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    5 बच्चों का सच छिपाकर बने पार्षद; कुर्सी गई, अब FIR ने बढ़ाईं मुश्किलें, नालंदा के हरनौत में EO ने की प्राथम‍िकी

    Updated: Sat, 01 Aug 2026 12:20 PM (IST)

    हरनौत के पूर्व पार्षद अशोक कुमार के खिलाफ तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने और गलत शपथ-पत्र प्रस्तुत करने के आरोप में प्राथमिकी दर्ज की गई है। ...और पढ़ें

    हरनौत के पार्षद रहे अशोक कुमार पर एफआईआर।

    हरनौत के पार्षद रहे अशोक कुमार पर एफआईआर।

    HighLights

    1. पूर्व पार्षद अशोक कुमार पर हरनौत में प्राथमिकी दर्ज।

    2. तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने और गलत शपथ-पत्र का आरोप।

    3. राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें पदमुक्त कर दिया था।

    संवाद सूत्र, हरनौत (नालंदा): हरनौत नगर पंचायत (नपं) के कार्यपालक पदाधिकारी सौरभ सुमन ने पदमुक्त पार्षद अशोक कुमार के विरुद्ध हरनौत थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है।

    उन पर तथ्य छिपाकर चुनाव लड़ने और गलत शपथ-पत्र प्रस्तुत करने का आरोप है। यह कार्रवाई धरमपुर निवासी गांव के ही पंकज कुमार द्वारा राज्य निर्वाचन आयोग में दर्ज कराई गई शिकायत के बाद की गई है।

    पंकज कुमार ने आरोप लगाया था कि अशोक कुमार की कुल पांच संतानें हैं, जिनमें से दो का जन्म 4 अप्रैल 2008 के बाद हुआ है।

    4 अप्रैल 2008 के बाद हुए दो बच्‍चे 

    बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 के प्रावधानों के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति की 4 अप्रैल 2008 के बाद दो से अधिक जीवित संतानें हैं, तो वह नगर निकाय चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य माना जाता है।

    शिकायतकर्ता ने आयोग के समक्ष एक पुत्र और एक पुत्री के 4 अप्रैल 2008 के बाद जन्म लेने संबंधी दस्तावेज भी प्रस्तुत किए थे।

    मामले की सुनवाई के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने पाया कि अशोक कुमार ने गलत शपथ-पत्र देकर आयोग को गुमराह किया।

    इसके बाद बिहारशरीफ के एसडीएम (निर्वाचन शाखा) ने 10 जुलाई को नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को धोखाधड़ी और गलत शपथ-पत्र देने के मामले में कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया था।

    कार्यपालक पदाधिकारी सौरभ सुमन ने बताया कि आयोग द्वारा वाद संख्या 73/2023 (पंकज कुमार बनाम अशोक कुमार) में पारित आदेश के आलोक में यह कार्रवाई की गई है।

    जांच में पाया गया कि 4 अप्रैल 2008 के बाद अशोक कुमार की दो से अधिक जीवित संतानें थीं। इस कारण वे बिहार नगरपालिका अधिनियम, 2007 की धारा 18(1)(एम) के तहत चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य थे।

    पदमुक्‍त कि‍ए जाने के बाद कानूनी श‍िकंजा 

    इसके बावजूद उन्होंने तथ्य छिपाकर गलत शपथ-पत्र और अंतिम संतान का गलत जन्म प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर चुनाव लड़ा और निर्वाचित हो गए। जांच पूरी होने के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने उन्हें पदमुक्त कर दिया था।

    हरनौत थानाध्यक्ष मुकेश कुमार वर्मा ने बताया कि इस मामले में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और पुलिस जांच में जुटी है।

    गौरतलब है कि वर्ष 2022 के नगर निकाय चुनाव में वार्ड संख्या-19 अनारक्षित था। इस वार्ड से अशोक कुमार और शिकायतकर्ता पंकज कुमार समेत आठ प्रत्याशियों ने पार्षद पद के लिए नामांकन दाखिल किया था। चुनाव में अशोक कुमार विजयी हुए थे।