14 अप्रैल को मेष संक्रांति से खत्म होगा खरमास, 16 से शुरू होंगे विवाह के शुभ मुहूर्त
Kharmaas End Date: 14 अप्रैल को मेष संक्रांति के साथ खरमास समाप्त हो जाएगा। इसके बाद 16 अप्रैल से विवाह सहित सभी मांगलिक कार्य शुरू हो जाएंगे। अप्रैल ...और पढ़ें

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समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Mesh Sankranti 2026: वर्तमान में चल रहा खरमास 14 अप्रैल को समाप्त हो जाएगा। इस दिन सूर्य मीन राशि को छोड़कर अपनी उच्च राशि मेष में प्रवेश करेंगे, जिसे मेष संक्रांति कहा जाता है। इसके साथ ही मांगलिक कार्यों पर लगा प्रतिबंध हट जाएगा और विवाह सहित शुभ कार्यों की शुरुआत होगी।
16 अप्रैल से शुरू होंगे विवाह मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित प्रभात मिश्र के अनुसार, खरमास समाप्त होने के बाद 16 अप्रैल से विवाह के शुभ मुहूर्त शुरू हो जाएंगे। अप्रैल में 16, 18, 19, 20, 21, 22, 25, 26, 27, 29 और 30 तारीख को शादी के लिए शुभ तिथियां निर्धारित हैं। इससे बिहार समेत पूरे उत्तर भारत में शादी-विवाह का सीजन जोर पकड़ने वाला है।
अक्षय तृतीया का विशेष संयोग
20 अप्रैल को अक्षय तृतीया का पर्व मनाया जाएगा, जिसे अबूझ मुहूर्त माना जाता है। इस दिन बिना पंचांग देखे भी विवाह और अन्य मांगलिक कार्य किए जा सकते हैं। मान्यता है कि इस दिन किए गए कार्यों का फल अक्षय यानी कभी समाप्त नहीं होने वाला होता है।
अंतिम सप्ताह में भी शुभ तिथियां
अप्रैल के अंतिम सप्ताह में भी कई शुभ संयोग बन रहे हैं। 25 अप्रैल को सीता नवमी के अवसर पर विशेष मुहूर्त रहेगा। इस दिन भगवान श्रीराम और माता सीता की पूजा का खास महत्व है।
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धार्मिक गतिविधियों में आएगी तेजी
खरमास समाप्त होने के बाद मंदिरों और घरों में पूजा-पाठ, हवन और अन्य धार्मिक अनुष्ठानों की रौनक बढ़ जाएगी। ज्योतिषाचार्यों के अनुसार यह समय मांगलिक कार्यों के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है।
बाजारों में दिखेगी रौनक
विवाह सीजन शुरू होने के साथ ही बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ेगी। कपड़े, आभूषण, सजावट और कैटरिंग जैसे व्यवसायों में तेजी आने की संभावना है, जिससे स्थानीय व्यापार को भी लाभ मिलेगा।
क्या है खरमास
भारतीय ज्योतिष के अनुसार जब सूर्य धनु या मीन राशि में प्रवेश करता है, तो उस अवधि को खरमास कहा जाता है। इस दौरान शुभ कार्यों को वर्जित माना जाता है।
खरमास में क्या न करें
- विवाह संस्कार
- गृह प्रवेश या नया घर खरीदना
- मुंडन या जनेऊ संस्कार
- नया व्यवसाय शुरू करना
साल में दो बार लगता है खरमास
खरमास सूर्य के गोचर पर आधारित होता है और साल में दो बार आता है:
धनु खरमास (सर्दियों में)
- शुरुआत: धनु संक्रांति (दिसंबर मध्य)
- अंत: मकर संक्रांति (जनवरी मध्य)
मीन खरमास (गर्मियों में)
- शुरुआत: मीन संक्रांति (मार्च मध्य)
- अंत: मेष संक्रांति (14 या 15 अप्रैल)
ज्योतिषीय कारण
ज्योतिष में गुरु को शुभ कार्यों का कारक माना जाता है। धनु और मीन राशि गुरु की होती हैं। जब सूर्य इन राशियों में आता है, तो गुरु का प्रभाव कम हो जाता है, इसलिए इस अवधि में मांगलिक कार्यों को शुभ नहीं माना जाता। मेष में सूर्य के प्रवेश के साथ ही यह प्रभाव समाप्त हो जाता है और शुभ कार्यों की शुरुआत हो जाती है।