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    यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Dec 22, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

    चुनावी माहौल में आंबेडकर के अपमान को मुद्दा बनाने में जुटी कांग्रेस, वोट बैंक पर पड़ सकता है

    Updated: Sun, 22 Dec 2024 03:27 PM (GMT+05:30)

    बाबा साहब आंबेडकर के अपमान के मुद्दे पर कांग्रेस गृह मंत्री अमित शाह पर हमलावर है। कांग्रेस नेताओं द्वारा प्रदर्शन करके उनके इस्तीफे की मांग की जा रही ...और पढ़ें

    आंबेडकर के अपमान पर जारी है सियासी घमासान
    आंबेडकर के अपमान पर जारी है सियासी घमासान

    HighLights

    1. बिहार में कांग्रेस आयोजित करेगी आंबेडकर सम्मान सप्ताह
    2. जनवरी में इसी मुद्दे पर जनता के बीच जाएंगे पार्टी के नेता

    राज्य ब्यूरो, पटना। संसद में गृह मंत्री अमित शाह के बाबा साहब भीमराव आंबेडकर से जुड़े बयान को कांग्रेस चुनावी मुद्दे के रूप में देख रही है। फिलहाल, प्रदेश की कांग्रेस इकाई पार्टी हाईकमान के निर्देश के आलोक में एक सप्ताह का आंबेडकर सम्मान सप्ताह आयोजित करने जा रही है, लेकिन बात यहीं समाप्त नहीं होगी। आंबेडकर सम्मान के मुद्दे को पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में जनता के बीच भी उठाएगी।

    आंबेडकर सम्मान सप्ताह का आयोजन

    अखिल भारतीय कांग्रेस के महासचिव एवं संगठन प्रभारी केसी वेणुगोपाल ने गृह मंत्री शाह के भाषण के बाद उनके इस्तीफे की मांग को लेकर बिहार के साथ ही तमाम प्रदेश कांग्रेस इकाईयों को आंबेडकर सम्मान सप्ताह आयोजित करने के निर्देश जारी किए हैं।

    जनता के बीच जाएगी कांग्रेस

    सम्मान सप्ताह में कई आयोजन होने हैं। इसके बाद पार्टी की प्रदेश इकाई जनवरी महीने के मध्य से जनता के बीच जाने की तैयारी में है। जहां अन्य तमाम राजनीतिक पहलुओं के साथ ही बाबा साहब के सम्मान का मसला भी पार्टी जनता के बीच उठाएगी। साथ ही पार्टी सांसद और पूर्व अध्यक्ष को झूठे मुकदमों में फंसाने का मसला भी पार्टी उठाएगी।

    वोट बैंक पर पकड़ बनाने की तैयारी

    इस मसले पर 26 दिसंबर को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक भी प्रस्तावित है, जिसमें बिहार के साथ ही दिल्ली में होने वाले चुनावों पर चर्चा होगी और आगे की रणनीति बनेगी।

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    जानकार बताते हैं कि कि बाबा साहब के बहाने कांग्रेस की नजर अनूसूचित जाति एवं जनजाति के वोटों के बीच अपनी पकड़ को मजबूत करने पर है। राज्य में 21 से 22 प्रतिशत अनुसूचित जाति-जनजाति के वोट हैं, जो समय के साथ कांग्रेस से दूर हुए हैं। इन्हें अब पार्टी वापस जोड़ना चाहती है, यही वजह है कि कांग्रेस इस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहती।

    महापुरूषों के अपमान का विरोध प्राथमिकता

    हालांकि, पार्टी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष कौकब कादरी कहते हैं कि बात सिर्फ चुनाव या वोट बैंक की नहीं है। संसद में जिस प्रकार महापुरूषों के अपमान की परंपरा शुरू हो गई है वह शेाभनीय नहीं है।

    पार्टी इस मसले पर मौन नहीं रह सकती है। वे कहते हैं कि भाजपा ने विरोध की एक नई परंपरा शुरू की है, जिसमें महापुरूषों का अपमान, सांसद का अपमान तक शामिल हो चुका है। जिसका विरोध कांग्रेस की प्राथमिकता है।

    अब इसे चुनाव से जोड़कर देखा जाए या किसी और रूप में लिया जाए। बहरहाल कांग्रेस अपनी चुनावी तैयारियों में जुट गई है और बाबा साहब के सम्मान और राहुल गांधी के खिलाफ झूठे मुकदमों को लेकर वह सत्ता पक्ष पर आक्रामक मुद्रा में आती दिख रही है।

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