मुजफ्फरपुर में मृत्यु भोज का बहिष्कार, औराई के ग्रामीणों ने पढ़ाई पर फोकस का लिया संकल्प
Social Reform In Bihar: मुजफ्फरपुर के औराई प्रखंड में मुसहर समुदाय के ग्रामीणों ने मृत्यु भोज का बहिष्कार करने और ...और पढ़ें

ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि वे मृत्यु भोज से दूरी बना लेंगे। फाइल फोटो
HighLights
औरई के मुसहर समुदाय ने मृत्यु भोज का बहिष्कार किया।
बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान देने का निर्णय लिया।
नशापान करने वालों को प्रशासन के हवाले किया जाएगा।
संवाद सहयोगी, औराई (मुजफ्फरपुर)। Muzaffarpur Musahar Community News: समाज की कमियों को पहचान कर उसके बारे में लोगों को जागरूक करना ही विकास की सही प्रक्रिया होती है। मुजफ्फरपुर के औराई में मुसहर समाज में अब ऐसा ही देखने को मिल रहा है।ఀ
जिला अंतर्गत औराई प्रखंड की विशनपुर गोखुल पंचायत के बैगना मुसहर दलित टोला के ग्रामीणों ने नई राह दिखाई है। गांव के लोगों ने एकमत से मृत्यु भोज में शामिल नहीं होने का फैसला किया है।
इतना ही नहीं बच्चों की शिक्षा पर अधिक से अधिक ध्यान देने तथा नशापान करने वाले को प्रशासन के हवाले करने का निर्णय लिया है। ये फैसले रविवार को विश्वनाथ मांझी की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिए गए।
मृत्यु भोज के लिए दबाव नहीं
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से फैसला लिया कि वे मृत्यु भोज के लिए समाज के किसी सदस्य पर दबाव नहीं बनाएंगे। इतना ही नहीं, इसके नाम पर अपने धन का प्रदर्शन करने वालों से दूर भी रहेंगे।
समाज के लोगों ने शिक्षा के महत्व को स्वीकार करते हुए बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान देने का निर्णय लिया है। वैसे लोग जो संपन्न हैं वे अपने बच्चों को उचित शिक्षा दिलाने के साथ ही साथ अपेक्षाकृत कमजोर लोगों के बच्चों की पढ़ाई पूरी करने में सहायता करेंगे।
नियमित रूप से भेजेंगे स्कूल
ग्रामीणों ने अपने बच्चों को नियमित रूप से विद्यालय भेजने तथा उनकी पढ़ाई में हरसंभव सहयोग करने का संकल्प लिया। जो अपने बच्चे को नहीं पढ़ा रहे हैं उनको इसका महत्व बताते हुए स्कूल भेजने के लिए प्रेरित करेंगे।
वहीं नशापान पर रोक लगाने के लिए कमेटी बनाई गई। इस कमेटी की जिम्मेदारी होगी कि वह समाज को नशापान से मुक्त होने में मदद करे। कोई नशापान करते हुए पकड़ा जाता है तो कमेटी उसे प्रशासन के हवाले करेगी।
इस बैठक में शामिल अनिल मांझी, रामदेव मांझी समेत अन्य ग्रामीणों का कहना था कि कुरीतियों से दूरी और शिक्षा से नजदीकी ही समाज में बदलाव का महत्वपूर्ण कारक साबित हो सकता है।
मृत्यु भोज केवल दिखावा
मृत्यु भोज की वजह से लोगों पर आने वाले आर्थिक दबाव के बारे में बैठक में मौजूद लोगों ने विस्तार से बात की। उनका कहना था कि इस तरह के भोज की कोई शास्त्रीय परंपरा नहीं रही है।
यह समय के साथ समाज में फैली एक कुरीति है जो अब दिखावे का रूप ले चुकी है। कहा गया कि पूर्व में केवल ब्राह्मण भोजन की परंपरा थी।
बाद में इसका बड़ा रूप सामने आया। इसकी वजह से मध्यम व निम्न आय वर्ग के लोगों को होने वाली परेशानी और उनके परिवार के विकास की राह में आने वाली बाधा की चर्चा की गई।
पढ़ाई पर करें खर्च
लोगों ने कहा कि निर्धन नहीं कहलाने के चक्कर में कर्ज लेकर मृत्यु भोज का आयोजन किया जाता है। इस तरह लोग आर्थिक दुष्चक्र में फंस जाते हैं।
उनका मानना था कि इस तरह के आयोजनों में खर्च होने वाले धन का उपयोग बच्चों की शिक्षा पर करना लाभकारी साबित होगा।
इतना ही नहीं, उनका कहना था कि इन आर्थिक पहलुओं के साथ ही साथ धर्मगुरु व शास्त्र के जानकारों का भी यही मानना है कि इसमें दिखावे अधिक होने से लोगों को परेशानी हो रही है। इसलिए दूर रहना ही उचित है।
मृत्यु भोज को लेकर समाज की अवधारणा में जब बदलाव होगा तो उसका सकारात्मक प्रभाव शिक्षा के प्रचार प्रसार के रूप में देखने को मिलेगा।
यह भी पढ़ें- दरभंगा में मृत्युभोज का बहिष्कार, मां की याद में 2100 पौधे लगाकर पेश की नई मिसाल
