भगवान शिव को क्यों नहीं चढ़ाएं केतकी के फूल?, शिव महापुराण कथा के दौरान कृष्णा किशोरी ने उठाया इस रहस्य से पर्दा
मुंगेर के जमालपुर में महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिन कृष्णा किशोरी ने बताया कि भगवान शिव को केतकी का फूल क्यों नहीं चढ़ाया जाता। उन्होंने ब्रह्मा और विष ...और पढ़ें

मुंगेर के जमालपुर रामपुर रेलवे मैदान में आयोजित महाशिवपुराण कथा सुनातीं कृष्णा किशोरी।
HighLights
केतकी फूल शिव पूजा में वर्जित होने का कारण बताया गया।
ब्रह्मा-विष्णु विवाद में केतकी के झूठ का खुलासा हुआ।
ईश्वर को केवल सत्य और निश्छल प्रेम ही स्वीकार्य है।
संवाद सूत्र, जमालपुर (मुंगेर)। मुंगेर के जमालपुर रामपुर रेलवे मैदान में आयोजित महाशिवपुराण कथा के तीसरे दिन कथा वाचिका कृष्णा किशोरी ने भगवान शिव को केतकी का फूल चढ़ाने पर क्यों प्रतिबंध है इस संबंध में श्रद्धालुओं की विस्तार से बताया। कहा केतकी पुष्प छल का प्रतीक है पर भगवान के लिए उपयोगी नहीं है। कथा का विस्तार करते हुए बताया कि एक बार ब्रह्मा और विष्णु भगवान में श्रेष्ठ कौन है इसको लेकर विवाद हो गया। ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने संसार की रचना की इसलिए वह सबसे श्रेष्ठ है, जबकि भगवान विष्णु ने कहा कि वह संसार के पालनहार हैं इसलिए वे सबसे श्रेष्ठ है।
रामपुर मैदान में शिव महापुराण का तीसरा दिन
इसी दौरान वहां एक शिवलिंग उपस्थित हुआ। भगवान शिव ने ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान से कहा कि जो शिवलिंग का छोर सबसे पहले ढूंढ लेगा वह सर्वश्रेष्ठ होगा। जिसके बाद ब्रह्मा जी और विष्णु भगवान शिवलिंग का छोर ढूंढ़ने में लग गए। विष्णु भगवान ने कुछ समय प्रयास किया जब उन्हें शिवलिंग का छोर नहीं मिला तो वह रुक गए। ब्रह्मा जी ने केतकी के फूल से कहा कि वह उनका साक्षी बन जाए और कह दे कि उन्होंने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया है। इसके बदले वह उसमें सुगंध भर देंगे। इस पर केतकी पुष्प राजी हो गई।
केतकी पुष्प छल का प्रतीक, नहीं है शिव के प्रिय
भगवान शिव प्रकट हुए और ब्रह्मा जी से पूछा तो ब्रह्मा जी ने कहा कि उन्होंने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया है। केतकी का फूल साक्षी है। केतकी के फूल ने झूठ बोला कि ब्रह्मा जी ने शिवलिंग का छोर ढूंढ लिया। जिसके बाद क्रोधित होकर शिव ने केतकी को पूजा से वर्जित का श्राप दिया कि केतकी फूल असत्य का पक्षधर हैं। कथा वाचिका ने कहा, यह कथा हमें सिखाती है कि ईश्वर की भक्ति में छल कपट और झूठ का कोई स्थान नहीं है । ईश्वर को केवल सत्य और निश्छल प्रेम ही पसंद है।