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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Aug 09, 2025 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    Swatantrata Ke Sarathee: ड्रापआउट लड़कियों को पढ़ाई से जोड़ उनकी जिंदगी में फैला रहीं ज्ञान की रोशनी

    Updated: Sat, 09 Aug 2025 03:07 PM (IST)

    Bihar News राज्य के आठ जिलों मुजफ्फरपुर सीतामढ़ी शिवहर पश्चिम चंपारण गया कैमूर रोहतास और पटना में शिक्षा चौपाल की 150 से अधिक महिलाएं बेटियों को शिक् ...और पढ़ें

    बालिका शिक्षा के प्रति महिलाओं को जागरूक करतीं शिक्षा चौपाल की सदस्य। सौ . शिक्षा चौपाल
    बालिका शिक्षा के प्रति महिलाओं को जागरूक करतीं शिक्षा चौपाल की सदस्य। सौ . शिक्षा चौपाल

    HighLights

    1. 150 से अधिक शिक्षा चौपाल के सदस्य बालिका शिक्षा पर कर रहे काम
    2. 20.86 प्रतिशत है बिहार के स्कूलों में विद्यार्थियों के ड्रापआउट की दर
    3. स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी से बेटियां शिक्षा से हो रहीं वंचित
    4. राज्य के आठ जिलों में शिक्षाग्रह केंद्र के तहत शिक्षा चौपाल का संचालन

     मीरा सिंह, मुजफ्फरपुर। शिवहर की गोल्डी कुमारी के माता-पिता मजदूरी करते हैं। बेटी को मां पढ़ाना चाहती थीं, लेकिन पिता और समाज के लोगों ने विरोध किया। ताने दिए कि पढ़-लिखकर क्या करेगी। चूल्हा-चौका ही तो करना है, लेकिन मां अडिग रहीं।

    स्कूल जाना छोड़ चुकी बेटी को पढ़ाने के लिए सिलाई सीखी। दिन में मजदूरी और रात में सिलाई कर बेटी को पढ़ाया। गोल्डी अब ग्रेजुएशन कर रही है। साथ ही मां के साथ शिक्षाग्रह से जुड़कर बेटियों की शिक्षा पर भी काम कर रही।

    गोल्डी की तरह ही मुजफ्फरपुर जिले के मुशहरी की रीता देवी के गांव में बच्चियां स्कूल नहीं जाती थीं, लेकिन उन्होंने बेटी को पढ़ाने का निर्णय लिया। मजदूरी कर इंटर पास कराया। रीता घर-घर जाकर बालिका शिक्षा के प्रति अभिभावकों को जागरूक भी करती हैं।

    उनकी मुहिम से अब गांव की लड़कियां भी स्कूल जाने लगी हैं...। यह सब हो रहा है शिक्षाग्रह मुहिम के तहत संचालित शिक्षा चौपाल की मदद से। शिक्षाग्रह के माध्यम से ड्रापआउट (पढ़ाई बीच में छोड़ना) बच्चियों को स्कूल से जोड़ने का काम किया जा रहा है।

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    राज्य के आठ जिलों मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी, शिवहर, पश्चिम चंपारण, गया, कैमूर, रोहतास और पटना में शिक्षा चौपाल की 150 से अधिक महिलाएं बेटियों को शिक्षा से जोड़ने की मुहिम चला रही हैं। सामाजिक बंधन और चुनौतियों को पार कर ये न सिर्फ समाज में बदलाव की बात कर रही हैं, बल्कि उसे साकार भी कर रही हैं।

    इनकी मेहनत का ही परिणाम है कि अक्टूबर 2024 से लेकर अब तक बिहार में कुल 349 बच्चियों को स्कूल से जोड़ा गया है। मुजफ्फरपुर में 160 और शिवहर में 189 बच्चियों का स्कूल में नामांकन कराया गया है। अन्य जिलों में भी बेटियों को स्कूल से जोड़ने की कोशिश है।

    हर तीन महीने पर चौपाल

    महिलाएं हर तीन महीने पर गावों में जाकर शिक्षा चौपाल लगाती हैं। बालिका शिक्षा का महत्व समझाती हैं। बाल विवाह के दुष्परिणाम बताती हैं। अभिभावकों को शपथ दिलाती हैं कि वे बेटियों को स्कूल भेजेंगे।

    आधार और जन्म प्रमाणपत्र बनवाने में अभिभावकों की मदद भी करती हैं ताकि बच्चियों को छात्रवृत्ति एवं सरकारी योजनाओं का लाभ मिल सके। कस्तूरबा विद्यालय और आसपास के स्कूलों में बच्चियों का नामांकन करवाने के बाद बच्चियां स्कूल जा रही हैं या नहीं इसकी मानीटरिंग भी करती हैं।

    जागरूकता और प्रमाणपत्र नहीं होना कारण

    शिक्षाग्रह के अनुसार 33 प्रतिशत बच्चियां माध्यमिक शिक्षा के बाद पढ़ाई नहीं कर पातीं। करीब 60-70 प्रतिशत आठवीं से 10वीं कक्षा के बीच पढ़ाई छोड़ देती हैं। ड्रापआउट का बड़ा कारण गरीबी, बाल विवाह, लिंग भेद और जागरूकता की कमी है।

    स्कूलों में शौचालय तथा अन्य बुनियादी सुविधाएं नहीं होने के कारण भी लड़कियां माध्यमिक शिक्षा के बाद स्कूल नहीं जाती हैं। जागरूकता के अभाव में दलित बस्तियों में घर के पास स्कूल होने के बावजूद प्राथमिक शिक्षा के बाद 90 प्रतिशत ड्रापआउट की समस्या है।

    मुजफ्फरपुर शिक्षा चौपाल के जिला समन्वयक संतोष सारंग कहते हैं कि लोगों की मानसिकता नहीं बदल रही है। बेटियों की शिक्षा को लेकर लोग इतने उदासीन हैं कि स्कूल में उनका नामांकन ही नहीं करवाते। सातवीं के बाद बच्चियों को स्कूल नहीं भेजते। ज्यादातर परिवार के पास बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र और आधार कार्ड नहीं हैं। इससे बच्चियों को छात्रवृत्ति एवं सरकार की अन्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पाता। यह भी ड्रापआउट का बड़ा कारण है।

    बिहार के स्कूलों में ड्रापआउट दर 20.86 प्रतिशत है। शिक्षा चौपाल ड्रापआउट कम करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इसके जरिये महिलाओं, युवाओं और अभिभावकों को एकजुट करने का काम किया जाता है।

    खुशबू अवस्थी, सह संस्थापक, शिक्षाग्रह