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भाई नहीं, नालंदा में सौ साल पुराने बरगद को बांधी राखी! वजह जानकर आप भी कहेंगे- वाह

Published: Fri, 28 Aug 2026 08:15 PM (IST)

रहुई के अंबा पंचायत में भाजपा नेता अविनाश मुखिया ने 50 साल पुराने बरगद को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का ...और पढ़ें

भाई की तरह पेड़ की भी रक्षा का संदेश

भाई की तरह पेड़ की भी रक्षा का संदेश

HighLights

  1. अंबा पंचायत में 50 साल पुराने बरगद को बांधी राखी।

  2. भाजपा नेता अविनाश मुखिया ने दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश।

  3. प्रकृति से रिश्ते और पेड़ों की सुरक्षा का लिया संकल्प।

संवाद सूत्र, रहुई(नालंदा)। रक्षाबंधन का पर्व इस बार अंबा पंचायत में भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर इंसान और प्रकृति के रिश्ते का संदेश दे गया। भाजपा नेता अविनाश मुखिया ने अपने सहयोगियों के साथ करीब 100 साल पुराने बरगद के पेड़ को रक्षासूत्र बांधा।

पेड़ की कलाई पर बंधी राखी के जरिए लोगों को उसकी सुरक्षा और संरक्षण का संकल्प दिलाया गया। इस अनूठी पहल में पर्यावरण संरक्षण को रक्षाबंधन के पर्व से जोड़कर समाज को एक सकारात्मक संदेश दिया गया।

मौके पर मौजूद लोगों ने बरगद की नियमित देखभाल और उसकी सुरक्षा का संकल्प लिया। लोगों ने कहा कि पेड़ केवल प्रकृति का हिस्सा नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए विरासत भी हैं।

भाई की तरह पेड़ की भी रक्षा का संदेश

अविनाश मुखिया ने कहा कि रक्षाबंधन प्रेम, सुरक्षा और जिम्मेदारी का पर्व है। जिस तरह बहन भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती है, उसी तरह पेड़ों को भी रक्षासूत्र बांधकर उनकी रक्षा का संकल्प लेना चाहिए।

उन्होंने कहा कि बरगद जैसे पुराने पेड़ किसी क्षेत्र की प्राकृतिक विरासत होते हैं और इन्हें बचाना सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि पौधे लगाने के साथ-साथ पहले से मौजूद पुराने पेड़ों को बचाने पर भी ध्यान दें।

तेजी से हो रही पेड़ों की कटाई और बढ़ते प्रदूषण से पर्यावरण का संतुलन प्रभावित हो रहा है। ऐसे में रक्षाबंधन जैसे पर्व को पर्यावरण संरक्षण से जोड़ना समाज में जागरूकता फैलाने का प्रभावी माध्यम बन सकता है।

पुराने पेड़ों को बचाना भी उतना ही जरूरी

भाजपा नेता ने कहा कि पेड़ मानव जीवन के आधार हैं और इनके बिना स्वस्थ पर्यावरण की कल्पना नहीं की जा सकती।

उन्होंने कहा कि केवल नए पौधे लगाना ही पर्याप्त नहीं, बल्कि वर्षों से खड़े विशाल और पुराने पेड़ों का संरक्षण भी जरूरी है।

ऐसे पेड़ छाया देने के साथ पर्यावरण को संतुलित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। उन्होंने हर भाई-बहन से अपील की कि इस रक्षाबंधन कम से कम एक पेड़ की रक्षा का संकल्प लें।

उन्होंने कहा कि यदि समाज का हर व्यक्ति प्रकृति के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझे तो पर्यावरण संरक्षण का अभियान जनआंदोलन बन सकता है। कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भी पर्यावरण की रक्षा और पेड़ों को बचाने का संदेश लोगों तक पहुंचाने का संकल्प लिया।

नेपाल की आपदा का जिक्र, प्रकृति से छेड़छाड़ पर चेताया

अविनाश मुखिया ने नेपाल में आई भयानक प्राकृतिक आपदा का जिक्र करते हुए कहा कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाए रखना बेहद जरूरी है।

उन्होंने कहा कि प्राकृतिक आपदाएं मानव समाज के लिए चेतावनी हैं और इनसे हमें सबक लेने की जरूरत है। प्रकृति के संरक्षण के प्रति लापरवाही का असर आने वाली पीढ़ियों को भी भुगतना पड़ सकता है।

उन्होंने लोगों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों को रोकने की अपील की।

रक्षासूत्र बांधने की यह पहल इसी सोच का प्रतीक बनी कि पेड़ भी हमारी जिंदगी की रक्षा करते हैं और उनकी रक्षा करना हमारा कर्तव्य है।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बरगद के संरक्षण का संकल्प लेते हुए पर्यावरण बचाने का संदेश घर-घर पहुंचाने की बात कही।