बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी तेज, परिसीमन शुरू होते ही गांवों में बढ़ी राजनीतिक हलचल
बिहार में पंचायत चुनाव की तैयारी तेज हो गई है, जिसके तहत नालंदा के करायपरसुराय प्रखंड में पंचायतों का परिसीमन ...और पढ़ें

परिसीमन शुरू होते ही गांवों में चुनावी चर्चा तेज
HighLights
करायपरसुराय प्रखंड में पंचायतों का परिसीमन कार्य शुरू।
2011 की जनगणना के आधार पर होगा क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण।
मुखिया, सरपंच सहित कई पदों पर बदलाव की संभावना।
संवाद सूत्र, करायपरसुराय(नालंदा)। बिहार सरकार की ओर से पंचायतों के परिसीमन की अधिसूचना जारी होने के साथ ही करायपरसुराय प्रखंड में पंचायत एवं निर्वाचन क्षेत्रों के नए सिरे से निर्धारण की प्रक्रिया शुरू हो गई है। वर्ष 2011 की जनगणना के आंकड़ों के आधार पर पंचायतों की सीमाओं और निर्वाचन क्षेत्रों का पुनर्निर्धारण किया जाना है।
परिसीमन पूरा होने के बाद मुखिया, पंचायत समिति सदस्य, सरपंच, पंच और वार्ड सदस्य के निर्वाचन क्षेत्रों में बदलाव की संभावना है।
परिसीमन शुरू होते ही गांवों में चुनावी चर्चा तेज
प्रखंड विकास पदाधिकारी नंदकिशोर कुमार की देखरेख में परिसीमन का कार्य चल रहा है। प्रक्रिया शुरू होते ही गांव-देहात में चुनावी चर्चाएं तेज हो गई हैं। ग्रामीण चौक-चौराहों और चाय-नाश्ते की दुकानों पर संभावित पंचायतों और गांवों के नए समीकरण को लेकर चर्चा कर रहे हैं।
वहीं, चुनाव की तैयारी में जुटे संभावित प्रत्याशियों की नजर परिसीमन से होने वाले हर बदलाव पर टिकी है। ग्रामीण आबादी, गांवों की स्थिति और संभावित सीमाओं का अपने स्तर पर आकलन कर रहे हैं।
सात पंचायतों में हैं 225 पद
करायपरसुराय प्रखंड में डियांवा, मखदुमपुर, सांध, करायपरसुराय, मकरौता, बेरथू और गोंदूविगहा समेत कुल सात पंचायत हैं। वर्तमान में यहां एक जिला परिषद सदस्य, सात मुखिया, सात सरपंच, 10 पंचायत समिति सदस्य, 100 पंच और 100 वार्ड सदस्य के पद हैं।
आबादी के आधार पर तय होंगे निर्वाचन क्षेत्र
प्रस्तावित मानकों के अनुसार करीब सात हजार की आबादी पर एक मुखिया, लगभग पांच हजार की आबादी पर एक पंचायत समिति सदस्य और करीब 50 हजार की आबादी पर एक जिला परिषद सदस्य का निर्वाचन क्षेत्र निर्धारित किए जाने की संभावना है। वार्ड सदस्य और पंच के पदों का निर्धारण भी संबंधित क्षेत्र की आबादी के आधार पर होगा।
पंचायत और वार्ड की सीमाओं में हो सकता है बदलाव
परिसीमन के चलते कई पंचायतों और वार्डों की सीमाओं में बदलाव संभव है। हालांकि अंतिम रूप से कितने पद और निर्वाचन क्षेत्र होंगे, यह प्रारूप प्रकाशन, दावा-आपत्ति और उसके निस्तारण के बाद ही स्पष्ट होगा। अंतिम अधिसूचना के बाद नई पंचायत व्यवस्था की तस्वीर साफ होगी।
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