बिहार भाजपा का बढ़ा राष्ट्रीय कद, छह नेताओं को पांच राज्यों की कमान; मंगल पांडेय को असम तो देवेश को अरुणाचल का जिम्मा
बिहार भाजपा के छह नेताओं को राष्ट्रीय संगठन में पांच राज्यों का प्रभारी और सह प्रभारी बनाया गया है। यह ...और पढ़ें

नितिन नवीन, बीजेपी राष्ट्रीय अध्यक्ष
HighLights
छह बिहार भाजपा नेताओं को राष्ट्रीय जिम्मेदारी मिली।
मंगल पांडेय असम, देवेश कुमार अरुणाचल के प्रभारी बने।
निवेदिता सिंह झारखंड, राजेंद्र-पिंकी बंगाल सह प्रभारी।
राज्य ब्यूरो, पटना। भाजपा के राष्ट्रीय संगठन में बिहार के छह नेताओं को अलग-अलग राज्यों का प्रभारी और सह प्रभारी बनाया गया है। पार्टी के संगठनात्मक इतिहास में पहली बार बिहार से एक साथ इतनी बड़ी संख्या में नेताओं को राज्यों की जिम्मेदारी मिली है। इसे राष्ट्रीय संगठन में बिहार भाजपा की बढ़ती भूमिका के तौर पर देखा जा रहा है।
मंगल पांडेय को असम, देवेश कुमार को अरुणाचल का प्रभार
पूर्व प्रदेश अध्यक्ष एवं वरिष्ठ नेता मंगल पांडेय को असम का प्रभारी बनाया गया है। वहीं, देवेश कुमार को अरुणाचल प्रदेश की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दोनों नेताओं के सामने संबंधित राज्यों में संगठनात्मक गतिविधियों के संचालन और केंद्रीय नेतृत्व के निर्देशों के अनुरूप समन्वय की अहम जिम्मेदारी होगी।
सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ की जिम्मेदारी
सिद्धार्थ शंभू को छत्तीसगढ़ का प्रभारी नियुक्त किया गया है। प्रभारी के तौर पर उनकी भूमिका प्रदेश संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय स्थापित करने के साथ संगठनात्मक गतिविधियों को गति देने की होगी।
निवेदिता सिंह को झारखंड का सह प्रभारी बनाया
निवेदिता सिंह को झारखंड का सह प्रभारी नियुक्त किया गया है। उन्हें प्रदेश संगठन के साथ समन्वय करते हुए पार्टी की संगठनात्मक गतिविधियों में भूमिका निभानी होगी।
बंगाल में राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा को जिम्मा
पश्चिम बंगाल में बिहार के दो नेताओं को जिम्मेदारी दी गई है। राजेंद्र सिंह और पिंकी कुशवाहा को प्रदेश का सह प्रभारी बनाया गया है। दोनों नेताओं की भूमिका संगठन और केंद्रीय नेतृत्व के बीच समन्वय में अहम होगी।
राष्ट्रीय संगठन में बिहार की बढ़ी भागीदारी
बिहार भाजपा में संगठन के पुनर्गठन के बाद राष्ट्रीय स्तर पर राज्य के नेताओं को जिम्मेदारियां मिलने का क्रम बढ़ा है। पांच राज्यों में छह नेताओं की नियुक्ति से बिहार भाजपा के संगठनात्मक अनुभव और नेताओं की राष्ट्रीय भूमिका के विस्तार का संकेत मिलता है।
असम, अरुणाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ में प्रभारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी, जबकि झारखंड और पश्चिम बंगाल में सह प्रभारी प्रदेश संगठन के साथ समन्वय करेंगे।
