मछली या शराब में था जहर? पटना में 2 पैग पीते ही मुंह से निकला झाग, खत्म हो गई 4 दोस्तों की जिंदगी
पटना में चार दोस्तों की मछली और शराब पार्टी के बाद संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई।

मौके पर लगी लोगों की भीड़। (वीडियो ग्रैब)
HighLights
पटना में चार दोस्तों की संदिग्ध मौत, जहरीले पदार्थ का सेवन।
मछली-शराब पार्टी के बाद अचानक बिगड़ी तबीयत।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट से मौत का कारण होगा स्पष्ट।
जागरण संवाददाता, पटना। चारों दोस्तों ने दोपहर करीब 12 बजे मछली व शराब पार्टी शुरू की। दो पैग पीने के बाद ही वे अचेत होकर गिर पड़े।
घर वाले पहले नजदीकी निजी क्लीनिक ले गए और हालत में सुधार नहीं होने पर करीब डेढ़ बजे अनुमंडल अस्पताल लेकर पहुंचे। पहले पहुंचे तीनों युवक अचेत थे और उनके मुंह से झाग निकला हुआ था।
डॉक्टरों ने उल्टी कराई लेकिन नहीं हुई। इस बीच चौथा युवक भी पहुंचा और उसने चिकित्सकों के प्रयास के बाद उल्टी की। इस दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण अस्पताल में जमा थे, इसलिए डाक्टर ने एनएमसीएच रेफर कर दिया।
ग्रामीणों का दावा है कि तीन युवकों की अनुमंडल अस्पताल में ही मौत हो चुकी थी। हालांकि, मृत्यु का वास्तविक समय पोस्टमार्टम से ही स्पष्ट होगा।
आईजीआईएमएस के एफएमटी के विभागाध्यक्ष डॉ. अमन कुमार के अनुसार महज डेढ़ से दो घंटे में चारो का गंभीर स्थिति में पहुंचना तीव्र विषाक्तता की आशंका दिखाता है।
तेजी से हालत औद्योगिक स्प्रिट यानी मेथेनाल से बनाई शराब या उसमें अन्य गलत पदार्थों को मिलाने से अत्यधिक तीव्र जहरीला तरल बन सकता है लेकिन किस वजह से मौत हुई है यह बिना सघन प्रयोगशाला जांच के कहना मुश्किल है।
यह जांच आसान नहीं होती, इसमें दो से तीन या इससे भी अधिक समय आराम से लग सकता है। चारो युवकों की एक जैसी स्थिति से यह स्पष्ट है कि चारो की मौत एक ही जहर से हुई है।
मुंह से झाग निकलना, जहर का निश्चित लक्षण नहीं है। तेज जहर के अलावा सांस लेने में परेशानी, अत्यधिक लार बनने, फेफड़ों में स्राव या मिर्गी जैसे दौरे के दौरान भी ऐसा होता है।
दो से तीन माह में मिलेंगे इन सवालों के जवाब
- बोतल में क्या था- बोतल सबसे अहम साक्ष्य, एथेनाल या जहरीला मेथेनाल या कोई अन्य जहरीला रसायन।
- बोतल असली या सिर्फ पैकिंग-ब्रांडेड शराब है तो उसकी सील, कैप, बैच नंबर व तरल की रासायनिक संरचना की जांच जरूरी।
- मृतकों के शरीर में क्या मिला-विसरा, रक्त व अन्य जैविक नमूनों की टाक्सिकोलाजी जांच से पता चलेगा कि शरीर में कौन-सा जहर पहुंचा।
- मछली में तो कुछ नहीं था- मछली, भोजन, मसाले आदि के नमूने भी जांच जरूरी होगी। इसमें भी जहरीला पदार्थ हो सकता है जो शराब से मिलकर अत्यधिक विौला हो गया हो।
- ट्रेटा पैक या बोतल में मिले तरल पदार्थ में क्या-क्या चीजे मिलाई गई थीं, उनके मिश्रण से जो मिश्रण तैयार हुआ, वह कितना जहरीला हो सकता है आदि की जांच में दो से चार माह तक लग सकते हैं।
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