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    मोदी-शाह की मौजूदगी में बिहार कैबिनेट विस्तार; एक खास कारण से इत‍िहास रचेगा गांधी मैदान

    Updated: Tue, 05 May 2026 10:01 AM (IST)

    सम्राट चौधरी सरकार का कैबिनेट विस्तार समारोह पटना के गांधी मैदान में आयोजित होगा, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह सहित कई वरिष्ठ नेता शाम ...और पढ़ें

    HighLights

    1. सम्राट कैबिनेट का विस्तार गांधी मैदान में होगा।

    2. पीएम मोदी, अमित शाह समारोह में शामिल होंगे।

    3. गांधी मैदान में पहली बार मंत्रियों का शपथ ग्रहण।

    डिजिटल डेस्क, पटना। बिहार की सियासत में बड़ा घटनाक्रम होने जा रहा है। सम्राट चौधरी की सरकार बनने के 22 दिन बाद 7 मई को राजधानी पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में भव्य कैबिनेट विस्तार समारोह आयोजित होगा।

    इसे लेकर प्रशासनिक और राजनीतिक स्तर पर तैयारियां तेज कर दी गई हैं। वीवीआईपी के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा के पुख्‍ता इंतजाम क‍िए जा रहे हैं।  

    भाजपा के प्रदेश अध्‍यक्ष संजय सरावगी के अनुसार समारोह में नरेन्द्र मोदी, अमित शाह, राष्‍ट्रीय अध्‍यक्ष न‍ित‍िन नवीन, पूर्व सीएम नीतीश कुमार और भाजपा के कई वरिष्ठ नेता शामिल होंगे।

    साथ ही विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री भी इस बड़े आयोजन के गवाह बनेंगे। वीवीआईपी मौजूदगी को देखते हुए सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए जा रहे हैं।

    चुनाव के कारण टला था विस्तार

    दरअसल, पांच राज्यों में चल रहे विधानसभा चुनाव के चलते बिहार में मंत्रिमंडल विस्तार टल गया था। अब तीन राज्यों में एनडीए की जीत के बाद गठबंधन उत्साहित है और इसी ऊर्जा के साथ शपथ ग्रहण को भव्य रूप देने की तैयारी की जा रही है।

    नए चेहरों को मिल सकता है मौका

    सूत्रों के मुताबिक, इस विस्तार में कई नए चेहरों को मंत्रिमंडल में जगह मिल सकती है। जातीय और क्षेत्रीय संतुलन साधने के साथ-साथ संगठन में सक्रिय नेताओं को भी मौका दिए जाने की चर्चा है। 

    जानकारी के अनुसार जदयू और भाजपा के मंत्र‍ियों की संख्‍या समान रहेगी। पहले मंत्री रह चुके कुछ नेताओं का व‍िभाग बदलने की भी चर्चा है।  

    गांधी मैदान में पहली बार होगा ऐसा आयोजन

    नीतीश कुमार ने 2025 में चुनाव जीतने के बाद यहीं शपथ ली थी, लेकिन इस बार खास बात यह है कि केवल मंत्रियों का शपथ ग्रहण होगा।

    गांधी मैदान के इतिहास में यह संभवतः पहली बार होगा जब मुख्यमंत्री नहीं, बल्कि सिर्फ मंत्रियों का सामूहिक शपथ ग्रहण आयोजित किया जाएगा।

    इस कार्यक्रम को शक्ति प्रदर्शन और राजनीतिक संदेश दोनों के तौर पर देखा जा रहा है, जिससे आने वाले समय की रणनीति के संकेत भी मिल सकते हैं।