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    बिहार में इथेनॉल उद्योग पर गहराया संकट, खतरे में 10 हजार से अधिक लोगों की नौकरी

    Updated: Wed, 18 Mar 2026 08:58 PM (GMT+05:30)

    बिहार में ग्रेन आधारित इथेनॉल उद्योग गंभीर संकट में है, जिससे 10 प्रमुख प्लांट बंद हो गए हैं। इथेनॉल आपूर्ति में कटौती और तेल कंपनियों द्वारा खरीद में ...और पढ़ें

    बिहार में इथेनॉल उद्योग पर गहराया संकट, खतरे में 10 हजार से अधिक लोगों की नौकरी (AI Generated Image)

    बिहार में इथेनॉल उद्योग पर गहराया संकट, खतरे में 10 हजार से अधिक लोगों की नौकरी (AI Generated Image)

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    राज्य ब्यूरो, पटना। बिहार में ग्रेन आधारित इथेनॉल उद्योग गंभीर संकट से गुजर रहा है। राज्य के 10 प्रमुख इथेनॉल प्लांट बंद हो चुके हैं। इसका प्रभाव उद्योग, रोजगार के साथ किसानों पर व्यापक प्रभाव पड़ा है। प्लांट बंद होने के पीछे मुख्य कारण इथेनॉल आपूर्ति में 50 से 55 प्रतिशत आपूर्ति पर रोक एवं आयल कंपनियों द्वारा इथेनॉल खरीद से कन्नी काटना माना जा रहा है।

    यही कारण है कि बक्सर जिले के नवानगर स्थित इथेनॉल प्लांट को दिनांक 17 मार्च से एक माह के लिए बंद कर दिया गया है। प्रबंधन द्वारा सभी कर्मचारियों को अवकाश पर भेजने का आदेश जारी किया गया है। अब प्लांट के संचालन को अगले तिमाही (मई से जुलाई) के लिए संभावित आदेश पर निर्भर बताया जा रहा है।

    सूत्रों के अनुसार, यह समस्या केवल एक प्लांट तक सीमित नहीं है, बल्कि बिहार के लगभग सभी इथेनॉल प्लांट इसी स्थिति का सामना कर रहे हैं।

    बताया जा रहा है कि आयल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा नवंबर 2025 से बिहार से इथेनॉल की खरीद में कमी की गई है, जबकि अन्य राज्यों से अधिक खरीद की जा रही है। इस नीति के कारण बिहार के उद्योगों को गंभीर आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है।

    बिहार के इथेनॉल प्लांट मालिकों ने इस मुद्दे को लेकर राज्य और केंद्र सरकार के कई उच्च पदस्थ अधिकारियों एवं नेताओं से लगातार संपर्क किया है। इसमें बिहार के मुख्यमंत्री, उद्योग मंत्री, साथ ही केंद्र में प्रधानमंत्री, गृह मंत्री, पेट्रोलियम मंत्री एवं पेट्रोलियम सचिव तक को पत्र लिखे गए हैं।

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    इसके अतिरिक्त सभी संबंधित को भी स्थिति से अवगत कराया गया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आई है।

    इस संकट का सबसे बड़ा असर रोजगार पर पड़ा है। इथेनॉल प्लांटों के बंद होने से बिहार में 10,000 से अधिक लोगों की नौकरी पर खतरा मंडरा रहा है। वहीं, मक्का उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है, क्योंकि इथेनॉल उत्पादन में मक्का एक प्रमुख कच्चा माल है।