पाई-पाई जोड़कर दादा ने भरी थी सैनिक स्कूल की फीस, पोते ने भारतीय सेना में अफसर बनकर पूरा किया सपना
नालंदा के बड़ी पहाड़ी निवासी अमृत राजकुमार ने भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर अपने दादा का सपना पूरा किया है। ...और पढ़ें

नालंदा के अमृत राजकुमार ने सातवें प्रयास में भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बनकर पूरा किया दादा का सपना
HighLights
नालंदा के अमृत राजकुमार भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने।
दादा का सपना पूरा किया, सातवें प्रयास में सफलता पाई।
चेन्नई ओटीए से पास आउट, स्पीति वैली में पहली पोस्टिंग।
जागरण संवाददाता, बिहारशरीफ। नालंदा की धरती ने एक बार फिर देश को गौरवान्वित किया है। बड़ी पहाड़ी की तंग गलियों से निकलकर एक साधारण परिवार के बेटे ने भारतीय सेना में अधिकारी बनकर इतिहास रच दिया है।
बड़ी पहाड़ी निवासी अधिवक्ता राजीव रंजन कुमार के बेटे अमृत राजकुमार भारतीय सेना में लेफ्टिनेंट बने हैं। 5 सितंबर 2026 को चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी की प्रतिष्ठित पासिंग आउट परेड में उनके कंधों पर अफसर के सितारे सजे।
अमृत को पैदल सेना की 4 सिख लाइट इन्फेंट्री में कमीशन मिला है। अमृत की कामयाबी सिर्फ एक नौकरी हासिल करने की कहानी नहीं है, बल्कि यह एक दादा के अधूरे सपने, परिवार के संघर्ष और हार के सामने कभी घुटने न टेकने की कहानी है।

दादा ने पाई-पाई जोड़कर जुटाई सैनिक स्कूल की फीस
अमृत के दादा स्वर्गीय शांति लाल का सपना था कि उनका पोता पढ़-लिखकर सेना में बड़ा अधिकारी बने। आर्थिक परिस्थितियां आसान नहीं थीं, लेकिन दादा ने अपनी जरूरतों से ज्यादा पोते की पढ़ाई को प्राथमिकता दी।
उन्होंने पाई-पाई जोड़कर अमृत की सैनिक स्कूल की फीस जुटाई और उनका दाखिला कराने के बाद दुनिया को अलविदा कह दिया। आज पोते के कंधे पर सितारे देखकर परिवार को लगता है कि दादा का सपना आखिरकार पूरा हो गया।
2021 में सैनिक स्कूल से पास आउट हुए अमृत
अमृत ने बिहार शरीफ के बिहार पब्लिक स्कूल से शुरुआती पढ़ाई की और कक्षा छह में सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास कर वहां दाखिला लिया। सात वर्षों तक अनुशासन और कड़ी मेहनत के बाद वर्ष 2021 में सैनिक स्कूल से पास आउट हुए।
दिल्ली विश्वविद्यालय से की बीएससी मैथमेटिक्स ऑनर्स
इसके बाद दिल्ली विश्वविद्यालय से बीएससी मैथमेटिक्स ऑनर्स की पढ़ाई पूरी की। सेना में जाने का जुनून ऐसा था कि असफलताएं भी उन्हें रोक नहीं सकीं। एनडीए की लिखित परीक्षा और एसएसबी पास करने के बावजूद अंतिम मेरिट में कम रैंक के कारण उनका चयन नहीं हो सका।
इसके बाद सीडीएस की तैयारी शुरू की। लगातार छह प्रयासों में सफलता नहीं मिली, लेकिन अमृत ने हार नहीं मानी। आखिरकार सातवें प्रयास में सीडीएस परीक्षा पास कर ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई में जगह बनाई।
चेन्नई में करीब 11 महीने की कठिन सैन्य ट्रेनिंग पूरी करने के बाद 5 सितंबर को वे विधिवत भारतीय सेना का हिस्सा बने। अब अमृत की पहली तैनाती हिमाचल प्रदेश की दुर्गम स्पीति वैली, भारत-चीन सीमा के निकट संवेदनशील क्षेत्र में हुई है।
20 दिनों की पारिवारिक छुट्टी पूरी करने के बाद वे देश की सीमा की निगहबानी के लिए रवाना होंगे। बड़ी पहाड़ी से सेना के अधिकारी तक का अमृत राजकुमार का यह सफर हर उस युवा के लिए मिसाल है, जो असफलताओं के बावजूद अपने सपने को छोड़ने के लिए तैयार नहीं है।
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