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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Feb 28, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Bihar Bhumi: भूमि सर्वे के बीच दाखिल-खारिज को लेकर सरकार का बड़ा फैसला, दे दी 25 मार्च की डेडलाइन

    Updated: Fri, 28 Feb 2025 03:25 PM (GMT+05:30)

    छोटी-छोटी गलतियों के कारण अस्वीकृत दाखिल-खारिज के मामलों में अब फिर से अंचलाधिकारी सुनवाई करेंगे। डीसीएलआर के यहां प्रथम अपील में आए ऐसे मामलों को पहल ...और पढ़ें

    भूमि सर्वे के बीच दाखिल-खारिज को लेकर सरकार का बड़ा फैसला
    भूमि सर्वे के बीच दाखिल-खारिज को लेकर सरकार का बड़ा फैसला

    HighLights

    1. छोटी भूल के कारण अस्वीकृत दाखिल-खारिज पर सीओ फिर करेंगे सुनवाई
    2. डीसीएलआर ऐसे आवेदन को पहली सुनवाई में ही सीओ के पास वापस करेंगे
    3. विभाग ने सभी समाहर्ता को जारी किए नई व्यवस्था के दिशा-निर्देश
    4. 25 मार्च तक ऐसे लंबित मामलों पर कार्रवाई करने के लिए कहा गया

    जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। लिपिकीय या गणितीय भूल, अपठनीय आवेदन समेत अन्य छोटी भूल के कारण अस्वीकृत दाखिल-खारिज (Bihar Land Mutation) के मामले में फिर से अंचलाधिकारी सुनवाई करेंगे। इसके बाद आवेदन के मेरिट के आधार पर आदेश जारी करेंगे। डीसीएलआर के यहां प्रथम अपील में आए ऐसे मामलों को पहली सुनवाई में ही अंचलाधिकारी को वापस कर दिया जाएगा।

    इस मामले में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने गुरुवार को निर्देश जारी किया है। विभाग के सचिव जय सिंह ने सभी समाहर्ता को जारी निर्देश में कहा है कि राज्य के विभिन्न अनुमंडलों में डीसीएलआर कोर्ट में दर्ज दाखिल-खारिज के मामलों की समीक्षा की गई। इसमें यह बात सामने आई कि बहुत से मामले मेरिट के आधार पर अस्वीकृत नहीं किए गए हैं।

    आवेदन क्यों होते हैं अस्वीकृत?

    अस्वीकृति के कारणों में आवश्यक दस्तोवज या साक्ष्य का संलग्न नहीं किया जाना, दस्तावेज का अपठनीय होना, गणितीय या लिपिकीय भूल होना, रैयत या भूमि का विवरण गलत भरा जाना आदि शामिल हैं। इन आधार पर अस्वीकृत आवेदनों को लेकर भी डीसीएलआर के अपील दायर करना पड़ता है। इससे डीसीएलआर कोर्ट में वादों का बोझ बढ़ता जा रहा है। ये मामले भी लंबे समय तक कोर्ट में लंबित रहते हैं।

    इसे देखते हुए उक्त छोटी-छोटी भूल के कारण अस्वीकृत आवेदनों को शीघ्रता से अंचलाधिकारी को सुनवाई के लिए वापस किया जाना बेहतर है।

    सचिव ने जारी निर्देश में कहा कि ऐसे मामले को डीसीएलआर पहली सुनवाई में ही अंचलाधिकारी को वापस कर दें। इससे वह मेरिट वाले मामलों की सुनवाई और बेहतर तरीके से कर सकेंगे। वाद वापस करने के बाद सीओ नए सिरे से मेरिट के आधार पर मामले की सुनवाई करेंगे।

    सचिव ने 25 मार्च तक ऐसे सभी मामलों पर कार्रवाई कराने का निर्देश सभी समाहर्ता को दिया है।

    ई-मापी के निष्पादन में शिथिलिता, हजारों आवेदन लंबित

    राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की ओर से ई-मापी की व्यवस्था शुरू की गई थी, लेकिन मुजफ्फरपुर, पटना समेत कई जिलों में इसके निष्पादन की स्थिति बहुत खराब है। इसपर मुख्य सचिव ने नाराजगी जताई है। उन्होंने सभी संबंधित जिलों के समाहर्ता को पत्र भेजकर इससे अवगत कराया है।

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    उन्होंने कहा है कि विशेष भूमि सर्वेक्षण में जिस प्रकार जमाबंदी और परिमार्जन महत्वपूर्ण है उसी तरह ई-मापी भी अहम प्रक्रिया है, लेकिन जिलों में ई-मापी के लिए आवेदन करने के बाद भी इसका निष्पादन अंचल स्तर से नहीं किया जा रहा है। यह चिंता का विषय है।

    उन्होंने कहा है कि ई-मापी के लिए जो भी आवेदन प्राप्त होते हैं और भुगतान कर दिया जाता है। निर्धारित समय के अंदर उसका निष्पादन कर रिपोर्ट अपलोड करना अनिवार्य है, जबकि अंचल स्तर पर हजारों की संख्या में आवेदनों को समयपार होने के बाद भी लंबित रखा गया है। इससे सरकार का जो उद्देश्य है, वह पूरा नहीं हो पा रहा है, इसलिए उन्होंने सभी समाहर्ताओं को अपने स्तर से साप्ताहिक समीक्षा करने को कहा है, ताकि ई-मापी का तेजी से निष्पादन हो सके।

    जिले में कांटी, कुढ़नी और मीनापुर अंचल में करीब एक हजार से अधिक आवेदनों को समयपार होने के बाद भी लंबित रखा गया है। जबकि इसका भुगतान भी किया जा चुका है। इसपर डीएम ने पिछले दिनों संबंधित राजस्व कर्मचारी और सीओ से स्पष्टीकरण भी पूछा है।

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