लाखों अभ्यर्थियों में सिर्फ 36 सीटें: नवादा के शिक्षक की बेटी शिखा राय का RIMC देहरादून में चयन
नवादा जिले की शिखा राय ने अपनी प्रतिभा और दृढ़ संकल्प से राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC), देहरादून में चयन होकर जिले का नाम रोशन किया है। ...और पढ़ें

माता-पिता के साथ शिखा राय। सौ-स्वजन
HighLights
शिखा राय का RIMC देहरादून में प्रतिष्ठित चयन।
लाखों अभ्यर्थियों में से केवल 36 सीटों पर सफलता।
मां के संघर्ष और बेटी के सपने की जीत।
संवाद सहयोगी, वारिसलीगंज (नवादा)। मंजौर पंचायत के सुल्तानपुर गांव की बेटी शिखा राय ने अपनी प्रतिभा, मेहनत और दृढ़ संकल्प के दम पर बड़ी सफलता हासिल की है।
देश के सबसे प्रतिष्ठित सैन्य शिक्षण संस्थानों में शामिल राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज (RIMC), देहरादून में चयनित होकर नवादा जिले का गौरव बढ़ाया है।
गांव के स्कूल से शुरू हुआ सफर, दिल्ली में की तैयारी
शिखा के पिता प्रवीण कुमार शिक्षक हैं, जबकि मां सिंपी कुमारी गृहिणी हैं। शिखा ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वारिसलीगंज के विवेकानंद पब्लिक स्कूल से प्राप्त की।
बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी रही शिखा का सपना सेना में अधिकारी बनने का था। इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए उसने आगे की तैयारी दिल्ली के एक निजी शिक्षण संस्थान में रहकर की।
कड़ी मेहनत, अनुशासन और लगातार अभ्यास के बल पर उसने राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज की कठिन प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की।
लाखों अभ्यर्थियों में सिर्फ 36 का होता है चयन
शिखा ने बताया कि राष्ट्रीय इंडियन मिलिट्री कॉलेज में वर्ष में दो बार प्रवेश परीक्षा आयोजित होती है। इसमें देशभर से लाखों छात्र-छात्राएं आवेदन करते हैं।
लेकिन अंतिम रूप से सिर्फ 36 सीटों पर ही अभ्यर्थियों का चयन किया जाता है। ऐसे प्रतिष्ठित संस्थान में चयन होना किसी भी छात्र के लिए बड़ी उपलब्धि मानी जाती है।
'बेटा नहीं है' कहकर सुनाते थे ताने, आज बेटी बनी गर्व का कारण
शिखा की सफलता के पीछे उसकी मां का संघर्ष भी जुड़ा है। मां सिंपी कुमारी ने भावुक होकर बताया कि उनकी दो बेटियां हैं और बेटा नहीं है। इस वजह से गांव के कई लोग अक्सर ताना मारते थे कि 'बेटा नहीं है, फिर भी बेटी को बाहर पढ़ा रही हो।'
उन्होंने कहा, आज मेरी बेटी ने साबित कर दिया कि बेटियां किसी भी मायने में बेटों से कम नहीं होतीं। अब लगता है कि मेरी बेटी ही मेरा बेटा बनकर परिवार और गांव का नाम रोशन करेगी।
शिखा ने बताया कि उनका सपना भारतीय सेना में अधिकारी बनकर देश की सेवा करना है। उनका मानना है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी मंजिल कठिन नहीं होती।
गांव में जश्न, लोगों ने दी शुभकामनाएं
शिखा के चयन की खबर मिलते ही सुल्तानपुर गांव में खुशी की लहर दौड़ गई। स्वजन, शिक्षक, ग्रामीण और शुभचिंतक लगातार उन्हें बधाई दे रहे हैं।
सभी ने उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आगे भी अपनी मेहनत के दम पर जिले और राज्य का नाम राष्ट्रीय स्तर पर रोशन करेंगी।
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