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16 महीने से फाइलों में अटका राजगीर को 'राजगृह' बनाने का प्रस्ताव, लोग बोले- पुरानी पहचान का इंतजार

Published: Thu, 17 Sep 2026 09:10 PM (IST)

राजगीर का नाम बदलकर 'राजगृह' करने का प्रस्ताव 16 माह से नगर परिषद की फाइलों में अटका है, जबकि इसे सर्वसम्मति से पारित किया गया था।

राजगीर को 'राजगृह' बनाने का प्रस्ताव 16 माह से फाइलों में लंबित (AI Generated Image)

राजगीर को 'राजगृह' बनाने का प्रस्ताव 16 माह से फाइलों में लंबित (AI Generated Image)

HighLights

  1. राजगीर का नाम 'राजगृह' करने का प्रस्ताव 16 माह से अटका।

  2. नगर परिषद ने सर्वसम्मति से प्रस्ताव पारित किया, पर आगे नहीं बढ़ा।

  3. प्राचीन पहचान, संस्कृति और पर्यटन को मजबूती मिलेगी 'राजगृह' नाम से।

संवाद सहयोगी, राजगीर। प्राकृतिक, पौराणिक, आध्यात्मिक, पुरातात्विक और ऐतिहासिक महत्व को समेटे राजगीर को उसके प्राचीन नाम 'राजगृह' की पहचान दिलाने का प्रस्ताव 16 माह से नगर परिषद की फाइलों में अटका है।

नगर परिषद की सामान्य बोर्ड बैठक में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद इसे जिला प्रशासन और संबंधित सरकारी स्तर तक भेजने की कार्रवाई अब तक नहीं हो सकी है। इससे सभ्यता और संस्कृति प्रेमी लोगों में निराशा है।

जानकारी के अनुसार, 28 मई 2025 को सांसद कौशलेन्द्र कुमार की मौजूदगी में नगर परिषद की सामान्य बोर्ड की बैठक हुई थी। बैठक में तत्कालीन सशक्त स्थायी समिति सदस्य और वरीय वार्ड पार्षद डॉ. अनिल कुमार ने राजगीर का नाम बदलकर 'राजगृह' करने का प्रस्ताव रखा था।

सदस्यों ने ध्वनि मत से प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। बोर्ड से प्रस्ताव पारित होने के बाद नगर परिषद की ओर से आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर इसे जिला प्रशासन के माध्यम से पटना प्रमंडलीय आयुक्त और मंत्रिमंडल सचिवालय को भेजे जाने की उम्मीद थी।

हालांकि, करीब 16 माह बीत जाने के बाद भी प्रस्ताव जिला पदाधिकारी तक नहीं पहुंचा है। संबंधित अधिकारियों के स्तर पर भी प्रस्ताव भेजे जाने की जानकारी सामने नहीं आई है।

प्रस्ताव की मंशा से अधिक कार्यशैली पर सवाल

प्रस्ताव के लंबित रहने से अब नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। शहरवासियों का कहना है कि बोर्ड से सर्वसम्मति से पारित निर्णय को आगे भेजने में इतनी लंबी देरी क्यों हुई। लोगों का मानना है कि 'राजगृह' केवल प्राचीन नाम नहीं, बल्कि राजगीर की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।

प्राचीन काल में राजगृह मगध की राजधानी रहा है। बौद्ध और जैन परंपराओं में भी राजगृह का उल्लेख मिलता है। राजगीर के कई जैन प्रतिष्ठानों के साइनबोर्ड के साथ ऐतिहासिक और पुरातात्विक स्थलों पर भी 'राजगृह' नाम देखने को मिलता है।

केंद्रीय पर्यटन सलाहकार डॉ. कौलेश कुमार, बिहार भारोत्तोलन संघ के अध्यक्ष अरुण कुमार ओझा, पेट्रोलियम एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष संजय कुमार सिंह समेत अन्य लोगों ने कहा कि 'राजगृह' नाम की आधिकारिक पुनर्बहाली से शहर की प्राचीन पहचान को मजबूती मिल सकती है। इससे इतिहास, संस्कृति, धार्मिक परंपरा और पर्यटन को भी नया आयाम मिलने की उम्मीद है।

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