बिहार में चुनाव से पहले बने आयोग आठ महीने बाद भी निष्क्रिय, सरकार की मंशा पर उठे सवाल
नीतीश सरकार द्वारा 2025 चुनाव से पहले गठित कई आयोग, जैसे उद्यमी, युवा और नागरिक परिषद, आठ महीने बाद भी ...और पढ़ें

बिहार में चुनाव से पहले बने आयोग 8 महीने बाद भी भूमिकाहीन, सरकार की मंशा पर सवाल

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राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार विधानसभा चुनाव 2025 से पहले नीतीश सरकार ने सामाजिक संतुलन एवं वोट बैंक साधने की रणनीति के तहत कई नए आयोगों का गठन और कुछ का पुनर्गठन किया था। उद्देश्य था युवा, उद्यमी, व्यवसायी समाज सहित विभिन्न वर्गों को राजनीतिक रूप से साधना और उन्हें सत्ता तंत्र में सहभागिता का संदेश देना। इसी क्रम में राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग, बिहार राज्य युवा आयोग एवं बिहार राज्य नागरिक परिषद बनाने की पहल हुई।
हालांकि, गठन आठ महीने बाद भी इन आयोगों की जमीनी स्थिति सवालों के घेरे में है। जिन अध्यक्षों एवं सदस्यों की नियुक्ति अधिसूचना के जरिए की गई थी, उन्हें अब तक न तो दायित्व ग्रहण करने के लिए औपचारिक रूप से बुलाया गया है और न ही किसी प्रकार की कार्य योजना सौंपी गई है। कई पदधारक ऐसे हैं, जिन्हें अब तक यह भी स्पष्ट नहीं है कि उनका कार्यालय कहां संचालित होगा।
राज्य उद्यमी एवं व्यवसायी आयोग का उद्देश्य व्यापारियों और उद्यमियों की समस्याओं को सरकार तक पहुंचाना और नीतिगत सुझाव देना था, लेकिन आयोग की निष्क्रियता के चलते व्यापारिक संगठनों में निराशा है। उद्यमियों की कोई सुनने वाला नहीं है।
इसी तरह युवा आयोग, जिसे रोजगार, कौशल विकास एवं शिक्षा से जुड़े मुद्दों पर सरकार का सलाहकार बनना था, वह भी कागजों तक सीमित नजर आ रहा है। इसमें मनोनयन को लेकर राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के कार्यकर्ताओं को बेसब्री से प्रतीक्षा है। ऐसी ही स्थिति राज्य नागरिक परिषद की है। उपाध्यक्ष से लेकर सदस्य सरकार से लेकर अधिकारियों के बीच अधिसूचना का पत्र लिए भटक रहे हैं।
अफसर ही नहीं, अब तो मंत्री भी भाव नहीं दे रहे हैं। स्थिति यह है कि अधिकारी पत्र का जवाब तक नहीं दे रहे हैं। मंत्री, सचिव से लेकर मुख्य सचिव तक को पत्र लिख चुके हैं। परिणाम शून्य है। पार्टी की ओर से सब्जबाग दिखाया जा रहा है। कई नेता ऐसे हैं जिन्होंने अफसरों की हीलाहवाली से आहत होकर पार्टी नेतृत्व को दायित्व ग्रहण करने से भी इन्कार कर दिया है।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 25 से अधिक नई चीनी मिल चलाने, रोजगार सृजन के लिए उद्योग लगाने के साथ ही कई नवाचार की घोषणा की चुनाव से पहले की थी। संभवत: इसी को ध्यान में रखते हुए ताबड़तोड़ आयोग, बोर्ड, निगम एवं परिषद आदि में मनोनयन को लेकर अधिसचूना में पार्टी नेताओं, पदाधिकारियों एवं कार्यकर्ताओं को समायोजित किया गया था।
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