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मुजफ्फरपुर अग्निकांड: पैर टूटा हो या हल्की बुखार, ICU में चल रहा था इलाज; पैसे की भूख में लूटकेंद्र बना अस्पताल

Published: Sat, 06 Jun 2026 04:50 AM (GMT+05:30)

मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल की ICU में आग लगने से दो मरीजों, चंचला वर्मा और उदय कुमार की मौत हो ...और पढ़ें

प्रसाद अस्पताल। फोटो जागरण

प्रसाद अस्पताल। फोटो जागरण

HighLights

  1. मुजफ्फरपुर के प्रसाद अस्पताल की ICU में लगी आग।

  2. चंचला वर्मा और उदय कुमार समेत दो मरीजों की मौत।

  3. अस्पताल पर लापरवाही और अत्यधिक शुल्क लेने का आरोप।

जागरण टीम, मुजफ्फरपुर। मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल की ICU में आग लगने से मरीं बेलसंड की रुपौली गांव की चंचला वर्मा (50) अपने गांव में आंगनबाड़ी सेविका के रूप में कार्य कर रही थीं। वह आंगनबाड़ी कर्मचारी यूनियन की प्रखंड अध्यक्ष भी थीं।

घटना से एक दिन पूर्व बेटी से मिलने मुजफ्फरपुर के जीरो माइल स्थित उसके आवास पर गई थीं। अपराह्न करीब तीन बजे वह बाथरूम में गिर गईं। इससे पैर में फ्रैक्चर हो गया था।

असहनीय दर्द होने के कारण दामाद ने प्रसाद हॉस्पिटल में भर्ती कराया। जहां डॉ. उपेंद्र प्रसाद ने उन्हें तुरंत आइसीयू में भर्ती कर दिया। उनसे आइसीयू के एक दिन के चार्ज के रूप में 15 हजार रुपये समेत लगभग 25 हजार रुपये जमा कराए गए थे।

भर्ती होने के करीब 12 घंटे बाद आइसीयू में आग लग गई। उनके पति कुशेष प्रसाद ने नाती के साथ पत्नी से मिलने का प्रयास किया, लेकिन पांचवी मंज़िल पर स्थित आइसीयू तक नहीं पहुंच पाए।

परिवार के लोगों ने उनका अंतिम संस्कार मुजफ्फरपुर में ही कर दिया। मृतका के पति कुशेष प्रसाद जगन्नाथ सिंह महाविद्यालय, बेलसंड में कार्यालय सहायक के पद से सेवानिवृत्त हैं। उन्हें तीन बेटियां हैं। तीनों की शादी हो चुकी है।

हुआ था बुखार, भेज दिया था आइसीयू में

तरियानी छपरा थाना क्षेत्र के विशंभरपुर निवासी किसान सह बीमा अभिकर्ता उदय कुमार की मुजफ्फरपुर के प्रसाद हॉस्पिटल में लगी आग में दम घुटने से मौत के बाद स्वजन सदमें में हैं। पत्नी नीलू देवी के आंसू नहीं थम रहे।

मामूली बुखार के बाद वे उनके बीच नहीं रहेंगे, ऐसा सोचा भी नहीं था। स्वजन का कहना है कि दो दिन तक उनका बुखार नहीं उतरा तो उन्हें लेकर पहली जुलाई को प्रसाद हॉस्पिटल चले गए।

जहां चिकित्सक ने भर्ती कर लिया था। बुधवार की रात उन्हें आइसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। गुरुवार तड़के अस्पताल में लगी आग में दम घुटने से मौत हो गई। गुरुवार को ही शव गांव लाया गया और अंतिम संस्कार कर दिया गया। वे अपने पीछे पत्नी नीलू देवी, पुत्र सत्यम कुमार, पुत्री आकांक्षा, पायल व ज्योति को छोड़ गए हैं।

घटना के वक्त मौजूद बेटी आकांक्षा का आरोप है कि अस्पताल के गार्ड व कर्मी चाहते तो न केवल पिता, बल्कि अन्य लोगों की जान बचाई जा सकती थी। घटना के बाद गार्ड व कर्मी गेट बंद कर फरार हो गए।

वह भाई के साथ आइसीयू में घुसकर अस्पताल के पिछले गेट से पिता को बाहर निकालने में सफल रहीं, लेकिन उनकी मौत हो चुकी थी। इस दौरान दोनों भाई-बहन के हाथ झुलस गए।

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