1 प्रतिशत से कम खर्च करने वाले मुखिया और पंचायत सचिवों पर गिरेगी गाज, एक्शन में बिहार के मंत्री दीपक प्रकाश
बिहार में एक प्रतिशत से भी कम राशि खर्च करने वाले मुखिया और पंचायत सचिवों पर विभागीय कार्रवाई होगी। ...और पढ़ें

मंत्री दीपक प्रकाश। (सोशल मीडिया)
HighLights
एक प्रतिशत से कम खर्च पर मुखिया-सचिवों पर होगी विभागीय कार्रवाई।
15 लाख से अधिक के कार्य बिना टेंडर पर होगी कार्रवाई।
जर्जर पंचायत सरकार भवनों के लिए डीपीआरओ पर विभागीय कार्रवाई।
राज्य ब्यूरो, पटना। जिन पंचायतों ने अभी तक एक प्रतिशत से भी कम व्यय किया है, उनके मुखिया और पंचायत सचिव के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई होगी।
यह कार्रवाई छठे वित्त आयोग की अनुशंसा पर प्रदत्त राशि के संदर्भ में होगी। गुरुवार को पंचायती राज विभाग के सचिव मनोज कुमार ने अधीनस्थ अधिकारियों को इसका निर्देश दिया।
इसी के साथ उन्होंने कहा कि 15 लाख रुपये से अधिक की योजनाओं में निविदा प्रकाशित किए बिना कार्य कराए जाने पर संबंधित पदाधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
उन्होंने छह जर्जर पंचायत सरकार भवनों के मामलों में संबंधित जिला पंचायत राज पदाधिकारियों (डीपीआरओ) के विरुद्ध विभागीय कार्रवाई का निर्देश दिया।
ये सभी निर्देश उन्होंने प्रशिक्षण-सह-समीक्षात्मक बैठक में दी, जो 16वें वित्त आयोग की अनुशंसा तथा विभागीय योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के संदर्भ में हुई।
बैठक की अध्यक्षता करते हुए पंचायती राज मंत्री दीपक प्रकाश ने बताया कि पिछले छह महीनों में विभाग द्वारा 28 हजार करोड़ रुपये के उपयोगिता प्रमाण-पत्र (यूसी) जमा कराए गए हैं।
उन्होंने तीव्रता से योजनाओं का क्रियान्वयन करने वाली पंचायतों को प्राथमिकता के आधार पर राशि उपलब्ध कराने का निर्देश दिया। इससे पंचायतों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्द्धा की भावना विकसित होगी और विकास कार्यों में तेजी आएगी।
विभागीय सचिव ने मुख्यमंत्री ग्रामीण सोलर स्ट्रीट लाइट योजना लापरवाही बरतने वाली एजेंसियों पर अर्थदंड लगाने का निर्देश दिया।
बैठक में बैठक में निदेशक नवीन कुमार, अपर सचिव आदित्य प्रकाश, संयुक्त सचिव वसीम अहमद राज्य के सभी उप विकास आयुक्त (डीडीसी), डीपीआरओ और संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।
मंत्री के तीन निर्देश
1. डाकघरों को किराये के भवनों से निकालकर यथाशीघ्र पंचायत सरकार भवनों में स्थानांतरित किया जाए।
2. पंचायत सरकार भवनों के निर्माण में गुणवत्ताहीन कार्य करने वाली एजेंसियां काली-सूची में डाली जाएं।
3. राज्य-स्तरीय सहयोग कार्यक्रम में आने वाले मामलों का समाधान पंचायत स्तर पर पहले ही हो जाए।