17 अगस्त को अद्भुत संयोग में मनाई जाएगी नागपंचमी, शिव पूजा और कालसर्प दोष शांति का विशेष महत्व
Nag Panchami Festival Date: इस बार नागपंचमी 17 अगस्त को हस्त नक्षत्र, साध्य और शुभ योग के अद्भुत संयोग में मनाई जाएगी। यह तिथि कालसर्प दोष शांति और भग ...और पढ़ें


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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Kaal Sarp Dosh Puja Vidhi: इस बार नागपंचमी का महापर्व 17 अगस्त सोमवार को हस्त नक्षत्र, साध्य और शुभ योग के अद्भुत संयोग में मनाया जाएगा।
धर्मशास्त्रों के अनुसार श्रावण शुक्ल पंचमी तिथि पर भगवान विष्णु के प्रिय शेषनाग सहित सभी नागदेवताओं की विशेष पूजा की जाती है।
नागपूजन के बाद ही गृह देवताओं की आराधना करने की समृद्ध परंपरा है, जिससे घर में सुख, समृद्धि और मंगल का वास होता है।
विशेष फलदायी तिथि
कालसर्प दोष से पीड़ित जातकों के लिए यह तिथि ज्योतिषीय दृष्टि से विशेष फलदायी मानी गई है। ऐसे जातक यदि कालसर्प गायत्री मंत्र का 21 हजार बार जप कर दशांश हवन करें, तो दोष की शांति होने लगती है।
गरुड़ पुराण में अनंत, वासुकि, तक्षक, कर्कोटक, पद्म, महापद्म, कुलिक और शंखपाल नागों को विभिन्न ग्रहों का प्रतीक बताया गया है।
रुद्राभिषेक का महत्व
पंडित प्रभात मिश्र, पंडित दिवाकर ओझा, पंडित पुरेंद्र मिश्र और पंडित शिवेंद्र मिश्र ने इस तिथि का विशेष धार्मिक महत्व बताया है।
श्रावण मास में सोमवार के दिन नागपंचमी पड़ने से इसका ज्योतिषीय और धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है। इस दिन भगवान शिव का रुद्राभिषेक और नागदेवता की पूजा करने से भक्तों को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
पूजन की विधि
नागपंचमी के दिन घर के मुख्य द्वार पर गोबर से सर्प की आकृति बनाने का विधान है। इसके साथ ही सरसों और बालू से रक्षा घेरा तैयार कर दूध, दही, अक्षत, पुष्प और नैवेद्य अर्पित किया जाता है।
नागदेवता एवं इन्द्राणी देवी की विधिवत पूजा-अर्चना करने और ब्राह्मण भोजन कराने का भी इस दिन विशेष महत्व बताया गया है।