बिहार में नई रेफरल पॉलिसी का असर, मुजफ्फरपुर मॉडल अस्पताल में रात में जटिल सर्जरी से बची महिला की जान
Bihar New Referral Policy: मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में नई रेफरल नीति के तहत चिकित्सकों ने एक महिला की जान बचाई, जिसकी एक्टोपिक प्रेग्नेंसी के कारण फेलोपियन ट्यूब फट गई थी। आपातकालीन सर्जरी से न केवल महिला का जीवन सुरक्षित हुआ, बल्कि उसके मातृत्व की उम्मीदें भी बरकरार रहीं।

मुजफ्फरपुर स्थित मॉडल सदर अस्पताल ! फाइल फोटो
HighLights
मुजफ्फरपुर सदर अस्पताल में महिला की आपातकालीन सर्जरी से जान बची।
एक्टोपिक प्रेग्नेंसी से फटी फेलोपियन ट्यूब का सफल ऑपरेशन।
नई रेफरल नीति के तहत जिला स्तर पर मिली त्वरित चिकित्सा।
प्रशांत कुमार, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Sadar Hospital: बिहार में स्वास्थ्य विभाग की नई रेफरल नीति का सकारात्मक असर अब जमीनी स्तर पर दिखने लगा है।
मुजफ्फरपुर स्थित मॉडल सदर अस्पताल में मंगलवार देर रात गंभीर हालत में पहुंची एक महिला को हायर सेंटर रेफर करने के बजाय चिकित्सकों ने रात में ही आपातकालीन सर्जरी कर उसकी जान बचा ली।
अस्पताल के डॉक्टरों ने त्वरित निर्णय और कुशलता से न केवल महिला की जान बचाई, बल्कि उसके भविष्य में मां बनने की उम्मीदों को भी सुरक्षित रखा।
गंभीर स्थिति में ओपीडी
कुढ़नी प्रखंड के छोटा सुमेरा निवासी मो. मजरे आलम की पत्नी सजरा खातून असहनीय पेट दर्द से कराहते हुए अस्पताल पहुंची थीं। शादी के सात साल बाद यह उनकी पहली गर्भावस्था थी, लेकिन स्थिति बेहद नाजुक और जानलेवा स्तर तक पहुंच चुकी थी।
जिला कार्यक्रम प्रबंधक मो. सलीम जावेद ने बताया कि बाहर से कराई गई जांच में यह एक्टोपिक प्रेग्नेंसी का बेहद जटिल मामला निकला।
फेलोपियन ट्यूब में गर्भ
महिला के गर्भाशय के बाहर बाईं तरफ की फेलोपियन ट्यूब में गर्भ ठहरने के बाद ट्यूब फट चुकी थी, जिससे पेट के भीतर भारी आंतरिक रक्तस्राव हो रहा था।
गंभीर खतरे और मरीज को पटना या अन्य उच्च संस्थान रेफर करने में होने वाली जानलेवा देरी को देखते हुए स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेरणा सिंह ने तुरंत मोर्चा संभाला। मेडिकल टीम ने बिना समय गंवाए आपातकालीन जांचें पूरी कीं और रात में ही इमरजेंसी लैप्रोटॉमी ऑपरेशन करने का साहसिक फैसला लिया।
आंतरिक रक्तस्राव पर काबू
ऑपरेशन थियेटर में चिकित्सकों की टीम ने सबसे पहले फटी हुई ट्यूब से हो रहे रक्तस्राव को नियंत्रित किया और क्षतिग्रस्त हिस्से को सुरक्षित निकाला। सर्जरी के दौरान टीम ने देखा कि महिला के दाहिने अंडाशय में भी एक छिपी हुई गांठ मौजूद थी, जो बाहरी अल्ट्रासाउंड में नजर नहीं आई थी।
मरीज को भविष्य में दोबारा ऑपरेशन के दर्द और जोखिम से बचाने के लिए डॉक्टरों ने तुरंत परिजनों की सहमति ली और उसी समय गांठ को भी सुरक्षित निकाल दिया।
मातृत्व की उम्मीद सुरक्षित
महिला की कोई संतान नहीं होने के कारण मेडिकल टीम ने पूरे ऑपरेशन को बेहद संवेदनशीलता और सावधानी के साथ अंजाम दिया ताकि प्रजनन क्षमता बची रहे। स्वास्थ्य विभाग की नई व्यवस्था के तहत जिला स्तर पर ही ऐसी त्वरित व जटिल सर्जरी होना मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है।
अस्पताल प्रबंधन ने मरीज को तीन महीने का स्वास्थ्य लाभ लेने की सलाह दी है, जिसके बाद उन्हें गर्भधारण के लिए उचित चिकित्सकीय परामर्श दिया जाएगा।
