पुरोहित संघ ने जारी किया पूजा का कैलेंडर, 11 अक्टूबर से नवरात्र और 3 को जितिया व्रत
कर्मकांड पुरोहित संघ, हिलसा ने आगामी आश्विन नवरात्र और जितिया पर्व की तिथियों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया है। नवरात्र ...और पढ़ें

पुरोहित संघ ने जारी किया पूजा का कैलेंडर, 11 अक्टूबर से नवरात्र और 3 को जितिया व्रत (AI Generated Image)
HighLights
नवरात्र 11 अक्टूबर से कलश स्थापना के साथ होगा प्रारंभ।
जितिया व्रत 3 अक्टूबर को, 4 अक्टूबर को सुबह पारण।
विजयादशमी 20 अक्टूबर को, हिलसा में 21 को प्रतिमा विसर्जन।
संवाद सहयोगी, हिलसा (नालंदा)। कर्मकांड पुरोहित संघ ने आगामी आश्विन नवरात्र के कार्यक्रम एवं पूजा की तिथियों पर सर्वसम्मति से निर्णय लिया। संघ के अनुसार, 11 अक्टूबर रविवार से नवरात्र आरंभ होगा और इसी दिन प्रात: कलश स्थापना के साथ शैलपुत्री देवी की पूजा होगी।
12 अक्टूबर को ब्रह्मचारिणी, 13 को चंद्रघंटा, 14 को कुष्मांडा तथा 15 अक्टूबर को स्कंदमाता की पूजा होगी। 16 अक्टूबर को षष्ठी के दिन बिल्वाभि निमंत्रण एवं कात्यायनी देवी की पूजा होगी। प्रतिमा की प्राण प्रतिष्ठा 16 और 17 अक्टूबर की मध्यरात्रि दो बजे से होगी।
17 अक्टूबर को महा सप्तमी पर कालरात्रि दर्शन, 18 अक्टूबर को महाअष्टमी व्रत, महागौरी दर्शन, कन्या पूजन एवं महानिशा पूजा होगी। 19 अक्टूबर को महानवमी पर सुबह आठ बजे से नवरात्र पूर्णाहुति, कन्या पूजन, ब्राह्मण भोजन एवं सिद्धिदात्री दर्शन होगा।
20 अक्टूबर को विजयादशमी पर कलश विसर्जन, जयंती धारण, नीलकंठ दर्शन एवं अपराजिता पूजा के बाद सुबह 9:40 बजे नवरात्र पारण होगा। 21 अक्टूबर को हिलसा की परंपरा के अनुसार प्रतिमा विसर्जन किया जाएगा।
बीते दिवस श्री बड़ी दुर्गा मंदिर के पुजारी सौरभ पांडेय के श्री वत्स ज्योतिष केंद्र कार्यालय में हुई बैठक में हिलसा के विभिन्न दुर्गा पूजा पंडालों एवं काली मंदिर के पुरोहितों ने भाग लेकर जितिया पर्व की तिथियां भी निर्धारित की।
जिसके अनुसार दो अक्टूबर को नहाय-खाय, तीन अक्टूबर को जितिया व्रत तथा चार अक्टूबर को सुबह 7:30 बजे से पारण होगा। वहीं, 22 अक्टूबर को एकादशी व्रत, 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा पर शांति पूजा तथा 26 अक्टूबर को स्नान-दान, वाल्मीकि जयंती एवं पराशर जयंती मनाई जाएगी।
बैठक की अध्यक्षता ब्रजकिशोर पाठक ने की, जबकि संचालन सौरभ पांडेय तथा व्यवस्था दिलीप पांडेय ने संभाली। इस अवसर पर चंद्रभूषण पांडेय, संयोगानंद पाठक, गणेश पांडेय, वैद्यनाथ पाठक, पंकज कुमार पांडेय, सुरेंद्र पांडेय, संतोष कुमार पांडेय, नंदलाल पांडेय, छोटू पांडेय, सरोज सुमन, राजेश कुमार पांडेय, भूषण पांडेय, दशरथ पांडेय, महेश पांडेय, श्रवण पांडेय, बिट्टू पांडेय, राज शांतनु सहित अन्य पुरोहित एवं आचार्य मौजूद थे।
