मुजफ्फरपुर में 10 नए प्रखंडों के गठन की तैयारी तेज, डीएम से 16 बिंदुओं पर मांगी रिपोर्ट
Bihar Administrative Reform: ग्रामीण विकास विभाग ने जिलाधिकारी से 16 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जिसमें संबंधित क्षेत्रों का नक्शा भी शामिल ह ...और पढ़ें

Rural Development Report: संबंधित क्षेत्रों का नजरिया नक्शा भी उपलब्ध कराने को कहा गया है। प्रतीकात्मक फोटो

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, मुजफ्फरपुर। Muzaffarpur New Blocks: जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने के उद्देश्य से 10 नए प्रखंडों के गठन की कवायद एक बार फिर तेज हो गई है।
ग्रामीण विकास विभाग ने इस संबंध में जिला पदाधिकारी से 16 बिंदुओं पर विस्तृत रिपोर्ट दोबारा तलब की है। रिपोर्ट के साथ संबंधित क्षेत्रों का नजरिया नक्शा भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है तो जिले में प्रखंडों की संख्या 16 से बढ़कर 26 हो जाएगी। इसके साथ ही अनुमंडलों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार संभव है। वर्तमान में दो अनुमंडल जिला मुख्यालय में ही संचालित हो रहे हैं, जिससे प्रशासनिक दबाव बना रहता है।
जनसंख्या के अनुपात में प्रखंडों की संख्या कम होने के कारण लंबे समय से नए प्रखंडों की मांग उठती रही है। मुख्यमंत्री की पिछली यात्रा के दौरान कुढ़नी विधायक एवं पूर्व मंत्री केदार प्रसाद गुप्ता ने मनियारी को प्रखंड बनाने का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था।
संभावित नए प्रखंड
प्रस्तावित सूची के अनुसार भीखनपुर, देवरिया, पहसौल, बरियारपुर, मनियारी, हथौड़ी, भुसरा, पानापुर और बसौली को नए प्रखंड के रूप में शामिल किया जा सकता है। इसके अलावा कटरा प्रखंड के उत्तरी क्षेत्र की 13 पंचायतों को अलग कर एक और प्रखंड बनाने का सुझाव है।
इन नए प्रखंडों में विभिन्न मौजूदा प्रखंडों की पंचायतों को मिलाकर प्रशासनिक इकाई बनाई जाएगी। मनियारी में कुढ़नी की कई पंचायतों को शामिल करने का प्रस्ताव है, जबकि भुसरा में गायघाट, कटरा और बोचहां की पंचायतों को जोड़ा जा सकता है। बसौली प्रखंड में बोचहां की चयनित पंचायतों को शामिल करने की तैयारी है।
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क्या होगा लाभ
नए प्रखंड बनने से अंचलों की संख्या में भी वृद्धि होगी और बीडीओ तथा सीओ की तैनाती संभव होगी। इससे राजस्व मामलों के निपटारे में तेजी आएगी और विकास योजनाओं के क्रियान्वयन पर स्थानीय स्तर पर बेहतर निगरानी हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को छोटे-छोटे प्रशासनिक कार्यों के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ नहीं लगानी पड़ेगी।
सरकार द्वारा मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय होगी। यदि प्रस्ताव को हरी झंडी मिलती है तो जिले की प्रशासनिक संरचना में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।