वैभव सूर्यवंशी शतकवीर तो 'रन मशीन' बने आयुष लोहारुका; बल्ले की चमक से फलक पर छा रहे बिहार के युवा
यह लेख बिहार के दो युवा क्रिकेटरों, वैभव सूर्यवंशी और आयुष लोहारुका की उपलब्धियों पर प्रकाश डालता है। 14 वर्षीय वैभव ने सबसे कम उम्र के आईपीएल खिलाड़ी ...और पढ़ें

वैभव सूर्यवंशी व आयुष लोहारुका। जागरण आर्काइव
HighLights
वैभव सूर्यवंशी सबसे कम उम्र के आईपीएल खिलाड़ी और शतकवीर बने।
आयुष लोहारुका ने रणजी और विजय हजारे में शानदार प्रदर्शन किया।
दोनों युवा क्रिकेटर बिहार के लिए नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं।
अक्षय पांडेय, पटना। वैभव सूर्यवंशी बल्ला थाम नित नए कीर्तिमान गढ़ दुनिया में चमक बिखेर रहे हैं। जिस दिन वे मैदान पर उतरते हैं, कुछ ऐसा करते हैं, जिसके साथ 'पहली बार' की संज्ञा जुड़ जाती है।
14 वर्षीय बाएं हाथ के आक्रामक बल्लेबाज ने साबित किया कि उम्र कोई बाधा नहीं है। क्रिकेटर ने असाधारण उपलब्धियां के दम पर 2025 में राष्ट्रपति से प्रधानमंत्री राष्ट्रीय बालवीर पुरस्कार ग्रहण किया।
वैभव की कहानी सीख देती है कि सपने साकार करने के लिए सिर्फ समर्पण की जरूरत है। समस्तीपुर के ताजपुर के साधारण परिवार से निकलकर वैभव ने अपनी मेहनत और जुनून से क्रिकेट की दुनिया में तहलका मचा दिया है।
27 मार्च 2011 को जन्मे क्रिकेटर ने मात्र 12 वर्ष की उम्र में 2024 में रणजी ट्राफी में बिहार के लिए पदार्पण किया। 13 वर्ष की उम्र में आईपीएल नीलामी में राजस्थान रायल्स ने उन्हें खरीदा, जो आईपीएल इतिहास का सबसे युवा खिलाड़ी बनने का रिकार्ड है।
2025 में आईपीएल में उन्होंने 35 गेंदों में शतक जड़ा, जो आईपीएल का सबसे युवा शतक है। दिसंबर 2025 में विजय हजारे ट्राफी में 14 वर्ष 272 दिनों की उम्र में 36 गेंदों पर शतक बनाकर लिस्ट ए क्रिकेट में सबसे युवा शतकवीर बने।
उन्होंने 84 गेंदों में 190 रन बनाकर सबसे युवा लिस्ट ए शतक का रिकार्ड भी अपने नाम किया। 2026 में यूथ वनडे साउथ अफ्रीका अंडर-19 में उन्हें भारत की कप्तानी मिली, तो खेल और निखर गया।
टीम को 3-0 से जीत दिलाई ही, तीन पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक लगाकर 206 रन बना डाले। 68.66 के औसत से बनाए गए रन के दौरान उनके बल्ले से 12 चौके और 20 छक्के निकले।
पिता से लेने हौसला मैदान पर उतर गया बेटा
बीते वर्ष एलीट ग्रुप में रणजी खेल रही बिहार की टीम की बल्लेबाजी उत्तर प्रदेश जैसे मजबूत राज्य के खिलाफ बिखरी, तो दरभंगा के विकेटकीपर आयुष लोहारुका ने पारी संभाल शतक जड़ दिया।
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मैच भले यूपी के नाम रहा, पर दरभंगा का खिलाड़ी छा गया। इसके बाद वे रुके नहीं। कभी विकेट के पीछे, तो कभी आगे आकर कुछ न कुछ योगदान दिया।
रणजी, सैयद मुश्ताक अली और विजय हजारे जैसे प्रमुख घरेलू टूर्नामेंटों में कड़ी मेहनत और स्वजनों के समर्थन से वे सपनों को हकीकत में बदलने लगे।
आयुष बताते हैं कि किराने की दुकान का संचालन करने वाले पिता आनंद लोहारुका का क्रिकेट पसंदीदा खेल रहा। उसी समय उन्होंने मन बनाया कि जब खिलाड़ियों को हौसला देने के लिए पिता को ताली बजानी ही है, तो क्यों न मैं ही मैदान पर उतरूं।
आयुष खेलते और दर्शक दीर्घा में प्रोत्साहित करने पिता पहुंच जाते। रन बनाने के लिए उत्साह बढ़ने लगा। खेल में ऐसा मन रमा कि 23 वर्षीय क्रिकेटर ने 10वीं के बाद अध्ययन नहीं किया।
स्वजनों ने पढ़ाई के लिए कभी दबाव नहीं डाला, यही कहा, जो मन में है वो करो, कुछ अच्छा ही होगा। जज्बा था। कोच राॅबिन का मार्गदर्शन मिला, तो ऊंचाइयों को छूने लगे।
विराट कोहली (Virat Kohli) की आक्रामकता और हार्दिक की हरफनमौला क्षमता से प्रेरित क्रिकेटर ने अबतक रणजी ट्राफी के 10 मुकाबलों की 16 पारियों में 60.28 की औसत से 844 रन बनाए हैं।
इसमें तीन शतक और चार अर्धशतक शामिल हैं। इसी तरह लिस्ट ए यानी 50 ओवर के खेल में छह मैच की चार पारियों में एक शतक और एक अर्धशतक की बदौलत 65 के औसत से 260 रन जोड़े हैं।
इस सत्र में प्लेट ग्रुप में विजय हजारे ट्राफी पर बिहार को कब्जा दिलाने में आयुष की बड़ी भूमिका रही। उन्होंने 65 की औसत से छह मैच की चार पारियों में 260 रन बना डाले।