Janmashtami 2026: 15 वर्षों बाद दुर्लभ जयंती योग, राजगीर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम
राजगीर में 15 वर्षों बाद दुर्लभ जयंती योग के साथ श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व हर्षोल्लास से मनाया जा रहा है। ...और पढ़ें

15 वर्षों बाद दुर्लभ जयंती योग, राजगीर में कृष्ण जन्माष्टमी की धूम
HighLights
राजगीर में 15 वर्षों बाद दुर्लभ जयंती योग का संयोग।
डेहली पब्लिक स्कूल में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया।
राधा-कृष्ण झांकियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने मन मोहा।
संवाद सहयोगी, राजगीर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी को लेकर तीर्थनगरी राजगीर में हर्षोल्लास और उमंग का माहौल है। घरों से लेकर संस्थानों, प्रतिष्ठानों और स्कूलों तक त्योहार जैसा वातावरण बना है। इस बार करीब 15 वर्ष बाद जन्माष्टमी पर दुर्लभ जयंती योग का संयोग बनने से श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह है।
इसी क्रम में डेहली पब्लिक स्कूल में गुरुवार को श्रीकृष्ण जन्माष्टमी उत्सव मनाया गया। राधा-कृष्ण की मनमोहक झांकियों और विद्यार्थियों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम में मौजूद लोगों का मन मोह लिया।
राधा की भूमिका में छात्रा आराध्या व श्रीकृष्ण के रूप में रिया ने आकर्षक प्रस्तुति दी। नृत्य-संगीत में शामिल विद्यार्थियों ने भी अपनी प्रतिभा का परिचय दिया।
चौथी कक्षा की छात्रा इशिका, अंशिका और रिया ने मधुबन में कन्हैया किसी गोपी से मिले, तो राधा कैसे न जले गीत पर नृत्य नाटिका प्रस्तुत की। इसके माध्यम से राधा-कृष्ण के बीच की प्यारी नोंकझोंक को मंच पर जीवंत किया।
वहीं, तीसरी कक्षा की छात्राओं मुस्कान, जिया, सुहानी, रिशिका, अभिलाषा, आशना, माया, आराध्या व रिया ने भजन-नृत्य के माध्यम से माहौल को भक्तिमय बना दिया। राधा रानी लागे, राधा तेरी चुनरी और वो कृष्णा है जैसे गीतों पर भी बच्चों ने मनमोहक प्रस्तुतियां दीं।
स्कूल के निदेशक ललन कुमार व चेयरमैन शैलेंद्र कृष्ण सिंह ने जन्माष्टमी के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि श्रीकृष्ण का जीवन और श्रीमद्भगवद्गीता का संदेश मनुष्य को कर्तव्य, भक्ति, साहस और सदाचार का मार्ग दिखाता है।
जन्माष्टमी भगवान श्रीकृष्ण के प्राकट्य का पर्व है, जो अधर्म के नाश और भक्तों के कल्याण का संदेश देता है।
