 

    कृष्णा किशोरी ने शिव महापुराण कथा के महत्व पर श्रद्धालुओं को बताया कि शिवमहापुराण सबसे महत्वपूर्ण पुराण है। इसमें भगवान शिव की महिमा और उनके विभिन्न अवतारों का वर्णन है। पुराण में भगवान शिव के जीवन, उनकी लिकिताओं और उनके भक्तों की कथाओं का संग्रह है। लौहनगरी के नाम से प्रसिद्ध जमालपुर पर प्रभू की महान अनुकंपा है, जो यहां श्रीमद्भागवत कथा आयोजन समिति द्वारा पिछले 10 वर्षों से आयोजित किया जा रहा है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं का कथा सुनने पहुंचना भी भगवान शिव की असीम कृपा का है।
     

    भगवान शिव की करुणा और कृपा संपूर्ण विश्व में व्याप्त है

    भगवान शिव की करुणा और कृपा संपूर्ण विश्व में व्याप्त है। जब तक शिव की कृपा नहीं होती, जीवन में एक कदम भी आगे नहीं बढ़ा सकते। व्याख्यान करते हुए कहा कि इसमें 24 हजार श्लोक हैं। उनमें से एक श्लोक ही नहीं, बल्कि एक शब्द मात्र को भी जीवन में धारण करने से यह मानव शरीर सिद्ध हो जाता है। कहा, हमें मनुष्य का शरीर तो मील गया, लेकिन हमने इसके महत्व को नहीं समझा तो सब बेकार है। मानव देह का महत्व भगवान की भक्ति में है। इसलिए, हम सभी को अपने जीवन में भगवान की भक्ति को महत्व देना चाहिए। महत्व को नहीं समझा तो सब बेकार है। मानव देह का महत्व भगवान की भक्ति में ही है

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