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    बिहार के लाल का दुनिया में डंका: जिम के शौक ने बनाया एथलीट, डाइट के लिए बेचा ई-रिक्शा; अब देश को दिलाया मेडल

    Updated: Sat, 25 Jul 2026 08:42 PM (IST)

    दिव्यांग भारोत्तोलक झंडू कुमार ने ग्लासगो राष्ट्रमंडल खेल में कांस्य पदक जीतकर देश का मान बढ़ाया। उन्होंने पौष्टिक आहार के लिए ई-रिक्शा और ठेला बेचकर ...और पढ़ें

    झंडू कुमार। फाइल फोटो

    झंडू कुमार। फाइल फोटो

    HighLights

    1. झंडू कुमार ने राष्ट्रमंडल खेल में कांस्य पदक जीता।

    2. पौष्टिक आहार के लिए ई-रिक्शा और ठेला बेचा।

    3. नालंदा के इस खिलाड़ी ने निर्धनता को मात दी।

    राकेश कुमार वीरेन्द्र, हरनौत (नालंदा)। स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में देश के लिए पहला पदक जीतने वाला दिव्यांग भारोत्तोलक झण्डू कुमार ने निर्धनता को मात देकर उपलब्धि प्राप्त की है।

    झण्डू कुमार ने दिव्यांग भारोत्तोलन में भारत को कांस्य पदक दिलाया। इन्होंने पौष्टिक आहार के लिए अपनी ई-रिक्शा और ठेला बेच दी थी। बिहार में नालंदा जिले के हरनौत के सबनहुआ डीह निवासी 28 वर्षीय यह खिलाड़ी माता-पिता की सब्जी की दुकान चलाने में सहयोग करते थे।

    गृहस्थी के कारण उनकी अनुपस्थिति में झण्डू ही दुकान पर बैठते थे। इन्होंने घर का खर्च जुटाने के लिए ई-रिक्शा और ठेला भी चलाया। जब इनके कोच ने बताया कि भारोत्तोलन मैच में विजेता बनने के लिए शारीरिक ताकत बढ़ानी होगी, इसके लिए धन चाहिए। इनके पास रुपए नहीं थे।

    पौष्टिक आहार जुटाने के लिए इन्होंने घर वालों की सहमति से ई-रिक्शा और ठेला बेच दी। सब्जी दुकान चलाई और लगभग ढाई लाख रुपए का प्रबंध किया था। अब झण्डू की वैश्विक पहचान बन गई है।

    राष्ट्रमंडल में झण्डू की जीत पर मां की आंखों में खुशी के आंसू

    स्काटलैंड के ग्लासगो में आयोजित राष्ट्रमंडल खेल में दिव्यांग भारोत्तोलक बिहार के नालंदा जिले के हरनौत का सबनहुआ डीह निवासी 28 वर्षीय झण्डू कुमार के 190 किग्रा उठाकर कांस्य पदक जीतने पर उनकी मां कमला देवी और पिता रामानंद पासवान की आंखें खुशी के मारे भर आईं।

    मां ने कहा, हमेशा देश का मान बढ़ाने का आशीर्वाद दिया। इस बार भी स्काटलैंड रवाना होने के दौरान तिरंगा लहराकर आने का आशीर्वाद दिया था। मां और पिता हरनौत में आलू, टमाटर और अन्य सब्जियों की दुकान चलाते हैं।

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    मां कमला देवी ने कहा कि झण्डू बचपन से ही मेहनती है। लगनशील है। उसने दिव्यांगता को कभी अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया। हमलोगों को खेल के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। झण्डू ही कुछ-कुछ बताता रहता था कि वजन उठाने का खेल, खेलता हूं।

    उन्होंने कहा, सब्जी बिकने से हुई आमदनी उस पर खर्च करते थे। ई रिक्शा और ठेला बेचकर खर्च जुटाने में हामी भरी। उसने संघर्ष किया और कई पुरस्कार जीते। झण्डू की आर्थिक स्थिति बहुत कमजोर है।

    सरकारी स्तर पर घर बनाये जाने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। राष्ट्रमंडल में पदक जीतने की सूचना पर माता-पिता की सब्जी दुकान पर लोग बधाई देने पहुंच रहे हैं।

    सरकारी नौकरी की प्रतीक्षा में झण्डू

    झण्डू की अंतर्राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियों के आधार पर वर्ष 2024 से इनके सभी खर्च भारत सरकार उठा रही है। बिहार सरकार ने भी सहायता की है। झण्डू के कोच रहे नालंदा लक्ष्य पारा खेल अकादमी के सचिव कुंदन कुमार पांडेय ने बताया कि बिहार सरकार ने झण्डू को तीन बार बिहार खेल सम्मान दिया है।

    इसके तहत प्रशंसा पत्र और दो-दो लाख रुपये मिले हैं। अबतक बिहार सरकार से पुरस्कार खेलवृति भी मिलती रही है। इस बार उच्च स्तरीय स्कालरशिप (बीस लाख रुपये ) के लिए चयनित होने की संभावना है। कोच ने बताया कि बिहार सरकार की मेडल लाओ, नौकरी पाओं के तहत लेवल नौ की नौकरी की प्रक्रिया बढ़ी हुई है।

    अविवाहित है झण्डू

    अंतरराष्ट्रीय पारा पावर लिफ्टर झण्डू कुमार अविवाहित हैं। वह चार भाइयों में सबसे छोटा हैं। तीन बहने हैं। मंझले भाई का देहांत कुछ वर्ष पूर्व हो गया था। इनके भाई भी सब्जियां बेचते हैं। घर वाले इनकी शादी की बात करते थे, लेकिन खेल को समर्पित झण्डू ने विनम्रता पूर्वक मना कर दिया था।

    उनके कोच रहे कुंदन कुमार पांडेय ने कहा कि अब उनकी शादी कराई जा सकती है। तीस जुलाई तक उनकी वापसी हो सकती है। उनका भव्य स्वागत किया जाएगा।

    विश्व पटल पर बढ़ाया देश का मान

    नालंदा पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव सह कोच कुंदन कुमार पांडेय ने उन्हें बधाई दी और बताया कि राष्ट्रमंडल खेल (कामन वेल्थ गेम) में कांस्य पदक जीतना देश और बिहार के लिए गर्व की बात है। इस जीत को ऐतिहासिक बताते हुए सचिव ने कहा कि झंडू ने विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाया।

    झंडू की यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बिहार के दिव्यांग खेल आंदोलन की भी बड़ी उपलब्धि है। उनका संघर्ष संदेश देता है कि यदि प्रतिभा की सही समय पर पहचान, उचित प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन मिले तो सीमित संसाधनों के बावजूद भी वैश्विक मंच पर सफलता प्राप्त की जा सकती है।

    जिम में अभ्यास से शुरू हुआ सफर कॉमनवेल्थ गेम तक पहुंचा

    झण्डू कुमार हरनौत में शुरू में शौकिया जिम ज्वाइन किए थे। जिम में अभ्यास के दौरान उनकी क्षमता को देख जिम के मालिक सह प्रशिक्षक गौतम सिंह ने उन्हें भारोत्तोलन के लिए प्रेरित किया। उसके बाद झण्डू कुमार वर्ष 2019 में नालंदा पारा स्पोर्ट्स एसोसिएशन से जुड़े।

    झंडू कुमार की खेल प्रतिभा की प्रारंभिक पहचान, प्रेरणा एवं मार्गदर्शन में नालंदा पारा स्पोर्ट्स संगठन के सचिव सह कोच कुंदन कुमार पांडे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। वर्ष 2019 से कुंदन कुमार पांडे लगातार उनके साथ जुड़े रहे हैं और उन्हें राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रेरित एवं मार्गदर्शन करते रहे।

    कोच कुंदन ने बताया कि झण्डू कुमार के शुरुआती प्रशिक्षण में हरनौत के राकस्टार जिम के संचालक सह प्रशिक्षक का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिन्होंने उन्हें प्रारंभिक तकनीकी प्रशिक्षण दिया।

    नालंदा पारा खेल संघ से जुड़ने के बाद इनका चयन स्पोर्ट्स अथारिटी ऑफ इंडिया , राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्र, गांधीनगर (गुजरात) में हुआ, जहाँ पारालिंपिक पदक विजेता एवं द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित प्रशिक्षक राजेंद्र सिंह रहेलू के कुशल मार्गदर्शन में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर का प्रशिक्षण प्राप्त किया।

    झंडू कुमार की सफलता के पीछे उनके परिवार का संघर्ष भी प्रेरणादायक है। आज भी उनके माता-पिता हरनौत बाजार में सड़क किनारे फ्लाई ओवर पिलर -31 के पास आलू, प्याज और टमाटर बेचकर परिवार का भरण-पोषण करते हैं।

    उनके भाई भी इसी कार्य में सहयोग करते हैं। झण्डू चार भाइयों में सबसे छोटा है। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार ने उनके सपनों को कभी कमजोर नहीं होने दिया।

    बिहार पैरा स्पोर्ट्स एसोसिएशन के सचिव संदीप कुमार ने भी झंडू कुमार को हर स्तर पर सहयोग एवं प्रोत्साहन प्रदान किया तथा आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

    झंडू कुमार की प्रमुख उपलब्धियां

    • 19वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2021 (कोलकाता) – 65 किग्रा वर्ग में कांस्य पदक
    • 22वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2025 (ग्रेटर नोएडा, उत्तर प्रदेश) – 72 किग्रा वर्ग में 205 किग्रा भार उठाकर स्वर्ण पदक
    • खेलो इंडिया पैरा गेम्स 2025 (नई दिल्ली) – 72 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक
    • बीजिंग वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग वर्ल्ड कप 2025 (चीन) – भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए 192 किग्रा भार उठाकर कांस्य पदक
    • काहिरा वर्ल्ड पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप -2025 (मिस्र) – भारत का प्रतिनिधित्व
    • 23वीं सीनियर राष्ट्रीय पैरा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 (रुड़की, उत्तराखंड) – 72 किग्रा वर्ग में स्वर्ण पदक
    • एशिया–ओशिनिया ओपन पारा पावरलिफ्टिंग चैंपियनशिप 2026 (बैंकॉक, थाईलैंड) – एशिया इवेंट में कांस्य पदक तथा ओपन इवेंट में कांस्य पदक
    • राष्ट्रमंडल खेल ग्लासगो --2026 (स्काटलैंड) में कांस्य पदक

    झंडू कुमार का शानदार प्रदर्शन! उन्होंने पुरुषों के हेवीवेट पैरा पावरलिफ्टिंग इवेंट में ब्रांज मेडल जीतकर कामन वेल्थ गेम - 2026 में भारत के लिए मेडल का खाता खोला है ! उन्हें बधाई ! उनकी यह उपलब्धि उनकी जबरदस्त ताकत, अटूट संकल्प और बरसों की अनुशासित मेहनत का बेहतरीन उदाहरण है ! हर चुनौती का सामना करते हुए और इंटरनेशनल मंच पर शानदार प्रदर्शन करके, उन्होंने पूरे देश का मान बढ़ाया है और अनगिनत भारतीयों को प्रेरित किया है। -नरेंद्र मोदी, प्रधानमंत्री