बिहार में 70 से घटकर 53 तक आई चीनी, त्योहार से पहले उपभोक्ताओं को प्रति किलो 17 रुपये की बड़ी राहत
Sugar Price Trend Bihar:बिहार में त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों में बड़ी गिरावट आई है, खुदरा बाजार में अब ...और पढ़ें

त्योहार से पहले चीनी की कीमत में कमी होने के बाद मांग में बढ़ोतरी हो सकती है। फाइल फोटो

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur Sugar Price Fall:बिहार के लोगों के लिए त्योहार से पहले एक राहत की खबर आई है। चीनी की कीमत खुदरा बाजार में 17 रुपये प्रति किलो कम हो गई है।
यानी जो चीनी अभी आप 70 रुपये प्रति किग्रा खरीद रहे थे उसके लिए अब आपको केवल 53 रुपये ही देने होंगे।
मुजफ्फरपुर के थोक बाजार में चीनी का भाव गिरकर 5200 रुपये प्रति क्विंटल यानी 52 रुपये किलो पर आ गया है। इसके मुकाबले खुदरा बाजार में चीनी की बिक्री 53 से 54 रुपये प्रति किलो होनी शुरू हो गई है।
दाम में आई गिरावट
अंडीगोल कारोबारी संघ के सचिव आदित्य बांका ने बताया कि कुछ कारोबारी ने पूर्व में 5400 रुपये प्रति क्विंटल की खरीद कर रखी है। इस वजह से कहीं कहीं खुदरा में चीनी 56 रुपये किलो बिक रही है।
पुराना स्टॉक खत्म होते ही इन दुकानों में भी इसकी कीमत 53 रुपये हो जाएगी। बीते दो दिनों की तुलना में वर्तमान भाव से उपभोक्ताओं को प्रति किलो करीब 17 रुपये तक की सीधी राहत मिल रही है।
घरेलू बजट को राहत
महंगे दाम के कारण जहां आम लोग जरूरत के हिसाब से ही चीनी खरीद रहे थे वहीं अब कीमत घटने से घरेलू बजट पर दबाव कम हुआ है।
कारोबारियों के मुताबिक थोक भाव 5200 रुपये होने के बाद खुदरा बाजार में भी दरें पूरी तरह नीचे आ जाएंगी। दुकानदार परिवहन व ढुलाई खर्च जोड़कर इसे 53 से 54 रुपये बेच सकते हैं।
छह माह का ट्रेंड
बिहार के खुदरा बाजार में जनवरी से मार्च के दौरान चीनी की औसत कीमत 40 से 42 रुपये प्रति किलोग्राम के आसपास चल रही थी।
इसके बाद अप्रैल और मई के महीने में भाव धीरे-धीरे बढ़कर 44 से 46 रुपये प्रति किलो तक पहुंचे। जुलाई और अगस्त में कीमत असामान्य रूप से चढ़ते हुए 60 से 70 रुपये प्रति किलो के उच्च स्तर पर जा पहुंची।
दाम बढ़ने के कारण
चीनी के भाव में इस अचानक उछाल का सबसे बड़ा कारण स्थानीय मिलों में पेराई सत्र का समय से पहले सिमटना रहा। गन्ने की भारी कमी के चलते मिलें तय 150 दिनों के बजाय मात्र 97 दिन ही संचालित हो सकीं।
इसके अलावा सावन और रक्षाबंधन के त्योहारी सीजन में कारोबारियों द्वारा की गई जमाखोरी और सट्टेबाजी ने किल्लत पैदा कर दी।
सरकार का कड़ा एक्शन
कीमतों में बेलगाम उछाल पर अंकुश लगाने के लिए केंद्र और राज्य सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक सीमा निर्धारित कर दी।
थोक एवं खुदरा दोनों श्रेणियों के व्यापारियों के लिए आपूर्ति पोर्टल पर उपलब्ध चीनी के स्टॉक की घोषणा अनिवार्य की गई। इसका सीधा प्रभाव दिखा और स्थिति काबू में आ गई।
बिहार में चीनी की खपत
बिहार अपनी घरेलू जरूरत को पूरा करने के मामले में चीनी उत्पादन में पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग सात से आठ लाख मीट्रिक टन चीनी की खपत दर्ज की जाती है।
इसके विपरीत मौजूदा सत्र में राज्य की चालू चीनी मिलों से केवल 5.85 लाख टन के आसपास ही उत्पादन प्राप्त हो सका है।
दूसरे राज्यों पर निर्भरता
खपत और उत्पादन के बीच के इस बड़े अंतर को भरने के लिए बिहार को अन्य राज्यों की आपूर्ति पर निर्भर रहना पड़ता है। हर महीने हजारों टन चीनी उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र की मिलों से रैक के जरिए बिहार की मंडियों में पहुंचाई जाती है।
बाहरी राज्यों से आवक में थोड़ी भी बाधा आने या ढुलाई भाड़ा बढ़ने पर स्थानीय बाजार में कीमतें तुरंत चढ़ जाती हैं।
