मुजफ्फरपुर-छपरा NH-722 फोरलेन: सरैया के व्यवसायी बोले- बाईपास बनाओ, कारोबार बचाओ
Bihar Fourlane Project: मुजफ्फरपुर-छपरा एनएच-722 के प्रस्तावित फोरलेन निर्माण का सरैया में विरोध शुरू हो गया है। व्यवसायी सड़क चौड़ीकरण से कारोबार प्र ...और पढ़ें


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संवाद सहयोगी, सरैया(मुजफ्फरपुर)। Muzaffarpur Chhapra NH722: मुजफ्फरपुर-छपरा एनएच-722 के प्रस्तावित फोरलेन निर्माण को लेकर सरैया में विरोध शुरू हो गया है।
सड़क चौड़ीकरण से कारोबार प्रभावित होने की आशंका जताते हुए सरैया के व्यवसायियों ने बाजार क्षेत्र को बचाने के लिए बाइपास निर्माण की मांग उठाई है।
एनएचएआइ कार्यालय में सौंपा ज्ञापन
सरैया व्यवसायी संघ के अध्यक्ष शशिकांत साह के नेतृत्व में व्यवसायियों का एक प्रतिनिधिमंडल मंगलवार को छपरा स्थित एनएचएआइ कार्यालय पहुंचा। वहां परियोजना निदेशक से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा गया।
ज्ञापन में व्यवसायियों ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के बजाय बाइपास का निर्माण कराया जाए, ताकि सरैया बाजार और स्थानीय कारोबार सुरक्षित रह सके।
लाइफलाइन है एनएच-722
राष्ट्रीय राजमार्ग-722, जिसे स्थानीय स्तर पर रेवा रोड के नाम से भी जाना जाता है, उत्तर बिहार के प्रमुख व्यावसायिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण मार्ग है।
यह हाईवे मुजफ्फरपुर से शुरू होकर सरैया, रेवाघाट, मकेर और परसा होते हुए छपरा तक जाता है। इसकी कुल लंबाई करीब 74 किलोमीटर है।
फिलहाल यह सड़क मुख्य रूप से टू-लेन है, जिसके कारण रेवाघाट पुल और कई बाजार क्षेत्रों में अक्सर जाम की समस्या बनी रहती है। इसी को देखते हुए इसे फोरलेन में अपग्रेड करने की योजना पर काम चल रहा है।
बाजार बचाने के लिए बाईपास की मांग
व्यवसायियों का कहना है कि सरैया क्षेत्र जिले का प्रमुख व्यावसायिक केंद्र है, जहां हजारों दुकानें संचालित होती हैं और हर महीने करोड़ों रुपये का कारोबार होता है। यदि बाजार क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण किया गया तो हजारों परिवारों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो जाएगा।
उन्होंने बताया कि सरकार पहले से ही कई घनी आबादी वाले इलाकों में बाइपास और वैकल्पिक एलाइनमेंट पर विचार कर रही है। सरैया में भी फ्लाईओवर या बाइपास का विकल्प अपनाया जाना चाहिए।
कई जिलों को मिलेगा लाभ
एनएच-722 फोरलेन परियोजना से मुजफ्फरपुर, सारण और वैशाली जिलों को सीधा फायदा मिलेगा। इसके अलावा सीवान, गोपालगंज और उत्तर प्रदेश की ओर जाने वाले वाहनों को पटना के जाम से बचते हुए एक वैकल्पिक तेज मार्ग उपलब्ध हो सकेगा।
परियोजना पूरी होने के बाद करीब 40 से 50 लाख आबादी को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष लाभ मिलने का अनुमान है। माल ढुलाई तेज होगी और रेवाघाट पुल पर लगने वाले लंबे जाम से राहत मिलेगी।
800 से 1200 करोड़ तक लागत
जानकारी के अनुसार, फोरलेन निर्माण, पुल चौड़ीकरण और बाइपास निर्माण को लेकर डीपीआर और भू-अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। परियोजना की अनुमानित लागत 800 करोड़ से 1200 करोड़ रुपये के बीच रहने की संभावना जताई जा रही है।
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परियोजना निदेशक ने दिया आश्वासन
प्रतिनिधिमंडल की बात सुनने के बाद परियोजना निदेशक ने आश्वासन दिया कि व्यवसायियों की मांग और सुझावों को वरिष्ठ अधिकारियों के समक्ष रखा जाएगा।
प्रतिनिधिमंडल में रामप्रीत राय, धीरज शुक्ला, सुरेंद्र साह, नन्हक साह, अनमोल कुमार, कृष्णदेव ठाकुर, गोविंदा कुमार और शिवचंद्र रमण समेत कई व्यवसायी मौजूद थे।