बिहार के 10 मिनट वाले 'अरबपति': खाते में आए 7.5 अरब रुपये, गिनते-गिनते हो गए शून्य
Human Interest Story: मुजफ्फरपुर के एक बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र के खाते में पेंशन निकालने के दौरान अचानक 7.5 अरब रुपये आ गए, जिससे हड़कंप मच गया। हालांक ...और पढ़ें

पेंशन की राशि निकालने के बाद दिख रहा बैलेंस और कामेश्वर मिश्र 'घुमक्कड़' की फाइल फोटो।
HighLights
मुजफ्फरपुर के बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र के खाते में आए 7.5 अरब।
पेंशन निकालने गए थे, तकनीकी खराबी से दिखे अरबों रुपये।
केवल 10 मिनट के लिए अरबपति बने, फिर राशि शून्य हुई।
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Viral News Bihar: कहते हैं कि जब ऊपरवाला देता है, तो छप्पर फाड़कर देता है, लेकिन मुजफ्फरपुर के सकरा प्रखंड के थतिया सीहो गांव निवासी कामेश्वर मिश्र 'घुमक्कड़' के साथ कुछ गजब हुआ।
कुदरत ने ऐसा खेल खेला कि वे सिर्फ 10 मिनट के लिए दुनिया के चुनिंदा रईसों की कतार में खड़े हो गए और फिर पलक झपकते ही जमीन पर आ गए।
पेंशन की मामूली रकम निकालने गए एक बुजुर्ग के खाते में अचानक अरबों रुपये आ गए, जिसे देखकर न सिर्फ उनकी बल्कि बैंक ग्राहक सेवा केंद्र (CSP) संचालक की भी आंखें फटी की फटी रह गईं।

1100 की पेंशन वाले के खाते में 7.5 अरब
बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र 'घुमक्कड़' अपने गांव के पास स्थित सीएसपी (CSP) केंद्र पर राज्य सरकार की ओर से मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा वृद्धावस्था पेंशन राशि निकालने पहुंचे थे।
सीएसपी संचालक ने उनके खाते से पेंशन के 1100 रुपये सफलतापूर्वक निकाल कर उनके हाथ में दे दिए। औपचारिकता के तौर पर जब उन्होंने अपने खाते का बचा हुआ बैलेंस (शेष राशि) चेक कराया, तो कंप्यूटर स्क्रीन पर जो नंबर चमका उसने सबके होश उड़ा दिए। उनके खाते में पूरे 7 अरब 59 करोड़ 69 लाख 51 हजार 951 रुपये यानी 7596951951.16 रुपये दिखाई दे रहे थे।
अंकों को गिनने में ही बीत गए 5 मिनट
खाते में अरबों रुपये का बैलेंस देखते ही सीएसपी केंद्र पर सन्नाटा पसर गया। संचालक और वहां खड़े अन्य लोग चकरा गए कि आखिर यह क्या माजरा है।
शुरुआती चार-पांच मिनट तो सिर्फ इस बात को सही-सही समझने और इकाई-दहाई गिनने में निकल गए कि स्क्रीन पर दिख रही रकम आखिर है कितनी। जब तसल्ली हो गई कि राशि वाकई 7.5 अरब रुपये है, तो केंद्र पर मौजूद हर शख्स की धड़कनें तेज हो गईं।

ख्वाबों का ताना-बाना और तकनीकी रुकावट
इन 10 मिनटों के जादुई सफर में स्वभाव से कवि कामेश्वर मिश्र के मन में भी उम्मीदों के नए पंख लग गए थे। वे भविष्य के बड़े-बड़े ख्वाब बुनने लगे थे कि अब इस अथाह संपत्ति से जीवन की सारी तंगहाली दूर हो जाएगी।
सीएसपी संचालक ने तुरंत इस राशि में से कुछ हिस्सा निकालने का प्रयास किया, लेकिन किसी तकनीकी कारण (Technical Error) की वजह से ट्रांजैक्शन बार-बार विफल होता रहा।
10 मिनट में खत्म हुआ जादू
कुदरत का असली झटका अभी बाकी था। करीब 10 से 15 मिनट के इंतजार के बाद जब सीएसपी संचालक ने पैसे निकालने के लिए दोबारा प्रयास किया और खाता दोबारा चेक किया, तो स्क्रीन पर दिख रहा 7.5 अरब का वो पहाड़ जैसा बैलेंस पूरी तरह शून्य (0) हो चुका था।
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बुजुर्ग कामेश्वर मिश्र मायूस होकर अपना सिर पकड़कर वहीं बैठ गए। उनकी आंखों के सामने पल भर में आए सपने ताश के पत्तों की तरह ढह चुके थे।
आसपास के लोगों ने जब उनकी मायूसी का कारण पूछा, तो उन्होंने भारी मन से कहा, "मुझ गरीब के खाते में अचानक इतनी बड़ी रकम आई तो खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन जब निकालने गए तो कुछ भी नहीं मिला। यही मेरी परेशानी और दुख का कारण है।"
वहां मौजूद स्थानीय लोगों ने किसी तरह उन्हें दिलासा दिया और कहा कि इंसान को अपनी मेहनत पर ही भरोसा करना चाहिए, जो अपना है वही अपना रहता है।
बहरहाल, कामेश्वर मिश्र जब वहां से विदा हुए, तो पूरे इलाके में हर कोई उन्हें मुस्कुराहट के साथ '10 मिनट का अरबपति' कहकर पुकार रहा था। यह अजीबोगरीब वाकया पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।