वक्त रहते जागें, साइलेंट किलर बनी किडनी की बीमारी; डॉक्टर बोले- जांच से ही होगा बचाव
मुजफ्फरपुर में किडनी की बीमारी एक गंभीर समस्या बन गई है, जहां लगभग 10% आबादी इसकी चपेट में है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, 80% मामलों में अनियंत्र ...और पढ़ें

वक्त रहते जागें, साइलेंट किलर बनी किडनी की बीमारी; खतरे में 10% आबादी! (AI Generated Image)

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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। सावधान! अगर आप मधुमेह (डायबिटीज) या उच्च रक्तचाप (ब्लड प्रेशर) को हल्के में ले रहे हैं, तो यह आपकी किडनी के लिए डेथ वारंट साबित हो सकता है। शहर की युवा, पुरुष और महिला के जनसंख्या के करीब 10 प्रतिशत आबादी वर्तमान में किडनी की बीमारियों की चपेट में है।
चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 80 प्रतिशत मरीजों की किडनी खराब होने का सीधा संबंध अनियंत्रित शुगर और बीपी से है। विश्व किडनी दिवस के अवसर पर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने जिले के बिगड़ते हालात पर गहरी चिंता जताई है।
जिले के सबसे बड़े अस्पताल श्रीकृष्ण मेडिकल कॉलेज अस्पताल (एसकेएमसीएच) की ओपीडी रिपोर्ट स्वास्थ्य विभाग के लिए खतरे की घंटी है।
पिछले एक वर्ष में किडनी की समस्याओं को लेकर 8 से 10 हजार लोग अस्पताल पहुंचे हैं। इनमें से तीन हजार मरीज ऐसे चिन्हित किए गए हैं, जिनकी स्थिति अत्यंत गंभीर हो चुकी है।
क्यों थम रही है किडनी की रफ्तार?
एसकेएमसीएच के नेफ्रोलाजी विभाग के डॉ. धमेंद्र कुमार बताते हैं कि डायबिटीज व बीपी 80 प्रतिशत सबसे घातक कारण है। शुगर और बीपी किडनी की महीन रक्त धमनियों को छलनी कर देते हैं।
यूरिन इन्फेक्शन व रुकावट (दस प्रतिशत) पेशाब के रास्ते में पथरी या संक्रमण को नजरअंदाज करना भारी पड़ रहा है। इसके साथ ही
अनुवांशिक कारण (5 प्रतिशत) परिवार में पहले से किडनी रोग होने पर अगली पीढ़ी भी इसकी चपेट में आ रही है।
जांच ही बचाव है
चिकित्सकों का कहना है कि किडनी एक ऐसा अंग है जो 70-80 प्रतिशत खराब होने तक कोई लक्षण नहीं दिखाता। जब पैरों में सूजन, भूख की कमी या पेशाब में झाग आने जैसे लक्षण दिखते हैं, तब तक काफी देर हो चुकी होती है।
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शुगर-बीपी पर लगाम, पेनकिलर से तौबा, नियमित जांच, पानी का सही सेवन व नमक का इस्तेमाल कम कर किडनी रोग से बच सकते है।
चिकित्सक बताते हैं कि बिना चिकित्सक की सलाह के दर्द निवारक गोलियां न खाएं, ये किडनी को जला देती हैं। साल में कम से कम एक बार किडनी फंक्शन टेस्ट और यूरिन टेस्ट जरूर कराएं।
शरीर की जरूरत के अनुसार पर्याप्त पानी पिएं, ताकि टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें। भोजन में नमक की अधिक मात्रा बीपी बढ़ाती है, जो सीधा किडनी पर हमला करता है।
चिकित्सक ने लोगों से अपील किया है कि किडनी दिवस पर संकल्प लें कि आप अपनी सेहत के प्रति लापरवाह नहीं रहेंगे। आपकी सजगता ही आपकी किडनी की उम्र बढ़ा सकती है।