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    सब कुछ जानते थे भगवान, फिर मौन क्यों रहे? शंकर–सती प्रसंग से मिला जीवन का गूढ़ संदेश

    Updated: Mon, 09 Feb 2026 10:16 AM (IST)

    Maha Shivratri Special नवादा के हिसुआ में श्री जगदम्बा प्राण प्रतिष्ठा महायज्ञ के दौरान संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। देवी ज्योति शास्त्री जी ने ...और पढ़ें

    शंकर-सती प्रसंग का वर्णन किया

     शंकर-सती प्रसंग का वर्णन किया

    संवाद सूत्र, हिसुआ(नवादा)।हिसुआ नगर परिषद क्षेत्र के बलियारी में आयोजित श्री जगदम्बा प्राण प्रतिष्ठा सह शतचंडी महायज्ञ के दौरान संगीतमय श्रीराम कथा का शुभारंभ भावनाओं से भरे वातावरण में हुआ। पहले दिन भगवान शंकर और माता सती के प्रसंग का वर्णन किया गया, जिसे सुनकर कथा स्थल पर मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। कथा वाचन देवी ज्योति शास्त्री जी द्वारा किया जा रहा है।

    भगवान जानते थे सब कुछ, फिर भी रोका नहीं-क्यों?

    कथा में उठाया गया सबसे गहरा प्रश्न यही था कि जब भगवान शंकर त्रिकालदर्शी थे, सब कुछ जानते थे, तो फिर माता सती के भ्रम को समय रहते क्यों नहीं रोका? वक्ता ने बताया कि ईश्वर का ज्ञान केवल रोकने के लिए नहीं, बल्कि मनुष्य को स्वयं अनुभव से सीखने का अवसर देने के लिए भी होता है। हर गलती को ईश्वर रोक दें, तो चेतना का विकास संभव नहीं।

    कथा सुनने का फर्क: शंकर और सती का दृष्टांत

    प्रवचन में बताया गया कि जब भगवान विष्णु ने सांसारिक जीवन की कथा सुनाई, तब भगवान शंकर पूरी तन्मयता से उसमें लीन हो गए, जबकि माता सती ध्यानपूर्वक कथा नहीं सुन सकीं। यही असावधानी आगे चलकर उनके जीवन में भ्रम का कारण बनी। कथा ने यह संदेश दिया कि श्रवण केवल कानों से नहीं, चेतना से होना चाहिए।

    राम-सीता प्रसंग: पहचान और विवेक की परीक्षा

    कथा में वर्णन किया गया कि एक बार भगवान शंकर और माता सती मार्ग से गुजर रहे थे, तभी भगवान श्रीराम माता सीता के वियोग में विलाप करते मिले। भगवान शंकर ने तुरंत श्रीराम को पहचान लिया और हाथ जोड़कर नतमस्तक हो गए, लेकिन माता सती संशय में पड़ गईं। यह प्रसंग बताता है कि ज्ञान होते हुए भी यदि मन में अहं या भ्रम हो, तो सत्य पहचान में नहीं आता।

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    जागरूकता का संदेश: हर कर्म पूर्ण मन से करें

    कथावाचन के दौरान देवी ज्योति शास्त्री जी ने कहा कि मनुष्य को जो भी दायित्व मिले, उसे पूरे मन, श्रद्धा और ध्यान से निभाना चाहिए। अधूरा ध्यान भविष्य में पछतावे का कारण बनता है। यह प्रसंग केवल धार्मिक कथा नहीं, बल्कि जीवन प्रबंधन और आत्म-जागरूकता का पाठ है।

    ग्रामीणों की भागीदारी, भक्ति में डूबा क्षेत्र

    कथा में आस-पास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पूरे क्षेत्र में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है। श्रद्धालुओं ने कहा कि शंकर–सती प्रसंग ने उन्हें आत्ममंथन के लिए प्रेरित किया है और जीवन को देखने का नया दृष्टिकोण दिया है।

    12 फरवरी तक चलेगा अनुष्ठान

    आयोजन समिति ने बताया कि यह संगीतमय श्रीराम कथा 7 फरवरी से 12 फरवरी तक प्रतिदिन संध्या में आयोजित की जा रही है। महायज्ञ के दौरान हवन-पूजन, प्रवचन, भजन-कीर्तन और अन्य धार्मिक अनुष्ठान भी होंगे। आयोजन को लेकर पूरे क्षेत्र में विशेष उत्साह और श्रद्धा का माहौल है।