Vijaya Ekadashi 2026: 13 फरवरी को रखा जाएगा व्रत, जानें शुभ मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि
Vijaya Ekadashi Date: माघ मास की विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। यह भगवान विष्णु को समर्पित है और जीवन की बाधाएं दूर कर मनोकामनाएं पूर्ण करत ...और पढ़ें

Hindu Fast February 2026: विजया एकादशी से जीवन में शांति कायम रहती है। फाइल फोटो
HighLights
विजया एकादशी 13 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी।
भगवान विष्णु की कृपा से बाधाएं दूर होती हैं।
पूजा विधि में ब्रह्म मुहूर्त स्नान और दान शामिल।
अमरेंद्र तिवारी, मुजफ्फरपुर। Vijaya Ekadashi Muhurat: विजया एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाई जाती है। यह जगत के पालनकर्ता भगवान विष्णु की पूजा का पर्व है। इस वर्ष 13 फरवरी 2026 (शुक्रवार) को यह मनाई जाएगी।
हिंदू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजया एकादशी करने वाले श्रद्धालु पर भगवान की विशेष कृपा होती है। उनके जीवन की बाधाएं कम होती हैं। कार्यालय के कार्य या व्यापार में किसी की वजह से आ रही बाधा खुद-ब-खुद दूर हो जाती है।
इस संबंध में ज्योतिषाचार्य पंडित अभिषेक चतुर्वेदी ने बताया कि एकादशी तिथी 12 फरवरी 2026 यानी गुरुवार को पूर्वाह्न में 11:07 बजे से प्रारंभ होकर अगले दिन 13 फरवरी 2026 यानी शुक्रवार को दोपहर 01:06 बजे तक है। अतः उदया तिथी के अनुसार शुक्रवार 13 फरवरी को ही एकादशी होगी। उन्होंने बताया कि पारण का मुहूर्त अगले दिन शनिवार 14 फरवरी 2026 को सूर्योदय के समय 06:26 के बाद गोदधि से किया जाएगा।
ज्योतिषाचार्य पंडित अभिषेक चतुर्वेदी
भगवान राम ने भी किया था व्रत
विजया एकादशी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि भगवान प्रभु श्रीराम जब लंका विजय के लिए जा रहे थे तो उन्होंने एकादशी का व्रत किया था। उनको ऋषियों के ऐसा करने की सलाह दी थी। इस व्रत के उपरांत उन्हें लंका विजय के लिए समुद्र पार करने और रावण पर जीत हासिल करने का मार्ग मिला था।
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ऐसी मान्यता है कि उसी समय से लोग अपने-अपने जीवन की बाधाओं को दूर करने और मनोवांछित फल की आशा में विजया एकादशी करते हैं। जो श्रद्धालु नियमपूर्वक इस व्रत को करते हैं उनको कठिन से कठित स्थिति से मुक्ति मिल जाती है। रुके हुए कार्य संपन्न होते हैं। पापों का नाश होता है।
विजया एकादशी की पूजा विधि
इस दिन श्रद्धालु को ब्रह्म मुहूर्त में ही बिस्तर का त्याग करने के बाद स्नान कर लेना चाहिए। उसके बाद नया न हो तो साफ सुथरा कपड़ा पहनना चाहिए। उसके बाद जगत के पालनहार भगवान विष्णु के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए। घर में ही वेदी स्थापित करें और उस पर सप्तधान्य रखें। उसके बाद कलश स्थापित करें।
कलश के ऊपर भगवान विष्णु की मूर्ति या चित्र को स्थापित करें। इसके बाद पीले रंग के फूल, फल, तुलसी दल, धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद विजया एकादशी की व्रत कथा का खुद से पाठ करें या फिर कहीं कथा हो रही हो तो उसे श्रवण करें और भगवान विष्णु की आरती करें।
व्रत की अवधि में निराहार रहना ही श्रेष्ठ माना जाता है। बावजूद अपने स्वास्थ्य का ख्याल रखते हुए फल और दूध का सेवन कर सकते हैं।
विशेष ध्यान देने की बात
एकादशी के दिन चावल का सेवन पूरी तरह से वर्जित माना गया है। तुलसी के पत्ते भी नहीं तोड़ने चाहिए। इसलिए श्रद्धालुओं को चाहिए कि वे पूजा से एक दिन पहले ही पूजा के लिए विशेष रूप से तुलसी दल का संग्रह कर लें।
व्रत का पारण अगले दिन शुभ मुहूर्त में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा देने के बाद ही करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इससे व्रत का पूर्ण फल हासिल होता है। मनोकामना की सिद्धि होती है। विधान पूर्वक इस व्रत को करने के बाद जीवन में शांति व सफलता का वास होता है।
