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    राजगीर पुरुषोत्तम मास मेला: रूट डायवर्ट होने से यात्री परेशान, 50 KM में पूरा हो रहा 20 KM का सफर

    Updated: Mon, 18 May 2026 05:05 PM (IST)

    राजगीर में पुरुषोत्तम मास मेले के कारण रूट डायवर्जन से यात्रियों को भारी परेशानी हो रही है। 20 किमी की यात्रा अब 50 किमी तक हो गई है, जिससे समय और पैस ...और पढ़ें

    हिसुआ प्रखंड मुख्यालय स्थित बस पड़ाव

    हिसुआ प्रखंड मुख्यालय स्थित बस पड़ाव

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    नीरज कुमार, हिसुआ। राजगीर में शुरू हुए पुरुषोत्तम मास मेले को लेकर जहां एक ओर श्रद्धालुओं में उत्साह है, वहीं दूसरी ओर आम यात्रियों और स्थानीय लोगों को परेशानियों का भी सामना करना पड़ रहा है। बिहारशरीफ-राजगीर-हिसुआ-गया जी सड़क मार्ग में बदलाव, वाहनों की रोक और वैकल्पिक मार्गों की कमी के कारण लोगों का समय, पैसा और ईंधन तीनों बर्बाद हो रहा है।

    स्थिति यह हो गई है कि जो दूरी पहले 20 किलोमीटर में पूरी हो जाती थी, अब वही सफर 50 किलोमीटर तक की दूरी में पहुंच गया है।

    हिसुआ से बिहारशरीफ जाने वाले यात्रियों को अब राजगीर होकर सीधे जाने की सुविधा नहीं मिल पा रही है। लोगों को हिसुआ से नवादा होकर बिहारशरीफ जाना पड़ रहा है, जिससे यात्रा लंबी और खर्चीली हो गई है।

    वहीं, हिसुआ से राजगीर जाने वाले यात्रियों की परेशानी और बढ़ गई है। यात्रियों को हिसुआ से नवादा, फिर गिरियक होते हुए पंडितपुर तक जाना पड़ता है। इसके बाद बिहारशरीफ जाने वाली गाड़ियां दाहिने मुड़ जाती हैं, जबकि राजगीर जाने वाले यात्रियों को टोटो या छोटे वाहनों के सहारे राजगीर पहुंचना पड़ रहा है।

    पहले जो सफर बमुश्किल एक घंटे में पूरा हो जाता था, अब उसमें ढाई घंटे तक का समय लग रहा है। इससे यात्री परेशान हैं।

    हिसुआ से वनगंगा मोड़ तक ही जा रही बसें

    नवादा से राजगीर जाने वाली बसों को नारदीगंज-राजगीर की सीमा वनगंगा मोड़ पर ही रोक दिया जा रहा है। वहां से यात्रियों को झूला मोड़, जू सफारी और जरादेवी मंदिर होते हुए टोटो पकड़कर आगे जाना पड़ रहा है। इससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

    हिसुआ में बस एजेंट कुंदन कुमार ने बताया कि ईंधन की खपत काफी बढ़ गई है। समय भी अधिक लग रहा है। प्रशासन का आदेश है तो मानना पड़ रहा है। उनकी मानें तो महंगाई के बावजूद बस संचालक किराया नहीं बढ़ा रहे हैं, क्योंकि इसका सीधा असर आम जनता पर पड़ेगा।

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    उन्होंने बताया कि पहले पुरुषोत्तम मास मेला के दौरान नारदीगंज, कुझा, तेतरिया और गंगा जलाशय होते हुए राजगीर के लिए वैकल्पिक मार्ग संचालित किया जाता था। लेकिन कुझा स्थित धनार्जय नदी पर पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण वह रास्ता बंद है, जिससे लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है।

    गया जी से सीधा राजगीर पहुंचने में आ रही परेशानी, तीन से चार घंटे का लग रहा समय

    गया जी से राजगीर जाने वाले यात्रियों की स्थिति भी कम परेशान करने वाली नहीं है। गया से हिसुआ होते हुए राजगीर जाने वाले यात्रियों को अब लगभग 70 किलोमीटर की जगह 100 किलोमीटर तक का सफर तय करना पड़ रहा है, जिसमें करीब तीन से चार घंटे का समय लग रहा है।

    तिलैया से राजगीर के लिए चल रही पांच ट्रेनें, भीड़ अधिक रहने से सीट नहीं मिल रही

    हिसुआ प्रखंड अंतर्गत तिलैया जंक्शन से राजगीर के लिए कुल पांच ट्रेनें संचालित हैं, जिनमें कुछ साप्ताहिक हैं। ऐसे में प्रतिदिन केवल तीन या चार ट्रेनें ही उपलब्ध हो पा रही हैं। भीड़ अधिक होने के कारण यात्रियों को सीट तक नहीं मिल पा रही है।

    स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार जब इतने बड़े धार्मिक मेले का आयोजन करती है, तो आम नागरिकों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए वैकल्पिक सड़क मार्ग, अतिरिक्त बस सेवा और पर्याप्त ट्रेन संचालन जैसी व्यवस्थाएं भी सुनिश्चित करनी चाहिए, ताकि श्रद्धालुओं के साथ-साथ स्थानीय लोगों को भी राहत मिल सके।

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